आईपीएल: ठगा महसूस कर रहे है क्रिकेट प्रेमी

  • 27 मई 2013
Image caption आईपीएल में खेलने वाले या देखने वालों की रुचि कम जरूर हुई लेकिन खत्म नहीं.

स्पॉट फिक्सिंग विवाद के बाद क्रिकेट जगत में तेज़ी से बदल रहे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा जो अपने आप को ठगा महसूस कर रहे है वो हैं क्रिकेट फैन्स.

चेन्नई सुपर किंग्स के विवादों में पड़ने के बाद भी टीम के प्रशंसकों ने उम्मीद नहीं छोड़ी थी लेकिन मुंबई से अपनी टीम को हारते देखकर उनकी भावनाएं दुख और आश्चर्य में बदल गई.

तकनीक की बात करें, चाहे फॉर्म या ताकत की, चेन्नई की टीम कागज़ पर किसी भी टीम से भारी नज़र आती है, ये मानना है उन सभी फैन्स का जो इकट्ठा हुए थे चेन्नई के वेलाचेरी मॉल में बड़ी स्क्रीन पर मैच देखने के लिए.

क्रिकेट के इन्हीं शौकीनों में से एक है प्रभु दामोदरन, जो पेशे से एक कपड़ा व्यवसायी है और क्रिकेट के दीवानों के प्रतीक के रूप में सटीक फिट होते हैं.

बंगलौर, कोच्चि, हैदराबाद और चेन्नई में जो भी अच्छे मैच हुए उसे दामोदरन देखने ज़रूर गए. पैसा और समय कभी उनके और आईपीएल के बीच नहीं आया. दीवानगी इतनी की वो रुकते भी उसी होटल में थे जहां खिलाड़ी रुकते थे.

'धोनी अकेले खड़े थे'

दामोदरन कहते हैं कि उनके लिए आईपीएल के खिलाड़ियों के साथ एक ही होटल में रूकना इतना आसान है तो बुकीज़ के लिए और भी आसान रहा होगा.

दामोदरन की ही तरह मॉल में मौजूद दूसरे प्रशंसक चेन्नई की हार तय होने के साथ ही स्तब्ध रह गए. युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्रावण्य सारथी ने कहा, “अकेले धोनी क्या कर लेंगे जब बाकी सारे बल्लेबाज़ जल्दबाज़ी में आउट हो जाएंगे तो.”

मज़बूत बल्लेबाज़ी क्रम के साथ मैदान पर उतरी चेन्नई सुपर किंग्स के लिए 149 रनों का लक्ष्य बहुत कठिन नहीं था.

लेकिन जाहिर तौर पर फाइनल के प्रेशर से ज़्यादा खिलाड़ियों पर स्पॉट फिक्सिंग की खबरों का दबाव ज्यादा दिखा. अविश्वास के इस माहौल में चेन्नई सुपर किंग्स टीम के मालिक जेल में हैं और खिलाड़ियों का भविष्य अधर में है. इन सभी दबावों के साथ खेल रहे चेन्नई को हारना ही था.

लेकिन कई ऐसे फैन्स भी है जो टीम को अपना समर्थन दे रहे हैं. दसवीं क्लास की पार्वती ने कहा, “संकट की इस घड़ी में टीम का हम पूरा समर्थन करते है.”

स्पॉट फिक्सिंग की खबरें

Image caption बीसीसीआई अध्यक्ष श्रीनिवासन के दामाद गुरूनाथ मेयप्पन की स्पॉट फिक्सिंग में कथित भूमिका की जांच की जा रही है.

रविवार को भी पूरे दिन टेलीविज़न पर स्पॉट फिक्सिंग के बारे में जानकारियाँ सामने आती रहीं और अफ़वाहों के भी बाज़ार को ज़ोर मिलता रहा.

चेन्नई के फाइनल हारने के बाद भी टीम के बड़े अधिकारी गुरूनाथ मेयप्पन के घर में छापे जारी रहे.

दामोदरन कहते है, “इन सभी बदलावों के बीच मेरे जैसे कई क्रिकेट प्रेमियों के मन में शक पैदा होता है कि आख़िरी मैच भी फिक्स था.” क्रिकेट प्रेमियों के मन में पैदा हुआ यही अविश्वास उन्हें ठगा सा महसूस करा रहा है.

वहीं कॉलेज के छात्र सरथ एम ने कहा, “चेन्नई सुपर किंग्स के प्रशंसक होने के नाते टीम के फाइनल हारने पर मुझे बड़ी निराशा हुई है, लेकिन मुंबई को उसकी सफलता का श्रेय दिया जाना चाहिए, क्योंकि वो अच्छा खेले. चेन्नई की बल्लेबाज़ी ही उसके हार की वजह बना और शुरुआती विकेटों के गिरने के बाद खेल में उनकी वापसी की संभावनाएं भी खत्म हो गई.”

जेंटलमैन्स गेम इमेज को 'धक्का'

Image caption आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग विवादों से क्रिकेट के जेंटलमैन इमेज को भी धक्का पहुंचा है.

क्रिकेट के मैदान ही नहीं बाहर भी चेन्नई पर काफी दबाव रहा. बॉलीवुड, बुकीज़ और सट्टेबाज़ी के आपसी संबंधों में टीम का नाम भी उछाला जाता रहा है.

इन सभी गतिविधियों से आईपीएल में खेलने वाले या देखने वालों की रुचि कम जरूर हुई लेकिन खत्म नहीं.

कुछ समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में सट्टेबाज़ी को वैध बनाने से संबंधित लेख भी छपे, जिनमें वजहें बताई गई कि खेल से अंडरवर्ल्ड के रिश्ते खत्म किए जाने के लिए ये कितना जरूरी है.

आसानी से पैसे कमाने के लालच, हनी ट्रैप और खिलाड़ियों की बदलती लाइफस्टाइल क्रिकेट के जेंटलमैन स्पोर्ट होने की इमेज को भी धक्का पहुंचा है.

चेन्नई मे मौजूद वरिष्ठ पत्रकार के.वी. लक्ष्मणा से बीबीसी संवाददाता तुषार बनर्जी की बातचीत पर आधारित

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