ऑस्ट्रेलिया में पहलवानी के गुर सिखा रहा है एक भारतीय

 बुधवार, 15 अगस्त, 2012 को 04:28 IST तक के समाचार
कुलदीप बस्सी

कुलदीप चाहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय भी कुश्ती में आगे आएं

ऑस्ट्रेलिया के कुश्ती कोच भारतीय मूल के कुलदीप बस्सी कहते हैं कि हिंदुस्तानियों की कुश्ती में रुचि कम है और यहां पहलवानी करने वाले ज्यादातर लोग गोरे ही हैं.

क्लिक करें कुलदीप बस्सी से साक्षात्कार सुनें

14 साल की उम्र में ऑस्ट्रेलिया पहुंचे कुलदीप बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही कुश्ती का शौक था और इसी शौक ने उन्हें यहां तक पहुंचा दिया.

विक्टोरिया में बीते 12-13 साल से कुश्ती क्लब चला रहे कुलदीप ने बीबीसी को बताया कि उनके क्लब से अच्छे पहलवान निकले हैं जो राष्ट्रमंडल खेलों और ओलंपिक तक पहुंचे हैं.

कुलदीप बताते हैं कि उनके काम को देखते हुए उन्हें ऑस्ट्रेलिया में कुश्ती को आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई.

ऑस्ट्रेलिया में कुश्ती का भविष्य

"ऑस्ट्रेलिया में भारत के मुकाबले कम पहलवान हैं. यहां हम अच्छे पहलवान बनाने की कोशिश कर रहे हैं. वैसे यहां जितने भी पहलवान हैं, अच्छे हैं. भारतीय तो यहां पैसे कमाने में लगे हैं. उन्हें वक्त कम ही मिलता है. हम कोशिश करते हैं कि यहां के भारतीय भी कुश्ती में हिस्सा लें तो और भी अच्छा होगा"

कुलदीप बस्सी

ऑस्ट्रेलिया के कुश्ती कोच के रूप में लंदन आए कुलदीप ने बताया कि इस बार ओलंपिक के लिए उनके देश से एकमात्र पहलवान ही क्वालिफाई कर पाया.

क्या आप खुद भी पहलवान रहे हैं, ये पूछने पर कुलदीप बताते हैं, ''मैं भी पहलवान रहा हूं. मैंने भारत में कुश्तियां लड़ी हैं. ऑस्ट्रेलिया में भी कुश्ती लड़ते रहे हैं.''

क्या आपने कभी कुश्ती में ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व किया है, इस सवाल पर वे कहते हैं, ''मुझे वर्ष 1988 के ओलंपिक में एक खिलाड़ी के तौर पर ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला था, लेकिन किसी वजह से कर नहीं पाया, वैसे अधिकारी के तौर पर मैं ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करता रहा हूं.''

ऑस्ट्रेलिया में कुश्ती के भविष्य के बारे में पूछे जाने पर वे कहते हैं, ''ऑस्ट्रेलिया में भारत के मुकाबले कम पहलवान हैं. यहां हम अच्छे पहलवान बनाने की कोशिश कर रहे हैं. वैसे यहां जितने भी पहलवान हैं, अच्छे हैं.''

ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय मूल के लोगों में कुश्ती के प्रति रुचि के बारे में वे बताते हैं कि यहां भारतीय मूल के लोगों की कुश्ती में रुचि कम है और पहलवानी करने वाले ज्यादातर लोग गोरे ही हैं.

कुलदीप बताते हैं, ''भारतीय तो पैसे कमाने में लगे हुए हैं. उन्हें वक्त कम ही मिलता है. हम कोशिश करते हैं कि यहां के भारतीय भी कुश्ती में हिस्सा लें तो और भी अच्छा होगा.''

नस्लभेद और ऑस्ट्रेलिया

"हमारा परिवार ऑस्ट्रेलिया में सौ साल से ज्यादा समय से रह रहा है. मीडिया ने इस मामले को ज्यादा उछाल दिया. कई बार हम हिंदुस्तानियों में ही आपस में दिक्कतें हो जाती हैं. खबरें सही नहीं आ रही थीं. ऑस्ट्रेलिया के लोग बड़े दोस्ताना हैं. भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया के ताल्लुक अच्छे हैं"

कुलदीप बस्सी

ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों के साथ होने वाले नस्लभेद और हिंसा के बारे में पूछने पर कुलदीप कहते हैं कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया में कभी कोई परेशानी नहीं हुई.

उन्होंने बताया, '' हमारा परिवार ऑस्ट्रेलिया में सौ साल से ज्यादा समय से रह रहा है. मीडिया ने इस मामले को ज्यादा उछाल दिया. कई बार हम हिंदुस्तानियों में ही आपस में दिक्कतें हो जाती हैं. खबरें सही नहीं आ रही थीं. ऑस्ट्रेलिया के लोग बड़े दोस्ताना हैं. भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया के ताल्लुक अच्छे हैं.''

ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों की स्थिति के बारे में कुलदीप बताते हैं, ''भारतीय बड़े मेहनती हैं, उनकी हालत अच्छी है, शिक्षा क्षेत्र से कई भारतीय जुड़े हुए हैं. रोजगार अच्छा है, लोग अच्छे पदों पर काम कर रहे हैं.''

कुलदीप बताते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय सांस्कृतिक कार्यक्रम पहले बहुत कम होते थे, लेकिन अब इतने होते हैं कि हर कार्यक्रम को देखने जाना संभव नहीं हो पाता है, संचार के इतने साधन हैं कि पता ही नहीं चलता कि आप भारत में हैं या ऑस्ट्रेलिया में बैठे हुए हैं.

कुलदीप ने ये भी बताया कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय, हिंदुस्तानी फिल्मों और खाने को बहुत पसंद करते हैं.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.