मैच जिताने में धुरंधर महेंद्र सिंह धोनी

महेन्द्र सिंह धोनी
Image caption धोनी ने 2011 के विश्वकप में भी भारत को मुश्किल स्थिति में जीत दिलाई थी.

महेंद्र सिंह धोनी हारे हुए मैच को जिताने वाले सबसे उम्दा खिलाड़ियों में गिने जाने लगे हैं.

इस मामले में उनकी तुलना आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों माइकल बेवन और एडम गिलक्रिस्ट से की जा सकती है. धोनी निश्चित ही क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े 'फ़िनिशरों' में गिने जाएँगे.

'फ़िनिशर' यानी मैच को विपरीत परिस्थितियों से निकालकर अपनी टीम के पक्ष में अपने दम पर ले जाने वाला खिलाड़ी और धोनी से बेहतर फ़िलहाल कौन है.

2011 के विश्व कप का फाइनल हर भारतीय क्रिकेट प्रशंसक को याद होगा.

धोनी का धमाका, भारत की ख़िताबी जीत

वहाँ भी धोनी ने ऐसे ही मुश्किल मौक़े पर मैच जिताने वाली पारी खेली थी. वानखेड़े स्टेडियम में धोनी का वो शानदार छक्का लोगों के जेहन में आज भी बसा हुआ है.

तस्वीरों में.....और इस तरह जीत गया भारत

धोनी खेल को खेल की तरह लेते हैं. धोनी जैसे खिलाड़ी किसी मैच को जीवन-मरण का सवाल नहीं बनाते. ऐसे में उनके ऊपर दबाव कम होता है.

उन्हें यह एहसास रहता है कि इस अकेले मैच के साथ ही उनकी दुनिया ख़त्म नहीं हो जाएगी लेकिन उन्हें यह एहसास जरूर रहता होगा कि यह उनकी मानसिक दृढ़ता और प्रतिभा की परीक्षा की तरह है.

ज़्यादातर बड़े अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दबाव को एक अवसर के रूप में देखते हैं. उन्हें लगता है कि यही मौका है कि जब वे अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर सकते हैं.

पाकिस्तान के विरुद्ध नंबर तीन पर

जब सौरभ गांगुली ने अप्रैल 2005 में विशाखापट्टनम में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मैच में धोनी को अचानक से नंबर तीन पर उतारा तो वह टीम के लिए नए खिलाड़ी थे.

धोनी ने ख़ुद भी कहा था उस मैच में जब सौरभ ने उन्हें तीसरे नंबर पर बल्लेबाज़ी करने के लिए जाने के लिए कहा तो उन्हें यक़ीन ही नहीं हुआ.

धोनी ने उस मैच में 148 रन बनाए थे. मुझे लगता है कि उस मैच ने धोनी को मैच जिताऊ खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया.

जब आपको सफलता मिल रही होती है, आप जो करते हैं उसमें सफलता मिलती जाती है, आप जो करने जा रहे हैं यदि आप वैसा ही प्रदर्शन पहले ही कर चुके होते हैं तो आपको लगता है कि मैं एक बार फिर से कर सकता हूँ.

लेकिन जब आप विफल होने लगते हैं तो वापसी करने में आपकी असल परीक्षा होती है.

एकदिवसीय मैचों में धोनी को अभी विफलता का सामना नहीं करना पड़ा है. टेस्ट मैच में उन्होंने वापसी करके दिखाया है.

इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के टेस्ट दौरे में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था. उस समय उनकी कप्तानी की भी काफ़ी आलोचना हुई थी लेकिन जब उसके बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत आई तो धोनी ने टेस्ट मैच में जबरदस्त वापसी की थी.

अब तो धोनी का स्वर्णिम काल चल रहा है. अगर धोनी का बुरा दौर आया और फिर वे उससे निकलकर वापसी कर लेते हैं तो वह दुनिया के महान खिलाड़ियों में शामिल हो जाएँगे.

(बीबीसी संवाददाता पंकज प्रियदर्शी से बातचीत पर आधारित)

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