खोल दो क्रिकेट के बंद दरवाज़े: ज़हीर अब्बास

  • 5 नवंबर 2012
ज़हीर अब्बास
Image caption ज़हीर अब्बास को संतोष है कि इतने समय बाद ही सही, फिर से शुरुआत तो हुई.

आखिरकार पांच साल के लंबे अंतराल के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट रिश्तों की गाड़ी पटरी पर आ ही गई.

भारत के गृह मंत्रालय ने 25 दिसंबर से शुरु होने वाले पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के दौरे को मंजूरी दे दी है. इस ख़बर के साथ ही दोनों देशों के क्रिकेट प्रेमियों में खुशी की लहर दौड गई है.

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और कभी एशिया के 'ब्रैडमैन' कहे जाने वाले ज़हीर अब्बास इससे बेहद उत्साहित हैं.

बीबीसी से खा़स बातचीत में ज़हीर अब्बास कहा, ''मैं भारत सरकार का शुक्रिया अदा करता हूं. दोनों मुल्कों के लोगों में इस खेल को लेकर जो दीवानगी है, वो दुनिया में कहीं नहीं है.''

अफ़सोस और संतोष

लेकिन ज़हीर अब्बास को इस बात का अफ़सोस भी है कि दोनों देशों के बीच महज तीन वनडे और दो ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच खेले जाएंगे.

हालांकि ज़हीर अब्बास ने इस बात पर संतोष ज़रूर जताया कि इतने समय बाद ही सही, फिर से शुरुआत तो हुई.

इससे पहले पाकिस्तान की क्रिकेट टीम साल 2007 में भारत आई थी.

साल 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट संबंध रद्द हो गए थे.

इसी बात को लेकर ज़हीर अब्बास थोडा मायूसी से कहते हैं, ''बीच-बीच में जो लंबा अंतराल आता रहा हैं، उस वजह से दोनों देशों के बेहतरीन क्रिकेटरों को एक-दूसरे के खिलाफ खेलने का मौका नहीं मिल पाता जिससे उनके करियर का बेहतरीन समय यूं ही बर्बाद हो जाता है.''

क्रिकेट की गरमी

क्या अब भी दोनों देशों के बीच क्रिकेट की गरमी बची है, इस सवाल के जवाब में ज़हीर कहते हैं, ''आप सभी ने विश्व कप के दौरान देखा ही था कि पूरा पाकिस्तान भारत आकर सेमीफाइनल मैच देखना चाहता था۔''

इन दिनों पाकिस्तानी टीम की ताक़त की बात चलने पर ज़हीर मानते हैं कि टीम की तेज़ गेंदबाजी़ में पहले जैसा दम नहीं रहा, यहां तक की फील्डिंग और बल्लेबाजी़ भी कमजो़र है.

ज़हीर, पाकिस्तान में क्रिकेट की आधारभूत व्यवस्थाओं के चरमराने से भी बेहद परेशान हैं. उनके मुताबिक, पाकिस्तान के क्रिकेट मैदान बिल्कुल बर्बाद हो चुके हैं.

ज़हीर कहते हैं, ''अब तो जब भारत की टीम पाकिस्तान आकर खेलेगी तभी लोग मैदान में आएंगें क्योंकि पाकिस्तानी खेल प्रेमियों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रति आकर्षण है. क्रिकेट के अलावा पाकिस्तान में मनोरंजन के नाम पर कुछ भी नहीं है.''

आखिर में ज़हीर अब्बास अपनी बात खत्म करते हुए कहते हैं कि अब दोनों मुल्कों को एक दूसरे का साथ देना चाहिए और क्रिकेट के बंद दरवाज़ों को खोल देना चाहिए.

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