भूपति प्रतिबंध पर अदालत जा सकते हैं

  • 18 सितंबर 2012
Image caption महेश भूपति और बोपन्ना के इंकार को भूपति-पेस के बीच तनाव के तौर देखा गया था.

भारत के जाने-माने टेनिस खिलाड़ी महेश भूपति ने कहा है कि वो भारतीय टेनिस संघ द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के ख़िलाफ़ अदालत का दरवाजा़ खटखटाने पर विचार कर रहे हैं.

मुंबई में मीडिया को संबोधित करते हुए महेश भूपति ने कहा कि उनके वकील ये तय करने की कोशिश कर रहे हैं कि वो इस मामले में किस तरह की क़ानूनी कार्रवाई कर सकते हैं.

अखिल भारतीय टेनिस संघ ने दो दिनों पहले ये फ़ैसला किया था कि महेश भूपति और रोहन बोपन्ना पर दो साल का प्रतिबंध लगाया जाएगा.

संघ के सचिव भरत ओज़ा ने चंडीगढ़ में कहा था कि समिति ने इस बात का फ़ैसला किया है कि भूपति और बोपन्ना को जून 2014 तक भारतीय टीम में शामिल नहीं किया जाएगा.

हालांकि उन्होंने साफ़ किया कि इसे वो "बैन क़रार नहीं दे रहे."

अलग जोड़ी

महेश भूपति और रोहन बोपन्ना ने लंदन ओलंपिक में लिएंडर पेस के साथ खेलने से मना कर दिया था. वो अपनी जोड़ी बनाना चाहते थे.

प्रेसवार्ता के दौरान महेश भूपति ने भारतीय टेनिस संघ के लिए काफ़ी सख़्त शब्दों का प्रयोग किया और यहां तक कहा कि वो टेनिस के खेल के लिए नुक़सानदेह है.

भूपति का कहना था कि उन्होंने टेनिस को अपने जीवन का लंबा 18 साल का समय दिया है, और लंबे समय तक संघ की ज़्यादतियों को बर्दाश्त किया लेकिन "अब संघ अपनी सीमा पार कर गया है इसलिए वो ख़ामोश नहीं रहेंगे."

'कोई जवाब नहीं'

एक सवाल के जवाब में महेश भूपति का कहना था कि उन्हें प्रतिबंध की ख़बर भी एक पत्रकार के ई-मेल के माध्यम से मिली जो इस मामले पर उनकी प्रतिक्रिया चाहते थे.

उनका कहना था कि संघ ने इस मामले पर रोहन बोपन्ना के ई-मेल का जवाब भी नहीं दिया है जिसमें प्रतिबंध के फैसले की तफ़सील पूछी गई थी.

उन्होंने कहा कि प्रतिबंध का फ़ैसला बिल्कुल "ग़लत है और उन्हें स्वीकार्य नहीं है."

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