इंग्लैंड की जीत से किसे हो रही है कँपकँपी..

कुक और पीटरसन
Image caption कुक और पीटरसन ने सिरीज़ में बेहतरीन बल्लेबाज़ी की

भारत के ख़िलाफ़ भारत में मिली जीत इंग्लैंड के लिए शानदार उपलब्धि है. इंग्लैंड की इस जीत ने अगले साल ऐशेज़ सिरीज़ के लिए ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों में भी सिहरन पैदा कर दी होगी.

ये जीत हाल के वर्षों में इंग्लैंड को ऐशेज़ में मिली जीत से कम नहीं. इंग्लैंड ने भारत के ख़िलाफ़ असाधारण चरित्र दिखाया है. एक समय इंग्लैंड की टीम अहमदाबाद में हुआ पहला टेस्ट हार चुकी थी.

लेकिन उसके बाद टीम ने सिरीज़ में शानदार वापसी की और सिरीज़ जीतने में सफलता पाई. इस साल जब पाकिस्तान के ख़िलाफ़ संयुक्त अरब अमीरात में हुई सिरीज़ में इंग्लैंड की टीम 3-0 से सिरीज़ हारी, तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इंग्लैंड की टीम भारत के ख़िलाफ़ सिरीज़ में विजयी होगी.

लोग ये सवाल ज़रूर पूछेंगे कि अहमदाबाद के पहले टेस्ट और मुंबई के दूसरे टेस्ट के बीच क्या हुआ.

टीम के संतुलन की बात करें, तो अहमदाबाद में टीम में शामिल न किए गए मोंटी पनेसर को मुंबई टेस्ट में जगह मिली. फिर केविन पीटरसन में भी बदलाव आ गया.

बेहतर स्पिनर

Image caption अश्विन ने भी इस सिरीज़ में कोई ख़ास प्रदर्शन नहीं किया

अहमदाबाद टेस्ट की दो अस्थिर पारियों के बाद केविन पीटरसन ने मुंबई में शानदार 186 रनों की पारी खेलकर वापसी की. कप्तान एलेस्टर कुक ने भी काफ़ी रन बनाए और ये भी स्पष्ट हो गया कि इंग्लैंड के पास भारत से बेहतर स्पिनर थे.

मुझे पूरी तरह इस बात पर भरोसा है कि ये बातें पहले नहीं कही गईं और ये भारत को काफ़ी चोट पहुँचाती है. भारतीय टीम काफ़ी परेशान थी और इससे चिंतित भी थी.

अब इस प्रदर्शन के बाद कई लोग भारतीय क्रिकेट के घरेलू स्वरूप की समीक्षा की मांग कर रहे हैं.

मुंबई टेस्ट में इंग्लैंड की टीम टॉस हार गई थी, लेकिन एक बार जब उन्होंने ये दिखा दिया कि वे मैच जीत सकते हैं, तो उन्होंने कोलकाता के दूसरे टेस्ट में भी अपना भरोसा बनाए रखा.

इंग्लैंड ने भारतीय टीम में पनपी असुरक्षा की भावना का भी फ़ायदा उठाया. लेकिन हमें ये भी ध्यान में रखना चाहिए कि मेज़बान देश ने काफ़ी ख़राब प्रदर्शन किया.

चिंता

Image caption नए सिरे से उठी सचिन के संन्यास की मांग

इस सिरीज़ के बाद उन्हें कई मुद्दों को सुलझाना होगा. इनमें प्रमुख है उनके स्टार खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर, कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और कोच डंकन फ़्लेचर का भविष्य.

ऑस्ट्रेलिया की टीम अगले साल के शुरू में भारत दौरे पर आ रही है. ये देखना रोचक होगा कि भारतीय टीम कैसा प्रदर्शन करती है. साथ ही ये भी देखना होगा कि ऑस्ट्रेलिया की टीम भी कैसे जवाब देती है क्योंकि उनके लिए भी वो सिरीज़ काफ़ी अहम होगी.

कप्तान के रूप में अपने पहले दौरे के बाद कप्तान कुक काफ़ी प्रसन्न होंगे. उन्होंने ये साबित कर दिया है कि कप्तानी का असर उनके अपने प्रदर्शन पर नहीं पड़ेगा, जैसा कि उन्होंने वनडे क्रिकेट में किया था.

अपने शानदार प्रदर्शन के कारण उन्होंने अपने साथी खिलाड़ियों का सम्मान भी कमाया है.

भारत के ख़िलाफ़ मिली जीत के बावजूद इंग्लैंड को कुछ क्षेत्रों में सोचने की ज़रूरत होगी. लेकिन ये अच्छे मुद्दे हैं. इंग्लैंड की टीम मार्च में न्यूज़ीलैंड का दौरा करेगी.

मेरा मानना है कि इंग्लैंड की टीम ने निक कॉम्पटन को रन बनाने वाले माहौल में एक सलामी बल्लेबाज़ के रूप में काफ़ी मौक़ा दिया है. भारत में वे रन बनाने में संघर्ष करते देखे गए हैं.

विकल्प

Image caption मोटी पनेसर को टीम में शामिल करना टीम के लिए काफ़ी फायदेमंद साबित हुआ

इंग्लैंड को नंबर छह के स्थान पर भी सोचने की आवश्यकता है. जो रूट, जॉनी बेयर्सटो और इयॉन मॉर्गन सभी इस स्थान के दावेदार है.

ग्रैम स्वान और मोंटी पनेसर के प्रदर्शन को देखते हुए लोग शायद ये भी चाहेंगे कि इंग्लैंड भविष्य में दो स्पिनर को टीम में जगह देने पर विचार करें. लेकिन न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा मुमकिन नहीं दिखता.

हर टीम में सुधार की गुंजाइश होती है, लेकिन इंग्लैंड की टीम अपने प्रदर्शन से ख़ुश होगी. बस मेरा मानना है कि वर्ष 2005 की ऐशेज़ जीत बहुत अच्छी थी, ख़ासकर उस समय की ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाड़ियों को देखते हुए.

उस समय ऑस्ट्रेलिया की टीम में शेन वॉर्न, ग्लेन मैकग्रॉ और रिकी पोंटिंग जैसे खिलाड़ी थे. लेकिन जिस तरह इंग्लैंड की टीम ने भारत में प्रदर्शन किया है, उससे इसकी तुलना 2005 की ऐशेज़ जीत से की जा सकती है.

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