ग्रां प्री: नहीं दौड़ पाएंगे कुत्ते इस बार ट्रैक पर

 शनिवार, 27 अक्तूबर, 2012 को 04:35 IST तक के समाचार

रविवार को होने वाली इंडियन ग्रॉं प्री के आयोजकों का दावा है कि इस बार कोई भी आवारा कुत्ता या कोई दूसरा जानवर रेस ट्रैक के आसपास भी नहीं फटक सकेगा.

दिल्ली के निकट ग्रेटर नोएडा में बने बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट के ट्रैक पर जिन स्थानों से कुत्ते घुस सकते हैं, ऐसे सभी जगहों को सील कर दिया गया है.

दरअसल पिछले साल पहली इंडियन ग्रां प्री से पहले हुए अभ्यास-सत्र में कुत्तों के ट्रैक पर आने से आयोजकों को काफी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था.

लेकिन इस बार आयोजक कोई भी जोखिम मोल नहीं ले रहे हैं.

जेपी ग्रुप के उपाध्यक्ष (कार्पोरेट कम्युनिकेशंस) असकरी ज़ैदी ने बीबीसी को बताया, ''पिछले साल पहले सत्र की समीक्षा रिपोर्ट के बाद हमें छह-सात ऐसे स्थान मिले जहां से कुत्ते घुसपैठ कर सकते थे. हमने ऐसे सभी स्थानों को पूरी तरह से सील कर दिया है. इसके अलावा सर्किट की तारबंदी भी दोगुनी कर दी गई है. साथ ही सर्किट पर कुत्ते पकड़ने वाले कुछ दस्तों की तैनाती रहेगी.''

ये दस्ते रेस से पहले सर्किट के आसपास के इलाकों में छापामारी करके कुत्तों का पता लगाकर उन्हें पकड़ लेंगे. हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि पकड़ने के बाद इन कुत्तों का क्या किया जाएगा.

ड्राइवरों के लिए ये मुद्दा नहीं

इस साल सर्किट पर अल्ट्रासॉनिक किरणें फेंकने वाले अत्याधुनिक यंत्र लगाने का भी प्रस्ताव था.

"सर्किट जबर्दस्त लग रहा है. भारत में एक विश्व स्तर का फार्मूला ट्रैक है. इस पर सभी को गर्व होना चाहिए."

नारायण कार्तिकेयन

इस बारे में ज़ैदी ने बताया, ''पिछली कुछ बैठकों के दौरान ऐसे उपकरण लगाने की भी योजना थी. लेकिन पहली रेस के बाद से बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में 43 आयोजन हो चुके हैं. इनमें बीएमडब्ल्यू की रेस भी शामिल है. इसके अलावा फरारी सहित कई कंपनियों ने अपनी कार के परीक्षण और ग्राहक प्रोत्साहन कार्यक्रमों के लिए सर्किट का इस्तेमाल किया. लेकिन किसी भी मौके पर ऐसी कोई घटना नहीं घटी. इसलिए विशेषज्ञों ने ऐसे उपकरणों को गैर-जरूरी बताया.''

ज़ैदी ने बताया कि पिछले साल ट्रैक के आसपास व्यापक स्तर पर निर्माण कार्य चल रहा था. भारी संख्या में मजदूर वहीं खाना पकाते थे, इस कारण कुत्ते आते थे, लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है.

कुत्तों की घुसपैठ के बारे में फार्मूला वन में एकमात्र भारतीय ड्राइवर नारायण कार्तिकेयन ने बीबीसी से बातचीत में कहा, ''मैं कल बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर था. सर्किट जबर्दस्त लग रहा है. मेरा मानना है कि मीडिया ने छोटी सी बात को बड़ा बना दिया. ड्राइवरों के ज़हन में यह सब कभी नहीं रहा. यह उनके लिए मुद्दा नहीं है. हमें इसे व्यापक रूप में देखना चाहिए. भारत में एक विश्व स्तर का फार्मूला ट्रैक है. इस पर सभी को गर्व होना चाहिए.''

कार्तिकेयन फार्मूला वन टीम एचआरटी के ड्राइवर हैं.

बुद्ध सर्किट के आस-पास आवारा कुत्तों और गायों की कमी नहीं है. इसके अलावा रेस के दौरान दो दिन तक एक लाख रेस-प्रेमियों और टीमों को तरह-तरह के व्यंजन परोसे जाने हैं. इनमें मांसाहारी भोजन भी होगा.

अंग्रेज़ी की एक कहावत है कि हर कुत्ते का एक दिन होता है. उम्मीद की जानी चाहिए कि वह दिन 27 और 28 अक्तूबर नहीं होगा.

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