क्या हैदराबाद पिच भी होगी स्पिन की ऐशगाह?

Image caption धोनी ने दौहरा शतक लगा चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया पर दबाव बनाने में कामयाब रहे थे

हैदराबाद के राजीव गांधी स्टेडियम पर जब भारतीय टीम का सामना ऑस्ट्रेलिया से होगा तो सबकी निगाहें पिच पर टिकी होंगी.

जानकार मान रहे हैं कि हैदराबाद की पिच भी वैसी ही स्पिन फ्रैंडली होगी जैसे की चेन्नई में थी. यानी हैदराबाद में मेहमान टीम का स्वागत सूखी पिच पर होगा.

भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज़ नयन मोंगिया कहते है, “अगर हैदराबाद की पिच भी इतनी ही सूखी हुई तो फिर इस टेस्ट मैच का पूरे पांच दिन चल पाना कठिन है.”

सूखा विकेट जल्दी टूट जाता है और उस पर स्पिन गेंदबाज़ी के सामने बल्लेबाज़ी करना बेहद मुश्किल होता है. इस दौरे पर ऑस्ट्रेलिया के पास उस स्तर के गेंदबाज़ नही है जिस स्तर के गेंदबाज़ इंग्लैंड के पास थे.

स्पिन का पेंच

उनके मुकाबले भारत के पास आर अश्विन, हरभजन सिंह और रविंद्र जडेजा के रूप में बेहतर गेंदबाज है. हालांकि हरभजन सिंह की गेंदबाज़ी में वह पैनापन नज़र नहीं आया जिससे यह पता चलता कि इन्होंने चार सौ से ज़्यादा विकेट लिए है.

हैदराबाद के ही प्रज्ञान ओझा को टीम में शामिल किए जाने के सवाल पर मोंगिया कहते है, “यह सब विकेट पर निर्भर करेगा जिसे देखकर ही चयनकर्ता फैंसला करेंगे.”

इससे भी दो कदम आगे बढ़कर भारत के पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह कहते है, “यह तो अब सौ प्रतिशत है कि पूरी सिरीज़ में ऑस्ट्रेलिया को चेन्नई जैसा विकेट ही मिलने जा रहा है क्योंकि भारत की ताकत स्पिन गेंदबाज़ी है, और अभी तक तो यह संदेश सब पिच क्यूरेटर्स तक पहुँच भी गया होगा जहॉ बाकी टेस्ट मैच होने हैं.”

पहले टेस्ट में भारत की जीत के बावजूद कुछ ऐसे सवाल अभी भी है जो भारतीय टीम में चिंता का कारण बने हुए है.

विजेता टीम या बदलाव

सलामी जोड़ी के रूप में विरेंद्र सहवाग और मुरली विजय चेन्नई टेस्ट की दोनों पारियों में नहीं चल पाए तो एक स्लिप फ़ील्डर के तौर पर भी सहवाग ने निराश किया.

सहवाग को लेकर पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह का मानना है कि उन्हे लेकर चिंता पहले भी थी और अगर वह रन बना भी देते है तो भी भारत को इस साल दक्षिण अफ्रीका का दौरा करना है जहां उछाल लेते विकेट पर उन्हें परेशानी आ सकती है, लिहाज़ा उन्हे मध्यमक्रम में मौक़ा दिया जा सकता है.

Image caption चेन्नई टेस्ट में सचिन की बल्लेबाज़ी शानदार रही थी

हैदराबाद में ओझा को टीम में खिलाने की बात पर मनिंदर सिंह कहते है कि वैसे तो विजेता टीम में कोई परिवर्तन नहीं किया जाता लेकिन टीम को बेहतर बनाने के लिए बदलाव ज़रुर किया जा सकता है.

हरभजन सिंह या रविंद्र जडेजा की जगह ओझा को टीम में शामिल किया जा सकता है, और एक तेज़ गेंदबाज़ को कम कर अजिंक्य रहाणे को अवसर दिया जा सकता है क्योंकि पिछले मैच में इंशात शर्मा और भुवनेश्वर कुमार को गेंदबाज़ी करने का ज़्यादा अवसर नहीं मिला.

वैसे भी यह देखा गया है कि जब टीम में अधिक स्पिनर हो तो कप्तान महेंद्र सिंह धोनी उनका सही इस्तेमाल नहीं कर पाते और सबसे बडी बात की अगर इसी तरह के विकेट देने ही है तो फिर दो तेज़ गेंदबाज़ो की ज़रुरत ही क्या है?

पिछले मैच के आधार पर भारतीय टीम में सकारात्मक संकेतों के बारे में मनिंदर सिंह कहते है, “सलामी बल्लेबाज़ो के सस्ते में आउट होने के बाद सचिन तेंदुलकर ने जिस तरह की बल्लेबाज़ी की, उसके बाद विराट कोहली का शतक,धो नी और भुवनेश्वर के बीच दसवें विकेट के लिए शतकीय साझेदारी, यह सब चीज़े लय पकडेंगी लेकिन इन सबमें सचिन का बहुत बडा योगदान है.”

धोनी की कप्तानी में पिछले दिनो काफी कमी नज़र आ रही थी लेकिन उन्होंने पहले तो धुआंधार बल्लेबाज़ी कर ऑस्ट्रेलिया पर दबाव बनाया और उसके बाद एक अच्छी बढ़त पाते ही उनकी बल्लेबाज़ी पर आक्रामक फ़िल्डिंग लगाकर उनके मनोबल को गिराया जो उनकी सोच में बदलाव का संकेत है यह भारत के लिए बेहद सकारात्मक है.

सहवाग पर नज़र

इसके अलावा अश्विन को विकेट लेते हुए देखना अच्छा लगा क्योंकि इससे पहले ऐसा माना जाता था कि मज़बूत टीमों के ख़िलाफ उनका प्रदर्शन बेहतर नहीं रहता, लेकिन अभी तक उन्हें बारह विकेट मिल चुके है जिससे उनका आत्मविशवास बढ़ेगा.

तो अब यह चयनकर्ताओ पर निर्भर है कि हैदराबाद में भारत कमज़ोर सलामी जोडी और धारहीन तेज़ गेंदबाज़ी की जोडी के साथ खेलता है या फिर विजेता टीम के साथ, लेकिन इतना तो तय है कि इस टेस्ट मैच में सबसे ज़्यादा नज़रे सहवाग पर होंगी कि वह बाकि बचे दो टेस्ट मैच में अपनी जगह कैसे बना और बचा पाते हैं?

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