भारत पहली पारी में 91 रन से आगे, ऑस्ट्रेलिया दूसरी पारी में 18/1

shikhar dhawan
Image caption शिखर धवन पहले टेस्ट में दोहरा शतक बनाने वाले पहला भारतीय बल्लेबाज़ बनने से चूक गए हैं

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मोहाली में खेले जा रहे टेस्ट मैच के चौथे दिन भारत की पहली पारी 499 पर समाप्त हो गई और उसे पहली पारी में 91 रन की बढ़ती मिल गई.

समाचार लिखे जाने तक ऑस्ट्रेलिया ने दूसरी पारी में एक विकेट खोकर 18 रन बना लिए थे. ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी शुरू होते ही वार्नर आउट हो गए. भुवनेश्वर कुमार ने उनका विकेट लिया.

इससे पहले शिखर धवन पहली पारी में दोहरा शतक बनाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज़ बनने से चूक गए. वो मोहाली टेस्ट के चौथे दिन 187 रन बनाकर आउट हुए.

लंच तक भारतीय टीम पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया से 24 रन पीछे थी जबकि उसके सात विकेट बाकी थे. ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 408 रन बनाए थे.

मुरली विजय 317 गेंदों पर 153 रन बनाकर आउट हुए जबकि शिखर धवन ने शानदार 187 रन बनाए.

चेतेश्वर पुजारा एक और सचिन तेंदुलकर 37 रन बनाकर आउट हुए.

दिल्ली के बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज़ धवन ने चौथे दिन अपनी पारी को 185 से आगे बढ़ाया लेकिन वो अपने स्कोर में केवल दो रन जोड़कर आउट हो गए. दिन के दूसरे ही ओवर में स्पिनर नेथन लॉयन ने उन्हें सिली प्वाइंट पर एड कॉवन के हाथों कैच करा दिया.

धवन ने कुल 174 गेंदों का सामना किया और इस दौरान 33 चौके और दो छक्के लगाए. धवन ने मुरली विजय के साथ पहले विकेट के लिए 289 रन की साझेदारी की. हालांकि इसके बाद बल्लेबाजी करने आए चेतेश्वर पुजारा एक ही रन बना सके और भारत का स्कोर दो विकेट पर 292 रन हो गया.

धवन मात्र 13 रन से अपना दोहरा शतक बनाने से चूक गए लेकिन अपनी इस बेहतरीन पारी के दौरान धवन ने एक कई नए कीर्तिमान कायम किए. उन्होंने पदार्पण टेस्ट में सबसे तेज़ शतक लगाने का विश्व रिकार्ड बनाया. साथ ही वो अपने पहले टेस्ट में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले भारतीय बल्लेबाज़ भी बन गए.

मौके पर चौका

27 वर्षीय धवन को विस्फोटक बल्लेबाज़ वीरेन्द्र सहवाग के खराब फार्म के कारण टीम से बाहर होने के अंतिम एकादश में जगह मिली थी और उन्होंने इस मौके को हाथोंहाथ लेते हुए टीम में अपनी जगह मज़बूत कर ली.

भारत की सबसे तेज़ माने जाने वाली मोहाली की पिच पर धवन ने कंगारू गेंदबाज़ों की जो धुनाई की वो लंबे समय तक याद रखेंगे. धवन ने ऑस्ट्रेलिया के किसी भी गेंदबाज़ को नहीं बख्शा और मनमाफ़िक अंदाज में रन बटोरे.

क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि उन्होंने हाल के वर्षों में चुनींदा टेस्ट पारियों में एक है और ऐसी पारियों से क्रिकेट का शास्त्रीय प्रारूप माने जाने वाले टेस्ट के प्रति दर्शकों में फिर से दिलचस्पी पैदा की जा सकती है.

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