फाइनल में पहुँचने से चूकी सिंधु, मिला कांस्य पदक

बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु

भारत की उभरती हुई बैटमिंटन स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधु को विश्व चैम्पियनशिप के सेमीफाइनल मुकाबले में कांस्य पदक मिला है. अस्सी के दशक के बाद पहली बार किसी भारतीय खिलाड़ी ने इस प्रतियोगिता में पदक जीता है.

शनिवार को हुए एक महत्वपूर्ण मुकाबले में पीवी सिंधु के सामने दुनिया की नंबर तीन खिलाड़ी थाईलैंड की रचनोक इंथैनन थीं.

रचनोक ने सिंधु को सीधे मुकाबले में 21-10 और 21-13 के अंतर से हराया.

दुनिया की 12 नंबर की खिलाड़ी पीवी सिंधु अपना पहला बैडमिंटन विश्व चैम्पियनशिप खेल रही थीं.

सेमिफाइनल में पहुँचने के लिए सिंधु ने इस प्रतिस्पर्द्धा में कई बड़े उलट फेर किए.

वे अभी तक वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में जाइंट किलर साबित हुई थीं.

उन्होने प्री क्वार्टर फाइनल में दूसरी वरीयता प्राप्त चीन की यिहान वांग को हराया था और क्वार्टर फाइनल में चीन की ही शिजियान को शिकस्त दी थी.

एकतरफा मुकाबला

लेकिन सेमीफाइनल मुकाबले में सिंधु रचनोक के सामने लगभग बेबस ही हो गईं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक 36 मिनट तक चले महिलाओं के इस एकल मुकाबले में रचनोक ने कोर्ट के हर छोर पर अपने शॉट्स खुलकर खेले.

इसके ठीक उलट सिंधु संघर्ष करती हुई दिख रही थीं. उन्होंने कुछ ऐसी गलतियाँ कर दीं जिससे उनकी विरोधी रचनोक को खेल की शुरुआत में बढ़त मिल गई.

रचनोक ने कुछ ललचाने वाले शाट्स खेले जिसने सिंधु को उलझाकर रख दिया और इस चक्कर में वे मैदान पर संघर्ष करती हुई दिख रहीं थीं.

सिंधु को थाईलैंड की इस खिलाड़ी का खेल समझने में मुश्किल पेश आ रही थी और इसका नतीजा यह निकला कि रचनोक को 19-10 की बढ़त मिल गई.

पहले दौर की 10 अंकों की बढ़त के बाद रचनोक का खेल खत्म होने तक दबदबा बरकरार रहा.

सिंधु भले ही हार गईं लेकिन विश्व बै़डमिंटन चैंपियनशिप के एकल वर्ग में पदक जीतने वाली वे पहली भारतीय महिला बन गई हैं.

दबाव में साइना

Image caption साइना चौथी बार क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं बढ़ पाईं.

भारत की साइना नेहवाल तीन बार इस चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थीं और इत्तेफ़ाक से इस बार चौथी मर्तबा भी उनका सफर क्वार्टर फाइनल में ही टूट गया.

साइना नेहवाल क्वार्टर फाइनल में अपने से कहीं नीचे की वरीयता हासिल कोरिया की यिओन जू बेई से 21-19,21-17 से हार गईं.

साइना नेहवाल को इस टूर्नामेंट में तीसरी वरीयता दी गई थी जबकी जू बेई को तेरहवी वरीयता हासिल थी.

इसके साथ ही विश्व चैंपियनशिप में कोई पदक जीतने का सपना एक बार फिर साइना नेहवाल के लिए सपना ही साबित हुआ.

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