पाकिस्तानी क्रिकेटरों पर 'तीसरी आँख'

पाकिस्तान के कोच डेव व्हाटमोर के साथ कप्तान मोहम्मद हफीज़

पाकिस्तान के शीर्ष क्रिकेट अधिकारी ने इस बात को स्वीकार किया है कि उनके टी-20 विश्वकप में भाग लेने वाले खिलाड़ियों पर गहरी नज़र रखी जा रही है जिससे स्पॉट-फिक्सिंग जैसा कोई दूसरा मामला न जन्म ले.

कोलंबो में कुछ चुने हुए पत्रकारों से हुई बातचीत में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मुहम्मद ज़का अशरफ ने कहा कि ख़ुफ़िया विभाग के अधिकारी, टीम के सदस्यों पर 24 घंटे अपनी पैनी नज़र बनाए रखते हैं.

लगता है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है.

मुहम्मद ज़का अशरफ ने बताया, "किसी भी खिलाड़ी को किसी संदिग्ध या अनजान व्यक्ति से मिलने पर पाबंदी है. हमने पाकिस्तान में एक सिक्योरिटी और विजिलेंस विभाग का गठन किया है, कर्नल रैंक के अधिकारी जिसके प्रमुख हैं. टीम के साथ मौजूद सुरक्षा अधिकारियों द्वारा भेजी गई रिपोर्टों का रोज़ आंकलन और विश्लेषण होता है और जिन मामलों में मेरी ज़रुरत होती है, उन रिपोर्टों को मुझ तक पहुंचा दिया जाता है."

डरे-सहमे से?

श्रीलंका में टी-20 विश्व कप में भाग लेने आई पाकिस्तान टीम कोलंबो के सिनामन ग्रैंड होटल में ठहरी है.

वैसे तो पाकिस्तानी क्रिकेटर खासे खुशमिज़ाज हुआ करते थे, लेकिन इस बार वो ज़रा सावधान नज़र आते हैं.

ख़ास बात ये भी है कि उनमे से कोई भी अपने प्रशंसकों से बातचीत नहीं करता और यहाँ तक कि वो सार्वजनिक जगहों पर जान-पहचान वालों के पास जाने से भी कतराते हैं.

जब मेरे एक वरिष्ठ पत्रकार दोस्त ने उमर गुल से बात करनी चाही तो उन्होंने दो-टूक कहा, "भाईजान आप तो जानते हैं, हम किसी से बात नहीं कर सकते."

लेकिन पाकिस्तान के क्रिकेट बोर्ड प्रमुख अपनी उपलब्धियों से काफी खुश नज़र आते हैं.

ज़का अशरफ कहते हैं, "हर खिलाड़ी के लिए शाम को कर्फ्यू का समय है. आप खुद देख सकते हैं कि इसके बाद नतीजे भी बेहतर आ रहे हैं."

गौरतलब है कि पिछले साल पाकिस्तान के तीन क्रिकेट खिलाड़ियों को ब्रिटेन की एक अदालत ने स्पॉट-फिक्सिंग मामले में दोषी करार देते हुए उन्हें जेल भेजने के निर्देश दिए थे.

पूर्व कप्तान सलमान बट, मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद आमिर पर क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था आईसीसी ने प्रतिबंध भी लगा दिया था.

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