मोहाली में ऑस्ट्रेलिया को 'आखिरी मौका'

Image caption इस सिरीज़ से पहले कप्तान धोनी पर काफी दबाव था

भारत से पहले दो टेस्ट मैच हारने के बाद ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम में वापसी करने का दम है या नहीं यह कहना अभी तो मुश्किल है लेकिन इस टीम के लिए मोहाली में सबसे अच्छा अवसर होगा.

मोहाली में मौसम बेहतर होगा, इतनी गर्मी नहीं होगी जितनी चेन्नई या हैदराबाद में थी.

ऑस्ट्रलिया की ताक़त तेज़ गेंदबाज़ी है, मोहाली के विकेट पर उन्हें उछाल मिलेगा, लेकिन डर है कि अगर यह टीम वहाँ भी वापसी नहीं कर सकी तो सिरीज़ चार शून्य से हार जाएगी.

धोनी सफलतम टेस्ट कप्तान

भारत ने चेन्नई और हैदराबाद में ऑस्ट्रेलिया को हराकर चार टेस्ट मैचों की सिरीज़ में दो शून्य की बढत ले ली है. इस सिरीज़ के शुरू होने से पहले सभी क्रिकेट पंडित कह रहे थे कि भारतीय टीम बदलाव के दौर से गुज़र रही है, नई टीम बन रही है, टेस्ट रेटिंग में पहले स्थान से फिसलने के बाद इसका वहां पहुंचना मुश्किल है.

इंग्लैंड से टेस्ट सिरीज़ हारने के बाद ऑस्ट्रेलियाई सिरीज़ में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी बल्लेबाज़ी को संभाला, टीम को संभाला, युवा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया. ये सब दिखाता है कि इस भारतीय टीम में प्रतिभा भी है और जीतने का जज़्बा भी है.

पिच का पेंच

विकेट की बड़ी आलोचना हुई है, कहा जा रहा है कि स्पिनिंग विकेट है, लेकिन आप पूरी दुनिया में कहीं भी देख लीजिए सभी घरेलू टीम की मदद करते हैं.

पर्थ में अक्सर मैच तीन दिन में समाप्त हो जाता है, दक्षिण अफ्रीका में कोई टीम 45 तो कोई 49 रन पर ऑल आउट हो रही है.

मैं मानता हूँ कि विकेट बिलकुल टूटा नहीं होना चाहिए, लेकिन अगर पहले दो टेस्ट मैच पांच-पांच दिन नहीं चले तो अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि ना तो इस ऑस्ट्रेलियाई टीम में तज़ुर्बा है और ना ही इस तरह के विकेट पर खेलने का हुनर.

दोनों टेस्ट मैचों में दो बल्लेबाज़ो ने दोहरे शतक और दो बल्लेबाज़ों ने शतक बनाए है. ऑस्ट्रेलिया के कप्तान माइकल क्लार्क ने भी पिछले मैच में शतक और हैदराबाद में पहली पारी में 91 रन बनाए हैं. ऐसा नहीं कि रन नहीं बन सकते बस रन बनाने के लिए हुनर चाहिए, धैर्य चाहिए जो इस ऑस्ट्रेलियाई टीम में नहीं है.

कमी कहां है

Image caption ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ अभी तक इस श्रंखला में दम नहीं दिखा पाए हैं

भारतीय क्रिकेट टीम की जीत के बावजूद कमियां मौजूद हैं. सलामी बल्लेबाज़ वीरेंदर सहवाग अभी तक नहीं चल सके हैं. इसके साथ-साथ ओपनिंग तेज़ गेंदबाज़ ऐसे नहीं लगे जिनमें विकेट लेने की क्षमता हो.

भुवनेश्वर कुमार ने अवसर का लाभ उठाया है, लेकिन उन्हें अपनी गति बढ़ानी होगी. ईशांत शर्मा से उम्मीद है कि वह ज़्यादा विकेट ले. सहवाग के बल्ले से अगर रन नहीं निकले तो टीम में उनकी जगह खतरे में है.

मेरा अनुमान है कि कप्तान धोनी विनिंग कॉम्बिनेशन यानि विजेता टीम के साथ ही बाकी मैच खेलना चाहेंगे, लेकिन चयनकर्ता क्या चाहते है यह देखना होगा.

(आदेश कुमार गुप्त से हुई बातचीत पर आधारित)

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