कैसे पहुँची भारतीय टीम फ़ाइनल में

  • 10 जुलाई 2013
भारतीय टीम

वेस्टइंडीज़ में जब त्रिकोणीय प्रतियोगिता शुरू हुई, तो भारतीय टीम का उत्साह देखने लायक था. टीम चैम्पियंस ट्रॉफ़ी जीतकर वेस्टइंडीज़ पहुँची थी. लेकिन एकाएक सब भारतीय टीम के ख़िलाफ़ जाने लगा और एक समय ऐसा लगा कि भारतीय टीम जल्द ही प्रतियोगिता से बाहर हो जाएगी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं और अब भारतीय टीम प्रतियोगिता के फ़ाइनल में है. आइए नज़र डालते हैं इस प्रतियोगिता में भारत के अब तक के सफ़र पर.

पहला मैच: भारत बनाम वेस्टइंडीज़, 30 जून 2013, जमैका

वेस्टइंडीज़ ने टॉस जीता और भारत को बल्लेबाज़ी का न्यौता दिया. भारत ने काफ़ी धीमी गति से रन बनाया और विकेट भी लगातार गिरते रहे. रोहित शर्मा ने सर्वाधिक 60 रन बनाए, लेकिन चैम्पियंस ट्रॉफ़ी के हीरो रहे शिखर धवन नाकाम रहे और सिर्फ़ 11 रन ही बना पाए. सुरेश रैना ने 44 रन बनाए. भारत की टीम 50 ओवर में सात विकेट पर 229 रन ही बना पाई.

वेस्टइंडीज़ को जीत के लिए 230 रनों का लक्ष्य मिला. क्रिस गेल के सस्ते में आउट होने के बाद भारत ने दबाव बनाया और एक समय वेस्टइंडीज़ का स्कोर था तीन विकेट पर 26 रन. लेकिन जॉनसन चार्ल्स और डेरेन ब्रैवो ने न सिर्फ़ वेस्टइंडीज़ की पारी संभाली बल्कि टीम को जीत की स्थिति में पहुँचाया. लेकिन दोनों के आउट होते ही एक बार फिर स्थिति पलट गई. लेकिन आख़िरकार वेस्टइंडीज़ एक विकेट से मैच जीतने में सफल रहा.

दूसरा मैच: भारत और श्रीलंका, 02 जुलाई, जमैका

भारत एक मैच हार चुका था. नियमित कप्तान महेंद्र सिंह धोनी घायल थे और भारत का मनोबल कमज़ोर था. इस स्थिति का श्रीलंका ने अच्छा फ़ायदा उठाया. भारत ने टॉस जीतकर गेंदबाज़ी चुनी. लेकिन महेला जयवर्धने और उपुल थरंगा ने भारतीय गेंदबाज़ों की ऐसी धुलाई की कि पूछिए मत. भारतीय बल्लेबाज़ एक-एक विकेट को तरसते रहे. उपुल थरंगा और जयवर्धने ने शतक लगाया. अश्विन को एकमात्र विकेट मिला. श्रीलंका ने 50 ओवर में एक विकेट पर 348 रन बनाए.

भारत के सामने 349 रनों का लक्ष्य पूरा करने की कठिन चुनौती थी. वही हुआ, जो इतने बड़े लक्ष्य के दबाव में होता है. भारतीय टीम दबाव में बिखर गई और लगातार विकेट गिरते रहे. कोई भी बल्लेबाज़ टिक कर खेल नहीं पा रहा था. भारत की पूरी टीम 45वें ओवर में 187 रन बनाकर आउट हो गई. भारत की टीम 161 रन के बड़े अंतर से हारी. भारत की ओर से रवींद्र जडेजा ने सर्वाधिक 49 रन बनाए.

तीसरा मैच: भारत और वेस्टइंडीज़, 05 जुलाई, पोर्ट ऑफ़ स्पेन

मेज़बान वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ भारत का ये मैच काफ़ी अहम था. प्रतियोगिता में बने रहने के लिए भारत को ये मैच जीतना ज़रूरी था. धोनी की ग़ैर मौजूदगी में कप्तान विराट कोहली पर काफ़ी दबाव था. लेकिन उनके और भारतीय टीम के लिए ये मैच आदर्श साबित हुआ. टीम ने अच्छी शुरुआत की. रोहित शर्मा और शिखर धवन ने बेहतरीन बल्लेबाज़ी की. लेकिन स्टार रहे विराट कोहली, जिन्होंने शानदार शतक लगाया. भारत ने 50 ओवर में सात विकेट पर 311 रन बनाए.

वेस्टइंडीज़ के सामने बड़ा लक्ष्य था. दवाब में टीम बिखरी और पाँच विकेट सिर्फ़ 69 रनों पर गिर गए. बारिश के कारण मैच में बाधा आई. बारिश से प्रभावित मैच में डकवर्थ लुइस नियम के तहत 39 ओवर में जीत के लिए 274 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज़ की टीम 34 ओवर में 171 रन ही बना पाई. भारत की टीम 102 रनों से जीती. उमेश यादव और भुवनेश्वर कुमार ने तीन-तीन विकेट लिए.

चौथा मैच: भारत और श्रीलंका, 09 जुलाई, पोर्ट ऑफ़ स्पेन

त्रिकोणीय सिरीज़ के फ़ाइनल में पहुँचने के लिए भारत को ये मैच जीतना ज़रूरी था. श्रीलंका ने टॉस जीतकर भारत को बल्लेबाज़ी का न्यौता दिया. भारत ने संभल कर खेलना शुरू किया. लेकिन रन गति काफ़ी धीमी रही. धवन नहीं चले और कप्तान कोहली भी 31 रन बनाकर आउट हो गए. भारत ने 29 ओवर में 119 रन बनाए थे, तभी बारिश आ गई. बारिश के कारण डकवर्थ लुइस नियम के हिसाब से जीत के लिए श्रीलंका के सामने 26 ओवरों में 178 रन बनाने की चुनौती मिली.

लेकिन श्रीलंका की पूरी टीम 24.4 ओवरों में केवल 96 रन बनाकर आउट हो गई. श्रीलंका की ओर से चांडिमल ने सबसे अधिक 26 रन बनाए. भारत की ओर से भुवनेश्वर कुमार ने शानदार गेंदबाज़ी करते हुए छह ओवर में केवल आठ रन देकर श्रीलंका के चार बल्लेबाज़ों को पवेलियन भेजा. भारत ने श्रीलंका को 81 रनों से हराकर वेस्टइंडीज़ में खेली जा रही त्रिकोणीय एकदिवसीय क्रिकेट श्रृंखला के फ़ाइनल में जगह बनाई. गुरूवार को खेले जाने वाले मैच में भारत और श्रीलंका एक बार फिर आमने-सामने होंगे क्योंकि रन रेट के आधार पर वेस्टइंडीज़ टूर्नामेंट से बाहर हो गई है.