सहवाग-भज्जी पर लटकी है तलवार

धोनी
Image caption धोनी की समस्या ये है कि वो सहवाग या भज्जी में से किसे खिलाएं और किसे नहीं.

भारतीय टीम ने पाकिस्तान को सुपर आठ के 'करो या मरो' वाले मुकाबले में हराकर काफी चैन की सांस ली है.

टीम इंडिया के इस प्रतियोगिता के सेमीफ़ाइनल में पहुँचने के लिए इस मैच को जीतना बेहद अहम था और साथ ही ये भी सुनिश्चित करना था कि जीत एक बड़े फासले से आए.

वजह साफ़ है, इस सुपर आठ ग्रुप में अब पाकिस्तान और भारत दोनों एक एक मैच जीत चुके हैं और एक एक मैच हार भी चुके हैं, जबकि अपने दोनों मुकाबले जीत कर ऑस्ट्रेलिया ग्रुप में सबसे ज़्यादा चैन से है. दक्षिण अफ्रीका की टीम अपने दोनों मैच गँवा कर ज़्यादा मुश्किल में नज़र आ रही है.

लेकिन, दक्षिण अफ्रीका से होने वाले मुकाबले के पहले भारतीय कप्तान धोनी किसे खिलाएं और किसे न खिलाएं वालीं समस्या अभी भी बनी हुई है.

सहवाग की वापसी

Image caption पाकिस्तान के खिलाफ सहवाग ने समझ बूझ से विराट कोहली का साथ निभाया.

पाकिस्तान जैसी टीम के खिलाफ़ वीरेंदर सहवाग जैसे अनुभवी बल्लेबाज़ को खिलाने का पुरजोर दबाव कप्तान धोनी पर था.

साथ ही पाकिस्तान के खिलाफ सहवाग का रिकॉर्ड भी काबिले तारीफ रहा है. मैच के बाद खुद कप्तान धोनी ने इस रिकॉर्ड को "माशा अल्लाह" करार दिया .

लेकिन धोनी ने लाख पूछे जाने पर भी अगले मैच के लिए अपनी टीम के पत्ते नहीं खोले. उन्होंने बस यही इशारा किया कि चूंकि भारतीय टीम का दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मुकाबला, सुपर आठ का भी अंतिम मुकाबला है इसलिए टीम सभी फैक्टरों को ध्यान में रखते हुए चुनी जाएगी. यानी कौन खेलेगा और कौन नहीं ये सवाल अभी भी एक रहस्य बना हुआ है.

सहवाग ने पाकिस्तान के खिलाफ हुए मैच में कोई पचास रन तो नहीं मारे लेकिन उनका योगदान उस सूरत में बहुत बेहतरीन ही कहा जाएगा, जिसमे उनके सहयोगी गौतम गंभीर पहले ही ओवर में विकेट गँवा बैठे थे.

सहवाग ने समझ बूझ से कोहली का साथ निभाया और ये सुनिश्चित किया कि भारतीय टीम को दूसरा झटका तुरंत न लगे. ऐसे में सहवाग को अगले मैच में बाहर बिठाना बहुत अच्छा फैसला तो नहीं कहलाएगा. लेकिन, कप्तान धोनी अभी भी सहवाग को लेकर उतने आश्वस्त नहीं दिख रहे जितने वो युवराज को लेकर हैं.

भज्जी की जगह?

टीम इंडिया ने पाकिस्तान के खिलाफ मैच में गेंदबाजी से ज़्यादा बल्लेबाज़ी को मज़बूत करने की रणनीति बनाई थी.

उस लिहाज़ से जितने भी गेंदबाज़ मैदान में उतरे उनका योगदान बहुत अहम रहा. ज़हीर खान, बालाजी, आश्विन और यहाँ तक की पार्टटाइमर्स युवराज और विराट ने भी सधी हुई गेंदबाजी की.

सिर्फ़ इरफ़ान पठान ही रहे जिनके तीन ओवर में 30 रन बने, हालांकि पठान ने इमरान नाज़िर का महत्त्वपूर्ण विकेट भी झटका.

Image caption क्या आगे हरभजन को जगह मिलेगी?

ऐसे में टीम इंडिया को इंग्लैंड के खिलाफ कारिश्माई गेंदबाजी करने वाले भज्जी की कमी बिलकुल नहीं खली. इस तरह से उनको इस मैच में न खिलाने का धोनी का फैसला भी सही साबित हुआ.

अब सवाल ये भी है दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ क्या भज्जी टीम में वापसी करेंगे?

इस बात में कोई दो राय नहीं कि दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज़ मध्यम गति के बजाय स्पिन गेंदबाजी के सामने जल्दी घुटने टेक देते हैं. ऐसे में भज्जी की भूमिका बहुत अहम हो जाती है. लेकिन अंतिम फैसला तो कप्तान धोनी को करना है. उन्हीं के मुताबिक़, "उस दिन कौन खेलेगा, इसका फैसला इस पर निर्भर होगा की पिच का स्वरूप कैसा है."

यानी सहवाग और भज्जी के लिए अभी कौतूहल की एक रात और बाकी है.

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