एशिया कप में जीत पहुंचाएगी विश्व कप में

भारतीय हॉकी टीम के कप्तान सरदार सिंह का कहना है कि टीम एशिया कप में बेहतरीन प्रदर्शन करने की कोशिश करेगी और उम्मीद है कि भारत टूर्नामेंट में जीत हासिल करेगा.

एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट 24 अगस्त से मलेशिया के इपोह शहर में शुरु हुआ है और एक सितंबर तक चलेगा.

मलेशिया के लिए रवाना होने से पहले बीबीसी के साथ बातचीत में भारतीय टीम के कप्तान सरदार सिंह ने कहा, "यक़ीनन यह बेहद दबाव वाला टूर्नामेंट है. हम हर रोज़ तीन ट्रेनिंग सत्र में अभ्यास कर रहे है, और जूनियर खिलाड़ियों के खेल में भी सुधार हुआ है. हम वीडियो सत्र में भी अपनी कमियों को देख रहे है. एशिया कप में हम अपना सर्वोत्तम देने की कोशिश करेंगे, और उम्मीद है कि जीत जाएंगे."

विश्वकप की सीढ़ी

एशिया कप जीतने वाली टीम को अगले साल नीदरलैंड्स में होने वालेविश्व कप में सीधे जगह मिलेगी. और इसलिए पूर्व विश्व चैंपियन रही भारतीय टीम के पास अगले विश्व कप के लिए क्वालीफ़ाई करने का ये आख़िरी मौक़ा है.

वैसे एशिया कप में भारत ने अपने अभियान की शानदार शुरूआत की है. अपने पहले मैच में भारत ने ओमान को 8-0 से हराया और जबकि अन्य मैच में पाकिस्तान ने जापान को 7-0 से मात दी.

Image caption टीम के मुख्य कोच रोलेंट औल्टमेंट (लाल टोपी में) का कहना है कि वह छह हफ्ते से खिलाड़ियों से कड़ी मेहनत करवा रहे हैं.

भारत पूल बी में कोरिया, बांग्लादेश और ओमान के साथ है जबकि पूल ए में पाकिस्तान, मेज़बान मलेशिया, जापान और चीनी ताइपे हैं.

जहां कोरिया पहले ही विश्व कप में पहुंच चुका है, वहीं एशिया कप जीतने वाली टीम एशिया से क्वालीफ़ाई करने वाली दूसरी और आख़िरी टीम होगी. इसलिए अब ज़्यादा दबाव भारत और पाकिस्तान पर है.

अगर समीकरणों पर नज़र डालें तो फाइनल में अगर कोरिया का सामना भारत या पाकिस्तान से होता है और कोरिया जीत भी जाता है, तब भी हारने वाली टीम विश्व कप में पहुंच जाएगी. लेकिन अगर फ़ाइनल भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ तो उस हालत में केवल विजेता टीम ही विश्व कप के लिए क्वालीफ़ाई कर पाएगी.

फ़िटनेस की समस्या

भारत की बात करें तो उस पर सिर्फ़ एशिया कप जीतने का दबाव ही नहीं है बल्कि टीम के सामने खिलाड़ियों की फ़िटनेस की समस्या भी है.

दानिश मुज्तबा, एस वी सुनील, गुरविंदर सिंह चांदी और आकाशदीप सिंह चोट के कारण टीम से बाहर हैं. ऐसे में अनुभव की कमी भारत को महंगी पड सकती है. अनुभवी खिलाड़ियो के नाम पर टीम में वी आर रघुनाथ, बीरेंद्र लाकडा, और गोलकीपर उपकप्तान पीआर श्रीजेश हैं.

लेकिन टीम में पांच अनुभवहीन खिलाड़ियों के होने से टीम के हाई पर्फ़ॉर्मेंस निदेशक और अंतरिम कोच रोलैंट ओल्टमैंस ज़्यादा परेशान नहीं हैं. ओल्टमैंस कहते हैं कि इसका अर्थ यह नहीं है कि यह खिलाड़ी ख़राब हैं.

वहीं टीम के सहायक कोच एस के कौशिक कहते है, "अगर आप दूसरी नज़र से देखें तो अब इन खिलाड़ियों के पास अपने हुनर को दिखाने का बेहतरीन मौक़ा है."

Image caption अगले साल होने वाले विश्वकप के लिए क्वालीफ़ाई करने के लिए भारत का एशिया कप जीतना ज़रूरी है.

जीत का दबाव

कभी भारत और पाकिस्तान का दबदबा विश्व हॉकी जगत में था. भारत ने आठ बार ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता है. इसके अलावा भारत और पाकिस्तान विश्व चैंपियन भी रह चुके हैं.

पाकिस्तान ने विश्व कप सबसे ज़्यादा चार बार जीता है, जबकि हॉलैंड ने तीन बार, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया ने दो-दो बार और भारत ने एक बार साल 1975 में जीता था.

उल्लेखनीय है कि भारत ने मलेशिया में ही आयोजित विश्व कप के फ़ाइनल में पाकिस्तान को 2-1 से हराकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था. इसके अलावा भारत को 1973 में रजत पदक और 1971 में कांस्य पदक भी मिला.

लेकिन पिछले कुछ सालों में भारतीय हॉकी टीम का प्रदर्शन ख़राब रहा है. यहां तक कि भारतीय टीम साल 2008 में पहली बार ओलंपिक के लिए क्वालीफ़ाई भी नहीं कर पाई थी.

और अब एक बार फिर वैसे ही हालात बन गए हैं क्योंकि अगर भारत एशिया कप नहीं जीत पाता तो विश्व कप के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा कि भारत इस टूर्नामेंट में नहीं खेलेगा.

ऐसे में भारतीय टीम के हाई पर्फॉरमेंस निदेशक और अंतरिम चीफ़ कोच रोलैंट ओल्टमैंस कहते हैं, "मैं वास्तविकता में भरोसा करता हूं. मुझे पता है कि यह कितना महत्वपूर्ण टूर्नामेंट है. मैं पिछले छह सप्ताह से इन खिलाड़ियों को कड़ा अभ्यास करवा रहा हूं और टीम भी एशिया कप के लिए बेहद मेहनत कर रही है. मेरे हाथ में तो यही सब कुछ है."

वहीं गोलकीपर-उपकप्तान श्रीजेश कहते हैं, "अगर हम दबाव की ही बात करते रहेंगे तो एक भी मैच खेलना मुश्किल हो जाएगा. हम एशिया कप जीतने का लक्ष्य लेकर जा रहे हैं."

तो देखना होगा कि एशिया कप जीत कर कौन सी टीम विश्व कप हॉकी टूर्नामेंट में जगह बनाती है.

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