जब ख़ौफ के साए में बीता इंग्लैंड का भारत दौरा

मुंबई में भारतीय 'ए' टीम के खिलाफ इंग्लैंड
Image caption मुंबई में भारतीय 'ए' टीम के खिलाफ मैच

इंग्लैंड की क्रिकेट टीम भारत के दौरे पर है. इस दौरे में टीम को भारत के खिलाफ चार टेस्ट और पांच वनडे मैच खेलना है.

दोनों ही टीमों के लिए ये सिरीज काफी अहम है क्योंकि एक तरफ भारत को पिछले साल इंग्लैंड में हुई अपनी शर्मनाक हार को भुलाने का मौका है तो दूसरी तरफ इंग्लैंड के सामने भारत को उसी की धरती पर हराने के 30 साल के इंतजार को खत्म करने की चुनौती है.

हालांकि इंग्लैंड की टीम का हौसला बढ़ा होगा, जिसकी सबसे बड़ी वजह तो यही है कि पिछले साल अपनी जमीन पर भारत को इंग्लैंड ने चार टेस्ट में बुरी तरह से हराया था.

आईसीसी की रैंकिंग में इस टीम का दूसरा स्थान है, लेकिन इसके बाद भी टीम के लिए ये सिरीज बहुत कठिन साबित हो सकती है.

इंग्लैंड की टीम की परेशानी की वजहें कई हैं. सबसे पहले तो ये कि जिस मनोवैज्ञानिक दबाव के बल पर वो अब तक विरोधी टीम पर हावी होती रही है, उस घेरे में ये टीम अब खुद होगी.

30 साल बाद

Image caption टीम के भारत पहुंचने के पांच घंटे बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हो गई थी

दरअसल, आखिरी बार इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ भारत में 30 साल पहले यानी 1984-85 में जीत दर्ज की थी.

1984-85 में भारत दौरे पर आई इंग्लैंड टीम के कप्तान डेविड गावर थे.

कहा जाता है कि इस दौरे में टीम इंग्लैंड के पास जीत की जितनी खुशी नहीं थी उससे ज्यादा उसे दहशत और तनाव में अपना वक्त गुज़ारना पड़ा था.

ब्रितानी अखबार द इंडिपेंडेट के मुताबिक इंग्लैंड के लिए ये सिरीज हादसों से भरी रही थी.

दरअसल, 1984 में डेविड गावर की टीम जब दिल्ली पहुंची तो उसके ठीक पांच घंटे बाद ही भारत की तात्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को गोली मार दी गई.

टीम को भीतर तक हिला देने के लिए ये घटना काफी थी. इस घटना के बाद सिरीज की तारीखों में बदलाव करते हुए टीम को 15 दिन के लिए श्रीलंका भेज दिया गया.

प्रदर्शन

दो सप्ताह बाद मुंबई में उसे पहला टेस्ट मैच खेलना था. डिप्टी ब्रिटिश हाई कमिशनर पर्सी नौरिस जो क्रिकेट के दीवाने थे, उन्होंने टीम को उच्चायोग के एक उत्सव में बुलाया. लेकिन टीम के सदस्यों से उनकी मुलाकात होती उसके कुछ ही घंटे पहले दफ्तर आते वक्त उन्हें गोली मार दी गई.

इस टीम के एक सदस्य ग्रेम फॉलर ने सिरीज़ को याद करते हुए बीबीसी स्पोर्ट से कहा था, "जो हो रहा था वो विश्वास से बाहर था. पहला टेस्ट तो होना ही नहीं चाहिए था. पर्सी नौरिस की हत्या के बाद हमें कुछ घंटे बाद लगभग उसी जगह पर प्रैक्टिस करने के लिए भेजा गया जहां उन्हें गोली मारी गई थी."

Image caption डेविड गावर थे तत्कालीन इंग्लिश टीम के कप्तान

टीम पर इस घटना का शायद बहुत बुरा असर हुआ और नतीजा ये हुआ कि मुंबई टैस्ट इंग्लैंड की टीम हार गई. भारत ने आठ विकेट से जीत दर्ज की. उसके बाद दिल्ली में खेले गए टेस्ट में इंग्लैंड ने वापसी की और फिऱ चैन्नई टेस्ट जीतकर आखिरकार श्रृंखला इंग्लैंड ने 2-1 से जीत ली.

लेकिन वो इंग्लैंड की भारत में आखिरी सिरीज़ जीत थी.

हार

उसके बाद इंग्लैंड की टीम 1992, 2001, 2005 और 2008 में भारत के दौरे पर आई लेकिन श्रृंखला में उसकी जीत कभी नहीं हो सकी.

1992 में तो ग्राहम गूच की टीम को मोहमम्द अज़हरूद्दीन के नेतृत्व में भारत ने 3-0 से हराया था.

ऐसे में ज़ाहिर है कि इंग्लैंड टीम भारत की धरती पर जीत के दबाव में खेलेगी और भारत के लिए मौका होगा इंग्लैंड के इस मनोवैज्ञानिक दबाव का फायदा उठाने का जिससे वो पिछले साल इंग्लैंड में हुई जबर्दस्त हार का बदला ले सके.

पहला टेस्ट मैच 15 नवंबर से खेला जाएगा.

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