भारत-इंग्लैंड सिरीज़ पर द्रविड़ की भविष्यवाणी

राहुल द्रविड़
Image caption द्रविड़ मानते हैं कि भारत इंग्लैण्ड को केवल कौशल के दम पर हराना चाहेगा.

भारत के पूर्व कप्तान और 'द वॉल' कहे जाने वाले राहुल द्रविड़ भारत-इंग्लैंड टेस्ट शृंखला पर बीबीसी के मशहूर कार्यक्रम टेस्ट मैच स्पेशल लिए विशेष तौर पर मैचों पर अपने ख़ास टिप्पणियाँ देंगे.

पहले टेस्ट मैच से पहले उन्होंने बात की बीबीसी के सैम शैरिंघम से आने वाली शृंखला के बारे में.

द्रविड़ वाणी

मेरा मानना है कि अगर इंग्लैंड ने पहला टेस्ट जीत लिया तो यह शृंखला के लिए बहुत अच्छा होगा लेकिन अगर उन्होंने इसे भारत को जीत लेने दिया तो फिर वो मुश्किल में पड़ जाएँगें.

भारत यह साबित करना चाहेगा कि घरेलू मैदान पर वो आज भी अजेय है. भारत दिखाना चाहेगा कि उसके पास अच्छे स्पिनर हैं और उसके बल्लेबाज़ घरेलू परिस्थितियों में जम कर खेल सकते हैं. भारत इंग्लैंड को केवल कौशल के दम पर हराना चाहेगा.

मैं मानता हूँ की अहमदाबाद में इंग्लैंड का प्रदर्शन सारी सिरीज़ के लिए महत्वपूर्ण होगा. मुझे यह भी लगता है कि सभी चार मैचों का परिणाम आएगा और भारत को इस शृंखला को 3-1 से जीत जाना चाहिए.

मुझे लगता है कि इंग्लैंड को समित पटेल की जगह अपने स्पिनर मॉन्टी पनेसर को आगे करना चाहिए इससे उन्हें जीतने में मदद मिल सकती है.

पनेसर बनाम पटेल

समित पटेल एक स्थायी स्पिनर नहीं है और इंग्लैंड उन्हें छठे नंबर पर बल्लेबाज़ी के लिए उतरता है लेकिन मेरा मानना है कि ज़रा सा यह ज़रा सा वो, यानी टुकड़ों में हरफनमौला, भारत में ज़्यादा चलते नहीं.

जबकि मॉन्टी ने भारत में हमेशा बढ़िया प्रदर्शन किया है और एक छोर को थामे रखा है मुझे अच्छा लगेगा अगर वो खेलेंगे.

बाएं हाथ के स्पिनर पनेसर ने 42 टेस्ट मैचों में 142 विकेट लिए हैं जिनमे से 11 भारत के खिलाफ है. प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनका बॉलिंग औसत 30.32 का है.

दूसरी तरह पटेल का औसत 38.71 और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके खाते में केवल तीन विकेट हैं लेकिन वो छठे क्रम पर बल्लेबाज़ी कर सकते हैं.

अब तक पटेल ने सभी तीन अभ्यास मैचों में खेला है और एक सैकड़ा और दो अर्धशतक लगाए हैं.

पनेसर ने दो मैच खेले हैं लेकिन उन्हें दूसरे स्वान के साथ अच्छा मौक़ा नहीं मिला, क्योंकि स्वान को बीच ही में अपनी बीमार बेटी को देखने के वापस इंग्लैंड जाना पड़ा. स्वान गुरुवार को होने वाले पहले मैच के पहले भारत लौट आएँगें.

पृष्टभूमि

अगर मैं होता तो भारत के खिलाफ शर्तिया दो स्पिनर को मौक़ा देता. भारतीयों को स्पिनरों को खेलने का अच्छा तजुर्बा है और वो आधे अधूरे स्पिनर्स से ज़्यादा प्रभावित नहीं होंगे.

इंग्लैंड के साथ एक और दिक्कत है कि उनके पास कोई एंड्रियू फ़्लिंटफ़ की तरह ठोस सच्चा हरफनमौला खिलाड़ी नहीं है.

इंग्लैंड ने भारत में 1985 से आज तक कोई सिरीज़ नहीं जीती है. केवल साल 2006 में मुंबई में इंग्लैंड ने भारत को पराजित किया है जिसके बाद वो शृंखला 1-1 पर छूटी थी.

इंग्लैंड ने पिछले साल अपनी ज़मीन पर भारत को टेस्ट शृंखला में 4-0 से पराजित किया था.

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