तो ये है यूसैन बोल्ट की रफ़्तार का रहस्य!

यूसैन बोल्ट
Image caption यूसैन ने 2009 की बर्लिन विश्व चैंपियशिप में 100 मीटर की दूरी 9.58 सेकेंड में पूरी करने का रिकॉर्ड बनाया

वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि जमैका के धावक यूसैन बोल्ट की अतुलनीय रफ़्तार का रहस्य अब समझा जा सकता है. इसके लिए वैज्ञानिकों ने एक गणितीय मॉडल विकसित किया है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि यूसैन बोल्ट के शरीर की पांच फ़ुट, छह इंच की लंबाई और उनकी शक्ति और ऊर्जा का समन्वय उनको सबसे तेज़ रफ़्तार वाला बेजोड़ धावक बनाता है.

यूसैन बोल्ट ने 2009 की बर्लिन विश्व चैंपियशिप में 100 मीटर की दूरी 9.58 सेकेंड में पूरा करने का रिकॉर्ड बनाया था जिसे आज तक कोई धावक नहीं तोड़ पाया.

रफ़्तार का रहस्य

'द यूरोपियन जर्नल ऑफ फिजिक्स' में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार एक ख़ास मॉडल के सहारे यूसैन की तेज़ रफ़्तार का रहस्य खोजा जा सकता है.

इसके अनुसार बोल्ट ने 9.58 सेकेंड में 100 मीटर का लक्ष्य अपनी रफ़्तार को 12.2 मीटर प्रति सेकेंड तक पहुंचाकर हासिल किया. यानी बोल्ट 27 मील प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रहे थे.

बोल्ट की रफ़्तार का विश्लेषण करने वाली टीम ने पाया कि बोल्ट में सर्वाधिक शक्ति तब पैदा हुई जब वह दौड़ में आधी रफ़्तार पर एक मीटर की दूरी सेकेंड से भी कम समय में तय कर रहे थे.

इस प्रदर्शन से रफ़्तार में आने वाली बाधा का तात्कालिक प्रभाव देखा जा सकता है, जहां हवा का प्रतिरोध गतिशील वस्तुओं की रफ़्तार को धीमा कर देता है.

Image caption यूसैन बोल्ट की रफ़्तार का लोहा पूरी दुनिया मानती है

वैज्ञानिकों के मुताबिक़ यूसैन बोल्ट के दौड़ने के दौरान मांसपेशियों से पैदा होने वाली ऊर्जा का केवल आठ फ़ीसद इस्तेमाल हो रहा था. बाकी ऊर्जा हवा द्वारा उत्पन्न प्रतिरोध में ख़त्म हो रही थी.

नेशनल ऑटोनामस यूनिर्वसिटी के जार्ज हेरनांदेज़ कहते हैं कि हमारी गणना से बोल्ट की विशिष्ट प्रतिभा का पता चलता है. एयरोडायनेमिक यानी वायुगतिकीय रूप से उनसे ज्यादा क्षमता वाले मनुष्य हो सकते हैं.

इस क्षमता विरोध के बावजूद बोल्ट ने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं. 2009 में बोल्ट ने असाधारण क्षमता का प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड बनाया था.

क्या कहते हैं वैज्ञानिक

जार्ज हेरनांदेज़ कहते हैं, ''आजकल रिकॉर्ड तोड़ना काफी कठिन हो गया है. यहां तक कि सेकेंड के सौवें हिस्से से भी रिकॉर्ड तोड़ना बहुत बड़ी बात है. धावक की बढ़ती रफ़्तार के साथ विपरीत दिशा से लगने वाले अवरोध में तेज़ी से बढ़ोत्तरी होती है. इस कारण धावकों को रिकॉर्ड बनाने या तोड़ने के लिए अवरोध से निपटने में सारी ताकत झोंकनी पड़ती है. ऐसा पृथ्वी के वातावरण की 'भौतिक बाधाओं' के कारण होता है.''

''अगर बोल्ट किसी कम घने वातावरण वाले ग्रह पर दौड़ रहे होते, तो उनके रिकॉर्ड तुलनात्मक रूप से काफी बेहतर होते. बोल्ट की स्थिति के सटीक अध्ययन और दौड़ के दौरान उनकी गति ने धावकों पर अवरोध के असर का अध्ययन करने का शानदार मौका दिया है.''

हेरनांदेज़ कहते हैं कि अगर भविष्य में और आंकड़े उपलब्ध होते हैं, तो देखना दिलचस्प होगा कि एक एथलीट की कौन सी बात बाकियों से विशिष्ट बनाती है.

इलेक्ट्रॉनिक टाइमिंग का इस्तेमाल 1968 से हो रहा है.बर्लिन में जब बोल्ट दौड़े और जो समय दर्ज हुआ वो 1968 से लेकर तब तक के रिकॉर्ड में सबसे बड़ा सुधार था.

'अपना रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं'

Image caption वैज्ञानिक कहते हैं कि बोल्ट प्रदर्शन में सुधार से अपना भी रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के जॉन बारो कहते हैं कि रेस शुरू करने के लिए दागी गई गोली पर बोल्ट का प्रतिक्रिया काल धीमा होता है. अगर वे तेज़ शुरुआत करें तो लंबे डग भरने की वजह से उनकी रफ़्तार और बढ़ सकती है.

जॉन बताते हैं कि बोल्ट की मांसपेशियां काफी मज़बूत और तेज़ी से हरकत में आने वाली हैं. वे लंबे डग भरने के कारण दौड़ को बेहद जल्दी पूरा कर सकते हैं.

वे कहते हैं कि बोल्ट अगर तेज़ शुरुआत करते हैं, अनुकूल हवा में पूरा ज़ोर लगाते हैं और ऊंचे डग भरते हुए दौड़ते हैं तो वे खुद अपना रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं.

जॉन के मुताबिक़ बोल्ट का बर्लिन रिकॉर्ड 0.9 मीटर प्रति सेकेंड की रफ़्तार से बहने वाली अनुकूल हवा में बना था. इतनी रफ़्तार वाली हवा से विशेष लाभ नहीं मिलता.

प्रोफेसर जॉन बारो बताते हैं कि अगर हवा की रफ़्तार दो मीटर प्रति सेकेंड से ज़्यादा न हो, तो रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है. इस कारण से बोल्ट के पास अपनी रफ़्तार बढ़ाए बिना सुधार करने की काफी गुंजाइश है.

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