लड़कों के भेस में खेलने वाली पाक स्क्वॉश चैंपियन

  • 17 मार्च 2013
Image caption मारिया टुरपेके पाकिस्तान की टॉप रैंकिंग स्कवैश खिलाड़ियों में से एक हैं

बाइस साल की मारिया तूरपेके पाकिस्तान में स्क्वॉश खेलने वाले शीर्ष खिलाड़ियों में से एक हैं.

वो टोरंटो में स्क्वॉश के पूर्व विश्व चैंपियन जॉनेथन पावर की स्क्वॉश एकेडमी में प्रशिक्षण ले रही हैं.

पावर का मानना है कि तूरपेके में विश्व चैंपियन बनने की पूरी संभावनाएं हैं और जल्द ही वो ये मुकाम हासिल कर सकती हैं.

लेकिन पाकिस्तान के कट्टर कबायली इलाके से टोरंटो तक का मारिया का सफ़र आसान नहीं रहा है.

मारिया बनी चंगेज़ ख़ान

लड़कियों का खेलना तो दूर उनके इलाके में घर के किसी पुरुष सदस्य के बिना लड़कियों का बाहर निकलना भी बुरा माना जाता है.

लेकिन मारिया बचपन से ही अपने भाइयों की तरह बाहर घूमना चाहती थीं, खेलना चाहती थीं.

एक दिन जब मां-बाप घर पर नहीं थे, मारिया ने अपने बाल काट लिए और भाई के कपड़े पहनकर अपने लड़कियों वाले कपड़ों में आग लगा दी.

उस समय उनकी उम्र महज़ चार साल थी.

घर लौटने पर ये देखकर उनके पिता हंसने लगे और उस दिन मारिया को एक नया नाम मिला, चंगेज़ ख़ान.

फिर तो किसी न किसी लड़के से लड़कर आना मारिया का रोज़ का काम हो गया. वो घर लौटती तो उसके हाथ-पांव छिले होते, आंख-मुंह पर चोट लगी होती.

मारिया के पिता शम्सुल का परिवार पेशावर में बस गया लेकिन मारिया के बर्ताव में कोई बदलाव नहीं आया.

शम्सुल ने सोचा कि मारिया को वेटलिफ़्टिंग सिखाना ठीक रहेगा.

लेकिन वेटलिफ़्टिंग क्लब में जाकर उन्होंने मारिया को अपने बेटे के रूप में पेश किया और नाम बताया चंगेज़ खान.

शम्सुल कहते हैं, “शुरू-शुरू में मुझे चिंता होती थी क्योंकि हमारे वहां लड़कियों के खेलों में भाग लेने का दस्तूर नहीं था. लेकिन मारिया को लड़कों का नाम चंगेज़ ख़ान देने के बाद वो जिस चाहे खेल में भाग ले सकती थी.”

कुछ दिनों बाद मारिया ने लड़कों की राष्ट्रीय वेटलिफ़्टिंग प्रतियोगिता जीत ली.

वेटलिफ़्टिंग से स्क्वॉश

मारिया कहती हैं कि वेटलिफ़्टिंग करते हुए वो लगातार उग्र होती जा रही थीं जिससे उनके पिता को चिंता होने लगी.

ऐसे में जब मारिया ने स्क्वॉश में रुचि दिखाई तो वो उसे एक स्क्वॉश अकादमी ले गए, जिसका संचालन पाकिस्तानी वायुसेना करती थी.

यहां भी शम्सुल ने मारिया का परिचय अपने बेटे चंगेज़ ख़ान के रूप में ही दिया. लेकिन यहां उनसे जन्म प्रमाण पत्र मांगा गया.

मजबूरन शम्सुल को मारिया की असलियत बतानी पड़ी.

अकादमी के निदेशक ये जानकर बहुत ख़ुश हुए.

लेकिन पहली बार लड़की के रूप में परिचय दिए जाने से मारिया को कोई फ़र्क नहीं पड़ा, “अपने दिमाग़ में मैं हमेशा चंगेज़ ख़ान ही रही. मुझे लगता था कि जब मैं लड़ती हूं तो लोग मेरी बात सुनते हैं.”

स्क्वॉश अकादमी में पहले महीने तो लोगों को पता ही नहीं चला कि वो एक लड़की हैं.

लेकिन उसके बाद लड़कों, ख़ासतौर पर उनका जिन्हें मारिया ने हराया था, का बर्ताव बदल गया. वो आपत्तिजनक भाषा और इशारों से मारिया को परेशान करने लगे.

मारिया कहती हैं, “और तब मुझे पता चला कि मैं एक लड़की हूं.”

इसके बाद उन्होंने अपने भाई को स्क्वॉश सिखाना शुरू कर दिया. वो उनका ट्रेनिंग पार्टनर था और फिर धीरे-धीरे संबल और सहारा बन गया.

2004 तक मारिया पाकिस्तान की टॉप रैंकिंग प्लेयर बन गई थीं.

2007 में मिस्र में हुए टूर्नामेंट में मारिया ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया. उन्होंने ऊंची रैंकिंग वाले कई खिलाड़ियों को हराया. उन्हें राष्ट्रपति का अवॉर्ड भी मिला.

लेकिन ये बढ़ती शोहरत एक दोधारी तलवार थी. मारिया के पिता को धमकियां मिलने लगीं.

