कड़ाके की ठंड में भिड़ेंगी भारत-पाक टीमें

सहवाग
Image caption पहले धोनी और फिर सहवाग के साथ भारतीय चयनकर्ताओं यानी सबा करीम और विक्रम राथौड़ ने शनिवार को काफी समय बिताया

पाकिस्तान के खिलाफ रविवार को होने वाले अंतिम वनडे मैच में दिल्ली की कड़ाके की सर्दी भारतीय टीम की मुश्किलें और बढ़ा सकती है. लगातार हार का सामना कर रही भारतीय टीम को अब ऐसी ठंड में पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज़ों से जूझना पड़ेगा.

एक तो वैसे ही कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का खेलना तय नहीं हैं क्योंकि उनकी पीठ में दर्द है. अगर वे नहीं खेलते हैं तो दिनेश कार्तिक विकेट कीपर होंगे जबकि धोनी ने कहा कि कप्तान कौन होगा यह अभी तय नहीं हैं.

हालांकि धोनी ने कहा कि उनके खेलने के बारे में फैसला मैच से पहले लिया जाएगा.

शनिवार को जब फिरोज़ शाह कोटला मैदान में अभ्यास के लिए टीम इंडिया पहुंची तो उन्हें कड़ाके की ठंड का अनुभव हुआ. हालांकि उस समय काफी अच्छी धूप थी. भारतीय टीम को ठंड में खेलने की आदत नहीं है.

धोनी ने माना कि ठंड में ''मुश्किल तो होती है. साल 2007 में हम आयरलैंड में खेले थे जहां काफी ठंडी हवा चल रही थी. उसके बाद आईपीएल में दक्षिण अफ्रीका में हम बलुम्फूंटेन में खेले थे जहां तापमान शून्य डिग्री के करीब था. उसके बाद मेरे ख्याल से यह सबसे ठंडा है."

उन्होंने कहा, ''अभी सब ठीक है और हमें उम्मीद है कि कोई बीमार नहीं पडेगा.''

पाकिस्तान तैयार

उधर पाकिस्तान के कप्तान मिसबाह-उल हक ठंड के लिए तैयार नज़र आ रहे हैं. उनका कहना है, ''हम भारत आने से पहले लाहौर में थे जहां के मौसम में कोई खास फर्क नहीं है.''

मोहम्मद इरफान, जुनेद खान और पाकिस्तानी के बाकी तेज़ गेंदबाज़ जानते हैं कि किसी भी तेज़ गेंदबाज़ के लिए ऐसा मौसम सबसे बेहतर होता है.

मौसम विभाग का कहना है कि रविवार को न्यूनतम तापमान दो डिग्री के आसपास होगा.

बिखर के टूट गया होता: धोनी

मिसबाह ने यह भी कहा कि वे इस मैच को भी जीतने की कोशिश करेंगे. उन्होंने कहा, ''टीम में वही बदलाव होगा जो मैच जीतने के लिए ज़रूरी होगा.''

उधर धोनी ने भी कहा कि अंतिम 11 का चयन मैच से पहले ही होगा.

अजिंक्या रहाणे को टीम में शामिल करने पर धोनी ने कहा कि इसका फैसला होना बाकी है कि पाकिस्तान के खिलाफ अंतिम मैच में उन्हें खिलाया जाएगा या नहीं. ''उन्हें जो भी मौका दिया गया है उन्होंने अच्छा खेल दिखाया है लेकिन हमें यह सोचना है कि उन्हें कल के आखिरी मैच में खिलाया जाए या फिर पूरी श्रंखला में.''

क्या लगातार हारने और आलोचना का दबाव नहीं है? उन्होंने कहा, ''अगर मैं दबाव में आता तो कब का बिखर के टूट गया होता.''

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