एशिया कप के फाइनल में भारत हारा

दक्षिण कोरिया

मलेशिया में खेले गए एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट के फाइनल में दक्षिण कोरिया ने भारत को 4-3 से हरा दिया.

इसके साथ ही कोरियाई टीम ने दिखा दिया कि भले ही उसे अगले साल होने वाले विश्व कप हॉकी टूर्नामेंट में पहले ही जगह मिल चुकी है, लेकिन उसके जज़्बे में कोई कमी नहीं आई है.

रविवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में दक्षिण कोरिया ने खेल की शुरुआत तेज़ तर्रार अंदाज में की और ज़्यादातर समय भारतीय गोल पोस्ट पर आक्रमण बनाए रखने की रणनीति को अपनाया.

दक्षिण कोरिया के लगातार हमलों की वजह से भारतीय आक्रामक पंक्ति को भी रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ा जिसकी वजह से भारतीय कप्तान सरदार सिंह, वी रघुनाथ और युवा खिलाड़ी मालक सिंह को आक्रमण करने का मौका नहीं मिला.

दूसरी तरफ कोरियाई टीम को लगातार हमले करने का फायदा मिलता रहा और खेल के 28वें मिनट में जब उसे पेनल्टी कॉर्नर मिला तो योंग ने उसे गोल में तब्दील कर दिया. इससे पहले कि भारतीय टीम संभल पाती कोरिया के यू हियो सिक ने दूसरा गोल भी दाग दिया.

कड़ा मुकाबला

मध्यांतर तक कोरिया 2-0 की बढ़त बना चुका था. इसके बाद भारत ने भी आक्रमण करने की योजना बनाई.

आखिरकार खेल के 48वें मिनट में रुपिंदर पाल सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला और स्कोर 2-1 हो गया.

इसके बाद भारतीय टीम ने 2-2 की बराबरी भी की लेकिन कोरिया ने एक बार फिर जवाबी तेवर दिखाते हुए भारतीय टीम पर तीसरा गोल दाग दिया.

भारतीय टीम ने इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी और स्कोर को एक बार फिर 3-3 से बराबर किया.

लेकिन इस कड़े मुकाबले का अंत कोरिया के पक्ष में तब हो गया जब खेल समाप्त होने से लगभग दो मिनट पहले उसने एक गोल और दाग दिया.

'फिट टीम'

इस हार के साथ ही भारतीय हॉकी टीम के अगले साल विश्व कप में जगह बनाने को लेकर फिर अनिश्चित्ता पैदा गई हैं जिसके लिए भारत को नवंबर तक अतरराष्ट्रीय हॉकी संघ के फैसले का इंतजार करना पड़ सकता है.

एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट में भारत के प्रदर्शन पर पूर्व कप्तान ज़फर इकबाल कहते हैं, "मैंने पिछले कुछ वर्षों में इतनी फिट भारतीय हॉकी टीम कभी नहीं देखी. ये कहा जाता है कि कोरियाई खिलाड़ी कमांडो ट्रेनिंग करते हैं जिसकी वजह से वो दुनिया में सबसे फिट खिलाड़ी हैं, लेकिन मुझे लगता है कि जैसे भारतीय टीम के खिलाड़ियों को भी कमांडो ट्रेनिंग दी गई."

उन्होंने कहा कि हार और जीत दोनों ही खेल के पहलू हैं लेकिन इस भारतीय टीम ने दिखाया कि वो किसी भी टीम का सामना कर सकती है.

लेकिन वो चेतावनी भी देते हैं कि अगर भारतीय टीम को बने रहना है तो उसे और कड़ी मेहनत करनी होगी.

साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के अगले विश्व कप में जगह न बनाए जाने पर निराशा जताई और कहा कि जिस देश ने दुनिया को विश्व कप जैसा नायाब टूर्नामट दिया और जो चार बार उसका चैंपियन रहा, उसका बाहर होना एशियाई हॉकी के लिए भी निराशाजनक है.

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