शोहरत बनी मुसीबत

शम्सुल कहते हैं, “मेरी कार के शीशे पर एक चिट्ठी चिपकी मिली, जिसमें कहा गया था कि मैं अपनी बेटी को स्क्वॉश खेलने से रोकूं क्योंकि ये गैर-इस्लामिक है. मुझे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई.”

अब मारिया को लगा कि अगर किसी लड़की के साथ कुछ बुरा होता है तो इसका असर परिवार पर कई पुश्तों तक पड़ता है. वो घर पर रहकर ही अभ्यास करने लगीं.

पाकिस्तान स्क्वॉश फे़डरेशन ने ये मामला संसद के सामने उठाया और मारिया को सरकार ने भारी सुरक्षा प्रदान की.

उनके घर के पास चेक पोस्ट बना दी गई और उनके घर से स्क्वॉश कोर्ट तक के रास्ते पर सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए. स्क्वॉश कोर्ट के चारों ओर निशानेबाज़ तैनात कर दिए गए.

इस सबसे मारिया को डर भी लगता था, लेकिन अपने लिए नहीं, “मुझे अपने लिए डर नहीं लगता था. मैं एक योद्धा रही हूं और योद्धा की तरह ही मरूंगी. लेकिन मुझे दूसरों के लिए डर लगता था.

वो कहती हैं, “स्क्वॉश कोर्ट में बहुत सारा शीशा होता है और अगर कोई बम फट जाता तो वो बहुत से निर्दोष लोगों को भारी नुकसान पहुंच सकता था.”

लोगों को नुकसान से बचाने के लिए मारिया रात में घर पर अपने कमरे में ही प्रैक्टिस करतीं.

Image caption पाकिस्तान में स्कवैश एक लोकप्रिय खेल है

बेटी की लगन देखकर पिता शम्सुल ने कहा, “अगर तुम स्क्वॉश खेलना चाहती हो तो देश छोड़ दो, यही एक चारा है”.

इसके बाद करीब साढ़े तीन साल तक मारिया ने किसी पश्चिमी देश में ट्रेनिंग पाने की इच्छा से हज़ारों ईमेल कीं. उन्होंने सभी स्क्वॉश अकादमियों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, क्लबों, स्कूलों समेत हर उस जगह ईमेल भेजीं, जहां स्क्वॉश कोर्ट था.

इनमें से एक मेल स्क्वॉश के पूर्व विश्व चैंपियन जॉनेथन पावर तक भी पहुंचा.

पेशावर से टोरंटो

जॉनेथन कहते हैं कि मारिया ने लिखा था कि वो किन मुश्किलों का सामना कर खेल रही है और वो दुनिया की सबसे अच्छी खिलाड़ी बनना चाहती है.

वो कहते हैं कि उन पर जहांगीर ख़ान जैसे पाकिस्तानी खिलाड़ियों का काफ़ी प्रभाव था लेकिन उन्हें यकीन नहीं था कि वहां से कोई महिला खिलाड़ी भी आ सकती है.

जॉनेथन की पार्टनर ने उन्हें बताया कि मारिया एक अच्छी खिलाड़ी है और वर्ल्ड स्क्वॉश चैंपियनशिप में तीसरे स्थान पर रही थी.

लेकिन मारिया को यकीन दिलाने के लिए कि वो मज़ाक नहीं कर रहे हैं, जॉनेथन को तीन ईमेल करने पड़े.

परिवार को छोड़कर अकेले इतनी दूर जाना आसान नहीं था. वो अमरीका में किसी को जानती भी नहीं थीं.

शम्सुल के एक दोस्त अमरीका में रहते थे. उन्होंने मारिया को भरोसा दिलाया और नॉर्थ कैरोलाइना में अपने घर आने का निमंत्रण दिया.

नॉर्थ कैरोलाइना से मारिया ने जॉनेथन को ईमेल किया उन्होंने फिर वो पहुंच गई कनाडा, ट्रेनिंग के लिए.

जॉनेथन ने हवाई अड्डे पर खुद उनकी आगवानी की.

मारिया कहती हैं कि इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ उनके पिता शम्सुल का है.

मारिया बताती हैं कि एक बार शम्सुल के परिवार ने उन्हें मानसिक रोगियों के लिए बनी जेल में डलवा दिया गया क्योंकि वो अपनी बीवी को पढ़ाना चाहते थे. उनका कहना था कि अगर मैं समाज को बदलना चाहता हूं तो मैं अपने परिवार से ही इसकी शुरुआत करूंगा.

शम्सुल कहते हैं, “इस्लाम और अन्य कोई भी धर्म आदमी और औरत में फ़र्क नहीं करता. मैंने कभी अपने बेटों और बेटियों में फ़र्क नहीं किया. मैं चाहता हूं कि हर कबायली लड़की को ये मौका मिले.”

वो कहते हैं, “मुझे अपनी बेटी पर बहुत गर्व है. पाकिस्तान और सारे मुस्लिम जगत को उस पर गर्व होना चाहिए.”

जॉनेथन कहते हैं कि मारिया में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनने की पूरी संभावना है. अब उसके आस-पास बहुत से अच्छे खिलाड़ी हैं और जल्द ही वो टॉप खिलाड़ियों में शामिल हो सकती है.

मारिया को उम्मीद है कि उसका उदाहरण पाकिस्तान में लड़कियों की ज़िंदगी बेहतर करने में मदद करेगा. अभी से ही कुछ लोग अपनी बेटियों का नाम उसके नाम पर रखने लगे हैं.

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