हॉकी दिग्गज लेस्ली क्लॉडियस का निधन

 शुक्रवार, 21 दिसंबर, 2012 को 06:01 IST तक के समाचार
लेस्ली क्लॉडियस

ओलंपिक हॉकी में तीन बार स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ी लेस्ली क्लॉडियस का निधन हो गया है.

वे 85 वर्ष के थे और लम्बे समय से बीमार थे.

समाचार एजेंसियों के अनुसार उन्हें मंगलवार को कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उन्होंने गुरुवार दोपहर को अंतिम सांस ली.

हॉकी में उनके योगदान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लंदन टाइम्स ने एक बार लिखा था, ''लेस्ली न खेल रहे हों तो हॉकी देखने में मज़ा नहीं आता.''

क्लॉडियस के बूते भारत ने 1948 के लंदन ओलंपिक, 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक और 1956 के मेलबर्न ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था.

वर्ष 1960 के रोम ओलंपिक में क्लाडियस भारतीय टीम के कप्तान थे. लेकिन पहली बार भारतीय टीम को रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा और वह पहली बार फ़ाइनल में पाकिस्तान से हार गया.

'भारतीय हॉकी का खुदा'

क्लॉडियस के निधन पर हॉकी जगत ने गहरा शोक जताया है. पूर्व ओलंपिक हॉकी खिलाड़ी अशोक कुमार उन्हें याद करते हुए कहते हैं, ''ऊर्जा उनमें कूट-कूटकर भरी थी.''

पूर्व ओलंपिक खिलाड़ी गुरुबक्श सिंह कहते हैं, ''मैं भाग्यशाली रहा जो मुझे उनके साथ खेलने का अवसर मिला. उन्होंने हमेशा युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाया.''

"उनमें गजब की बुद्धिमत्ता थी. भारत में जितने में भी हॉकी खिलाड़ी हुए हैं, उनमें वह संभवत: सबसे महान खिलाड़ी हुए हैं. क्लॉडियस बड़े अच्छे इंसान थे, सदा मुस्कुराते रहते थे. इसलिए सभी उनसे प्यार भी करते थे. इन्हीं गुणों की वजह से वह इतना लम्बा जिए."

वेस पेस, पूर्व ओलंपिक खिलाड़ी

वहीं धनराज पिल्लै उन्हें भारतीय हॉकी का खुदा बताते हुए याद करते हैं, ''जैसा वह खेलते थे, वैसा तो कोई नहीं खेल सकता है. उनके बिना भारतीय हॉकी की कल्पना करना मुश्किल है.''

पूर्व ओलंपिक खिलाड़ी वेस पेस कहते हैं, ''उनमें गजब की बुद्धिमत्ता थी. भारत में जितने में भी हॉकी खिलाड़ी हुए हैं, उनमें वह संभवत: सबसे महान खिलाड़ी हुए हैं.''

क्लॉडियस की लम्बी उम्र का राज बताते हुए वेस पेस कहते हैं, ''क्लॉडियस बड़े अच्छे इंसान थे, सदा मुस्कुराते रहते थे. इसलिए सभी उनसे प्यार भी करते थे. इन्हीं गुणों की वजह से वह इतना लम्बा जिए.''

क्लॉडियस के साथ मैदान पर साथ उतरने वाले खिलाड़ियों में से एक 87 वर्षीय केशव दत्त कहते हैं कि उन्हें क्लॉडियस के निधन की खबर से गहरा आघात पहुंचा है.

केशव दत्त कहते हैं, ''क्लॉडियस मेरे बड़े अच्छो दोस्त थे, लेकिन मैं अपनी खराब तबियत की वजह से उन्हें देखने अस्पताल नहीं जा पाया.''

वे कहते हैं, ''क्लॉडियस अद्भुत खिलाड़ी थे. लंदन और हेलसिंकी में हमने एक टीम में खेलते हुए स्वर्ण पदक जीते थे. कलकत्ता पोर्ट ट्रस्ट के लिए भी हम साथ खेले. उनके साथ मेरी बड़ी अच्छी यादे हैं.''

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