अयाज़ मेमन: बोर्ड ने फिक्सिंग को तवज्जो नहीं दी

अयाज़ मेमन

क्रिकेट में स्पॉट फिक्सिंग और मैच फिक्सिंग के मामले पर सोमवार दोपहर बीबीसी हिंदी के फेसबुक पन्ने पर हुई एक दिलचस्प बहस में क्रिकेट विश्लेषक अयाज़ मेमन ने हिस्सा लिया.

अयाज़ मेमन के मुताबिक़ आईपीएल-5 में सामने आए कथित स्पॉट फिक्सिंग के मामले से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई को सबक ले लेना चाहिए.

उन्होंने कहा, "जब पिछले साल एक स्टिंग ऑपरेशन में चार आईपीएल खिलाड़ी पकड़े गए थे तभी क्रिकेट बोर्ड को सबक ले लेना चाहिए था. फिक्सिंग के इस कैंसर पर तवज्जो नहीं दी बीसीसीआई ने. सिर्फ कुछ साल के लिए बैन करके छोड़ दिया और अब एक बड़ा नतीजा सबके सामने है."

उनका मत है कि इतनी बड़ी प्रतियोगिता और क्रिकेट के इतने व्यस्त सीज़न में सट्टेबाज़ी और स्पॉट फिक्सिंग जैसी चीज़ों का पूरी तरह से ख़ात्मा बहुत मुश्किल है लेकिन इस पर लगाम ज़रूर कसी जा सकती है. अयाज़ मेमन ने तमाम बीबीसी पाठकों के सवालों के जवाब दिए और क्रिकेट में सट्टेबाज़ी, निजीकरण और राजनीतिक दखल जैसे मुद्दों पर अपनी बेबाक राय भी दी.

सट्टेबाजी की रणनीति

नितिन श्रीवास्तव के उस सवाल के जवाब में कि क्या सट्टेबाजों और बुकीज़ की कार्य प्रणाली में भी थोडा अंतर आया है, अयाज़ मेमन का जवब था, "बिलकुल आया है."

उनके मुताबिक़, "दिग्गज खिलाडियों पर क्रिकेट प्रेमियों समेत जांच एजेंसियों की भी नज़र रहती है. क्योंकि मामला अब मैच फिक्सिंग का नहीं स्पॉट फिक्सिंग का है, इसलिए छोटे और कम शोहरत वाले खिलाड़ियों को निशाना बनाना आसान लग रहा है." अयाज़ मेमन को लगता है कि इस बार के कथित स्पॉट फिक्सिंग मामले में जो नई बात देखी जा रही है वो है खिलाड़ियों का कद.

Image caption आईपीएल में कथित स्पॉट फिक्सिंग पर क्रिकेट प्रेमियों का गुस्सा उमड़ पड़ा है.

उन्होंने कहा, "वर्ष 2000 में जो हुआ उसका आयाम बिलकुल अलग था. उसमे मैच फिक्सिंग मामलों में कथित रूप से कप्तान के स्तर के लोगों का हाथ था. लेकिन अब तो ऐसे खिलाडियों का नाम आता है जिन पर आम तौर पर किसी को शक ही न हो सके. हालांकि जांच होने तक अजीत चंडीला निर्दोष ही हैं, लेकिन किसने सोचा होगा उनके बारे में."

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