'क्रिकेट की बाइबल' के 150 साल

  • 5 अप्रैल 2013
Image caption अप्रैल महीने में विज़डन का डेढ़ सौवाँ संस्करण प्रकाशित होगा

साल 1979 में लिवरपूल के उपनगरीय इलाके में रहने वाले स्कूली छात्र बिल फरमेज की उम्र 15 साल थी और उन्होंने तब तक न तो क्रिकेट खेला था और न ही उसमें उनकी कोई रुचि थी.

स्थानीय लाइब्रेरी में भ्रमण के दौरान एक दिन उनकी निगाह एक भारी-भरकम पीले ज़िल्द वाली किताब पर गई. ये किताब कोई और नहीं बल्कि उस साल की विजडन क्रिकेटर्स अलमनक थी जिसे संक्षेप में विज़डन पत्रिका के नाम से जाना जाता है.

फरमेज को उसी क्षण उस किताब से ऐसा लगाव हुआ कि आज तक नहीं छूटा. उस समय को याद करते हुए फरमेज कहते हैं, “मैंने उस किताब को पढ़ना शुरू किया और फिर उसमें डूब गया, जैसा कि विजडन के आम पाठक होते हैं.”

करीब डेढ़ महीने बाद फरमेज क्रिकेट का बाइबल कहे जाने वाली इस पत्रिका को पहली बार खरीद कर लाए और फिर उन्होंने उसका संग्रह करना शुरू कर दिया.

साल 2004 में उनकी आलमारियों में विजडन की इतनी प्रतियां पड़ी थीं कि उनके एक दोस्त ने सलाह दे दी कि वो विज़डन की खरीद और बिक्री का कारोबार शुरू करें.

फरमेज बताते हैं, “तीन महीने के भीतर ही मैंने एक छोटी-सी वेबसाइट शुरू कर दी थी. छह महीने के भीतर मैंने इसकी ऑनलाइन बिक्री शुरू कर दी.”

विजडन बेचकर बने करोड़पति

वो कहते हैं कि साल 2008 तक उनका ये काम इतनी तेजी से आगे बढ़ने लगा कि लोग कहने लगे कि वो विजडन के ब्रिटेन और शायद दुनिया भर में अकेले और सबसे बड़े व्यवसायी हैं.

फरमेज आज विजडन की करीब 150 से दो सौ प्रतियां हर महीने बेचते हैं. विजडन की दुर्लभ प्रतियां 35 हजार पाउंड तक में बिकती हैं और पूरे सेट की कीमत तीन लाख पचास हजार पाउंड के करीब है.

इसका मतलब ये हुआ कि एक किताब से गहरे लगाव के कारण धूल लगी किताबों की बिक्री करके एक व्यक्ति कितनी आमदनी कर सकता है. इस किताब का 150वां संस्करण अगले हफ्ते छपने जा रहा है.

हर साल अप्रैल महीने में प्रकाशित होने वाली विज़डन पत्रिका में परंपरागत तौर पर इंग्लैंड में खेले जाने वाले हर प्रथम श्रेणी के मैच का स्कोर कार्ड रहता है. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मैचों, काउंटी मैचों, विश्वविद्यालय, स्कूल और क्लब स्तर के मैचों के बारे में भी संक्षिप्त जानकारी रहती है.

Image caption अपने दौर के मशहूर खिलाड़ी जॉन विज़डन ने आय की स्रोत के लिए इस पत्रिका की शुरुआत की थी

इसके अलावा इसमें कई लेख, हर साल पांच विजडन क्रिकेटर्स के प्रोफाइल और दूसरी रोचक जानकारियां रहती हैं.

क्रिकेट के खेल में होने वाली तमाम अजीबोगरीब कहानियां भी इस पत्रिका का हिस्सा बनती हैं. मसलन, “खरगोश ने पैवेलियन को खोद डाला”, “गर्म हवा के गुब्बारों ने रोका खेल” या फिर “नग्न नृत्य करने के कारण गिरफ्तार हुए क्रिकेटर”.

‘क्रिकेट की आत्मा’

लॉरेंस बूथ साल 2011 में 35 साल की उम्र में विज़डन के संपादक बने थे और वो इस पत्रिका के सबसे युवा संपादक थे. वो कहते हैं कि विज़डन ‘क्रिकेट की आत्मा’ है.

दरअसल ये किताब उन्नीसवीं सदी के मध्य के स्टार क्रिकेट खिलाड़ी जॉन विज़डन के दिमाग़ की उपज थी जो कि अपने रिटायरमेंट के बाद आय का कोई स्रोत तलाश रहे थे.

साल 1889 में इस पत्रिका ने पहली बार साल के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटरों के बारे में छापना शुरू किया जो कि बाद में इसका मशहूर कॉलम बना और इसी नाम से पुरस्कार की भी शुरुआत हुई.

1901 में संपादक सिडनी पार्डन ने पहली बार इसमें संपादकीय लिखने की शुरुआत की और साल 1938 में पत्रिका की पहचान बने पीले कवर की शुरुआत हुई.

1963 में विज़डन का सौवां संस्करण प्रकाशित हुआ और इसे यादगार बनाने के लिए साल 2000 में इंग्लैंड और वेस्ट इंडीज के बीच विज़डन ट्रॉफी का आयोजन किया गया.

आज विज़डन की करीब चालीस हज़ार प्रतियां बिकती हैं और एक प्रति की कीमत पचास पाउंड है.

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