टी-20: धोनी के धुरंधरों में कितना दम?

 गुरुवार, 13 सितंबर, 2012 को 08:03 IST तक के समाचार

श्रीलंका में हो रहे टी-20 क्रिकेट विश्व कप से पहले तीन बार इस प्रतियोगिता का आयोजन हो चुका है जिसमें भारत ने दक्षिण अफ्रीका में खेले गए पहले संस्करण को जीत कर अपना परचम लहराया था.

अगर इस बार की प्रतियोगिता की बात हो तो भारतीय टीम में अभी भी सात ऐसे खिलाड़ी मौजूद हैं जो 2007 में टी-20 विश्व कप जीतने वाली टीम का अहम हिस्सा थे.

गौतम गंभीर, कप्तान महेंद्र सिंह धोनी, युवराज सिंह, इरफ़ान पठान, पीयूष चावला, हरभजन सिंह और रोहित शर्मा उस ऐतिहासिक जीत का हिस्सा रहे हैं और इस बार भी टीम का हिस्सा हैं.

एक लंबे समय के बाद युवराज सिंह की टीम में वापसी शायद चयनकर्ताओं का उन पर विश्वास ही है क्योंकि युवराज ने पिछले काफी समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेला है.

लेकिन सभी को उनसे उम्मीद उसी बात की रहेगी जैसा उन्होंने 2011 के क्रिकेट विश्व कप में कर दिखाया था, मैन ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब जीत कर.

सीनियर्स को राहत

टीम में जगह मिलने पर भज्जी ने राहत की सांस ज़रूर ली होगी.

हालांकि प्रतियोगिता के पहले टीम का चयन को लेकर काफी कयास लग रहे थे लेकिन भारतीय चयनकर्ताओं ने टीम में तजुर्बे का ध्यान रखते हुए नए खिलाडियों को भी क्रिकेट के इस बड़े पटल पर अपनी छाप छोड़ने का मौका दिया है.

टी-20 विश्व कप टीम में अपना चयन होते देख ऑफ-स्पिनर हरभजन सिंह और मध्य-क्रम के बल्लेबाज़ रोहित शर्मा ने शायद सबसे ज़्यादा चैन की सांस ली होगी.

पिछले साल इंग्लैंड में निराश करने वाले हरभजन सिंह की फिरकी का जादू आईपीएल में भी नहीं चल सका था और इसी वजह से उन्हें भारतीय टीम में न्यूजीलैंड के विरुद्ध हुई श्रंखला में टीम से बाहर रहना पड़ा.

सिर्फ इसी वजह से भज्जी का टीम में वापस लौटना एक चौंकाने वाला निर्णय तो था लेकिन शायद एक समझदारी से ओत-प्रोत निर्णय भी.

रोहित शर्मा के करियर के लिए श्रीलंका में अच्छा प्रदर्शन अनिवार्य है.

क्योंकि हरभजन सिंह की मैच जिताने की क्षमता में कम ही लोगों को शक रहा है.

रहा सवाल रोहित शर्मा का, तो वो भी पिछले कुछ दिनों में कोई बहुत बेहतर फॉर्म में नहीं रहे हैं.

हालांकि उनकी जगह पर कुछ युवा खिलाड़ियों की आस भी थी. अजिंक्य रहाणे और अंबटी रायुडू इनमे से दो ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने आईपीएल से लेकर घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदशन किया है.

हालांकि टी-20 के खेल में माहिर युसूफ पठान को इस बार उनके फॉर्म के चलते टीम में शामिल नहीं किया गया है.

युवा प्रतिभा

बहराल इस बार श्रीलंका में भाग लेने वाली टीम में मनोज तिवारी से भारतीय खेल प्रेमियों को बड़ी उमीदें रहने की उम्मीद है क्यों कि उन्हें जितने मौके मिले हैं उसमे से ज़्यादातर पर मनोज ने सेलेक्टर्स को निराश नहीं किया है.

भारतीय मध्यक्रम की रीढ़ बनते जा रहे हैं विराट कोहली.

लेकिन क्रिकेट समीक्षकों के मुताबिक़ सबसे हैरानी वाला चयन पीयूष चावला के नाम से हुआ है.

हालांकि कुछ जानकारों के मुताबिक़ शायद उनके चयन के पीछे टीम में एक लेग-स्पिनर की मौजूदगी थी लेकिन मौजूदा फॉर्म को देखते हुए प्रज्ञान ओझा की दावेदारी भी कमज़ोर नहीं रही है.

आर आश्विन और अशोक डिंडा के लिए निश्चित रूप से ये प्रतियोगिता अपनी-अपनी छाप छोड़ने का एक सुनहरा मौका है.

लेकिन अपने बेहत्तरीन फॉर्म के चलते आखिरकार सभी की निगाहें बल्लेबाज़ विराट कोहली पर ही रहेंगी.

श्रीलंका की पिचों पर अगर विराट कोहली ने अपने पैर जमा लिए तब विपक्षी टीमों के लिए उन्हें रोक पाना एक बड़ी चुनौती रहेगी.

ज़ाहिर है, टी-20 विश्व कप में अगर भारत को कम से कम अंतिम चार में प्रवेश करना है तो कप्तान धोनी, वीरेंदर सहवाग और गौतम गंभीर को एक निर्णायक भूमिका निभानी होगी.

लेकिन साथ ही जिन खिलाडियों को टीम में जगह देकर भारतीय चयनकर्ताओं ने सबको चौंका रखा है, उनके लिए बीस ओवर क्रिकेट वाली ये प्रतियोगिता करो या मरो के समान ही है.

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