उनका बल्ला मरहम की तरह काम करता है....

Image caption सचिन को देखने के लिए लोग रात भर क़तार में लगने से भी नहीं हिचक रहे है.

पिछले कुछ दिनों से कोलकाता में हज़ारों लोग काम पर नहीं जा रहे.

कई कंपनियों के कर्ता-धर्ता सोच रहे होंगे कि किसी तरह की रहस्यमय बीमारी की वजह से लोग घरों में बैठे हुए हैं.

वैसे, यह कोई बीमारी नहीं है. इस वायरस का नाम तो दरअसल “तेंदुलकर फ़ीवर” है.

अपने ग़ैरहाज़िर कर्मचारियों को अगर वे खोजना चाहें, तो इडेन गार्डेन के 'टिकट काउंटर' पर जाना चाहिए.

उन्हें वहां घंटों टिकट के लिए क़तार में लगे हुए अपने कर्मचारी मिल जाते.

कई लोग अच्छा महसूस नहीं कर रहे होंगे. इसकी वजह यह है कि मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच बुधवार को होनेवाले मैच की सारी टिकटें पहले से ही बिक चुकी हैं.

जन्मदिन

हालांकि, वे अब भी इस चिलचिलाती धूप में घंटों क़तार में लगे रहते हैं. किसी तरह वे एक टिकट का जुगाड़ करने की जुगत में हैं, ताकि भारत के पसंदीदा खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को वो उनके जन्मदिन के मौक़े पर खेलते हुए देख सकें.

आज सचिन का 40वाँ जन्मदिन है. क़तार में सबसे आगे दिख रहे मुनार कुमार यादव, रविवार की सुबह ही आकर सारे दिन क़तार में रहे. हालांकि उन्हें फिर भी टिकट नहीं मिला. अगले दिन वह सुबह तीन बजे ही आकर लाइन में लग गए.

मेरे पूछने पर वह हंसते हुए कहते हैं, ''सचिन मेरे भगवान हैं. मुझे उनको जन्मदिन वाले दिन देखना ही है. यादव के आसपास के लोग भी सहमति जताते हैं.''

तभी लाइन के पिछले हिस्से से कोई चिल्लाता है, ''वह उन कुछ लोगों और चीज़ों में शामिल हैं, जिनकी वजह से हमें भारतीय होने पर गर्व होता है.''

कुछ देर बाद चारों ओर से सचिन-सचिन के नारे लगने लगते हैं. मैंने जब मुनार से पूछा कि क्या उनको आज टिकट मिलने की उम्मीद है?

वह ध्यान से सोचकर बताते हैं कि अगर आज भी उनको टिकट नहीं मिला, तो वह कल फिर आएंगे. क़तार में खड़े लोग भारत के सभी हिस्सों से हैं. बंगाली, बिहारी, पंजाबी, मारवाड़ी या तमिल, सभी एक साथ नज़र आ रहे हैं.

Image caption सचिन के चाहने वाले सिर्फ़ एक टिकट ख़रीदने के लिए रात भर क़तारों में लगे रहे.

अलग भाषाओं में बात करनेवाले इन लोगों की संस्कृति, खानपान, धर्म सब कुछ अलग हैं. उनकी राष्ट्रीय पहचान पर क्षेत्रीय पहचान हावी है.

हालांकि, जब तेंदुलकर बैटिंग करने उतरते हैं, तो यह बदल जाता है. हर एक आदमी तब सब कुछ भूल जाता है. अचानक से सवा अरब से अधिक लोग सारी पहचान को भूलकर केवल भारतीय रह जाते हैं.

कोलकाता स्थित खेलों पर लिखनेवाले गौतम भट्टाचार्य तेंदुलकर को अच्छे से जानते हैं. उन्होंने सचिन पर एक किताब भी लिखी है.

संन्यास

गौतम कहते हैं, ''तेंदुलकर जब संन्यास लेंगे, तो एक बड़ा शून्य निश्चित तौर पर उभरेगा. यह शून्य केवल भारतीय क्रिकेट में नहीं, बल्कि भारतीय समाज में भी दिखेगा.''

अपनी बात आगे बढ़ाते हुए भट्टाचार्य कहते हैं कि इसकी वजह तेंदुलकर का बैट किसी मरहम की तरह काम करता है. जब सचिन रन बनाते हैं, तो आपके आसपास चारों तरफ़ अचानक ही ख़ुशी दिखने लगती है.

हर एक मिनट इडेन गार्डेन के बाहर लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है. बातचीत की आवाज़ें तेज़ हो रही है. बातचीत का विषय तेंदुलकर का संन्यास लेना है.

साहिल सेठ और देवल जसानी, 19 वर्षीय छात्र हैं. हालांकि, अगले कुछ दिन उनकी किताबें बंद ही रहेंगी. वे टिकट की जुगत में लगे हैं. उनके फ़ोन लगातार उनके कानों से लगे हैं.

Image caption सचिन को क्रिकेट के भगवान का दर्जा हासिल है.

मैं पूछता हूं कि वे टीवी पर ही मैच क्यों नहीं देखते? दोनों ही मेरी तरफ़ इस निगाह से देखते हैं, जैसे मैं पागल हूं.

साहिल कहते हैं, ''इसलिए कि शायद आख़िरी बार ही हम सचिन को इडेन गार्डेन पर खेलते देख पाएंगे.''

उनकी बात को देवल बढ़ाते हुए कहते हैं, ''सचिन अब 40 के हैं. उन्होंने एक दिवसीय क्रिकेट खेलना छोड़ ही दिया है. हम यह नहीं जानते कि इडेन गार्डेन में अब टेस्ट मैच कब होगा. तो, यह आख़िरी मौक़ा ही है. हमें वहां रहना ही है.''

इन बातों के बाद वहां बाक़ायदा बहस शुरू हो जाती है. उनकी बग़ल में खड़ा आदमी कहता है कि युवाओं की बात का कोई मतलब नहीं है. सचिन 50 वर्ष तक खेलेंगे. उनके बिना क्रिकेट ही नहीं बचेगा.

अचानक बातचीत बंद हो जाती है. लोग उत्साह में चिल्लाने लगते हैं. अचानक ही रहस्यमय ढंग से कुछ सैकड़ों टिकट आ गए हैं और उनकी बिक्री होने लगी है.

पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने में ख़ासी मेहनत करनी पड़ रही है. अब भी क़तार में मुनार कुमार यादव ही आगे हैं. वह पहले आदमी हैं, जिन्हे टिकट मिल ही गया. यह उनके लिए भावनात्मक क्षण है. डेढ़ दिनों की मेहनत का उन्हें फल मिल गया.

वह अपनी ख़ुशी जताते हुए कहते हैं, ''यह मेरे जीवन का सबसे ख़ुशी का दिन है. मैं अब सचिन के जन्मदिन पर उनको देख पाउंगा. यह दुनिया का सबसे बड़ा जश्न होगा.''

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