क्या है फार्मूला वन रेस?

  • 26 अक्तूबर 2012

रेसिंग की दुनिया में फ़ॉर्मूला वन ने कार रेसिंग को एक अलग मुक़ाम पर पहुंचाया है. इसे फ़ॉर्मूला-1 या एफ़-1 के नाम से भी जाना जाता है.

फार्मूला वन दुनिया की सबसे बड़ी रेस प्रतियोगिता है. इसे सभी देशों में आयोजित नहीं किया जा सकता. विशेष बात यह है कि इस प्रतियोगिता में वही चालक भाग ले सकते है जिनके पास सुपर लाइसेंस होता है.

इस प्रतियोगिता का आयोजन फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल (एफआईए) ऑटोमोबाइल नाम की संस्‍था करती है. इस संस्‍था की स्‍थापना सन 1904 में की गई थी.

जो भी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं उसे फ़ॉर्मूला वन वर्ल्ड चैंपियनशिप कहा जाता है. यहाँ फ़ॉर्मूला का मतलब उन कायदे कानून से है, जिसका पालन सभी खिलाड़ियों को करना पड़ता है.

फार्मूला वन के तहत कई प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है. इनमें एफ़ वन ग्रांप्री प्रमुख है. ग्रांप्री के दो चरण होते हैं.

इसमें पहले रेसिंग सर्किट पर गाड़ी दौड़ाई जाती है, उसके बाद शहर की आम सड़कों पर इसका मुकाबला होता है. इन दोनों चरण के नतीजों को जोड़कर दो वार्षिक विश्व चैंपियनशिप तय किए जाते हैं.

इतिहास

1920-30 के दशक में फ़ॉर्मूला वन का आयोजन शुरू हुआ लेकिन 1947 के पहले तक इसका आयोजन आधिकारिक तौर पर नहीं होता था.

1950 में रोम में आयोजित प्रतियोगिता में इटली के गुएप्पे फ़ारिना फ़ॉर्मूला वन वर्ल्ड चैंपियनशिप का पहला खिताब जीतने वाले पहले खिलाड़ी थे.

अक्टूबर 2011 में भारत में फ़ॉमूर्ला वन चैंपियनशिप का पहली बार आयोजन किया गया.

यह रेस रविवार को होती है, जबकि शुक्रवार और शनिवार को दो अभ्यास सत्र होते हैं. प्रत्येक सत्र में कुल 12 टीमें भाग लेती हैं. हर टीम से दो ड्राइवर प्रत्येक रेस में उतरते हैं. इस तरह कुल 24 ड्राइवर रेस में उतरते हैं.

मुख्य रेस की शुरुआत के दौरान जिस ड्राइवर की कार सबसे आगे खड़ी होती है, वो जगह पोल पोजीशन कहलाती है.

अंकों का खेल

Image caption एक साल पहले ही भारत में फार्मूला वन की शुरुआत हुई है

किसी अन्य खेल की तरह फॉर्मूला- वन रेस में भी खेल अंकों का ही होता है.

शीर्ष दस ड्राइवरों को स्थान के मुताबिक अंक मिलते हैं, जिसका नियम निर्धारित है. विजेता को 25 अंक, दूसरे स्थान पर रहने वाले को 18 अंक, तीसरे को 15, चौथे को 12, पाचवें को 10, छठे को 8, सातवें को 6, आठवें को 4, नौवें को 2 और दसवें को 1 अंक दिया जाता है.

हर टीम के दो ड्राइवर रेस में होते हैं, लिहाज़ा दोनों के अंकों के योग टीम को मिलने वाले अंकों में जुड़ते हैं.

खिलाडियों को उनके प्रदर्शन के अनुसार अंक दिये जाते है आखिर में अंको का योग किया जाता है और विजेता का चयन होता है.

तेज़ रफ्तार

फ़ॉर्मूला वन की गाड़ियां 360 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भागती हैं. इसमें आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होता है और ये गाड़ियां बेहद महंगी होती हैं. रेस के दौरान कार के टायर एक सेकंड में 50 बार घूमते हैं, इस वजह से रेस के दौरान ये काफ़ी गर्म होने के साछ साथ घिस जाते हैं.

सामान्य तापमान में ये टायर 900 से 1200 डिग्री सेंटीग्रेट गर्म हो जाते हैं. इसलिए रेस के दौरान इन्हें बदला जाता है

माइकल शुमाकर, निको रोजबर्ग, राफ़ शुमाकर विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हैं और भारतीय खिलाड़ी में नारायण कार्तिकेयन, करुण चंडोक है.

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