एक-दूसरे को आज़माएँगे भारत-ऑस्ट्रेलिया

  • 28 सितंबर 2012
हरभजन सिंह

टी-20 विश्वकप के सुपर-आठ मुकाबले शुरू हो चुके हैं, मेज़बान श्रीलंका और वेस्टइंडीज़ ने जीत के साथ शुरुआत की है, जबकि मौजूदा चैंपियन इंग्लैंड को दो करारी हार मिल चुकी हैं.

लेकिन शुक्रवार को सभी क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम पर रहेंगी जहाँ दो चैंपियन टीमें एक दूसरे को आज़माने उतरेंगी.

भारत और ऑस्ट्रेलिया सुपर-आठ में एक दूसरे के खिलाफ अपना पहला मैच खेलेंगे. ये दोनों ही टीमें एक ऐसे ग्रुप में हैं जिसको सबसे घातक ग्रुप कहा जा रहा है.

यानी एक हार और उसके बाद प्रतियोगिता में उबरना बेहद मुश्किल होगा. हालांकि इन दोनों ही टीमों का ये पहला मैच है और इसके बाद अपनी गलतियां सुधारने के लिए दो मैच और बचेंगे.

लेकिन दोनों ही टीमें इस मैच को जीतकर मनोवैज्ञानिक स्तर पर अपने को मज़बूत करना चाहेंगी. ऑस्ट्रेलिया के धुरंधर खिलाड़ी माइकल हसी मैच के पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि ये मैच 'फ़ाइनल के पहले खेला जाने वाला फ़ाइनल है.'

रणनीति

अगर भारतीय रणनीति पर गौर किया जाए तो ये शायद ऐसा मैच हो सकता है जिससे ये अंदाज़ा लग जाएगा कि धोनी के धुरंधरों में कितना दम है.

प्रतियोगिता के पहले दौर में ऑस्ट्रेलिया ने श्रेष्ठ क्रिकेट खेली है और दोनों ही टीमों की कोशिश इस मैच को जीत कर महत्त्वपूर्ण अंक अर्जित करने की होगी.

भारत के लिए ये मैच इसलिए भी महत्त्वपूर्ण रहेगा क्योंकि अभी तक ऑस्ट्रेलिया की किसी ऐसी टीम से भिडंत नहीं हुई है जिसकी स्पिन गेंदबाजी भारत की बराबरी कर सके.

साथ ही प्रेमदासा स्टेडियम का विकेट भी शुरुआत में तेज़ गेंदबाजों को मदद करने के बाद अब स्पिनरों की मदद कर रहा है. तीसरी बात ये भी है कि ऑस्ट्रेलिया में हुई पिछली श्रृंखला में बुरी तरह से पिट जाने के बाद धोनी की टीम इस मैच में हिसाब बराबर करने के लिए उतरेगी.

ज़रूरी ये भी है कि ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाजों डेविड वार्नर और शेन वॉट्सन को सस्ते में आउट किया जाए.

सबसे बड़ा सवाल यही है कि कप्तान धोनी आज टीम में किसको शामिल करेंगे और किसको नहीं. अगर धोनी सात बल्लेबाजों को खिलाना चाहते हैं तो फिर ऑस्ट्रेलिया की टीम गेंदबाजों पर हमला कर सकती है.

गेंदबाजी में अब तक भज्जी को छोड़कर लगभग सभी ने निराश ही किया है. इसलिए बहुत ज़रूरी है कि आज के मैच में टीम के वरिष्ठ खिलाड़ी जान की बाज़ी लगाकर खेलें.

ज़हीर खान के साथ-साथ अगर वीरेंदर सहवाग को टीम में जगह मिलती है तो उन पर बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव भी रहेगा.

संबंधित समाचार