50 साल बाद इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैच खेलेगा भारत

  • 4 सितंबर 2013
टेस्ट सीरिज, इंग्लैंड, भारत, क्रिकेट टीम

पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच हुई ऐशेज़ सिरीज़ कई कारणों से चर्चा में रही. विवादों को छोड़ दें तो पांचों टेस्ट मैच रोमांच से भरपूर रहे.

उन्हें देखने दर्शकों की संख्या भी ख़ासी रही. इसे टेस्ट क्रिकेट का जादू कहा जा सकता है. हालांकि दुनिया के जाने-माने क्रिकेटर इसके वजूद को लेकर चिंतित भी हैं.

ऐसे में यह समाचार आना कि इंग्लैंड पचास साल बाद अपनी ही धरती पर भारत के ख़िलाफ़ पांच टेस्ट मैचों की सिरीज़ खेलने को सहमत हो गया है, टेस्ट क्रिकेट प्रेमियों में ख़ुशी का संचार कर गया.

वैसे भारत ने अपने टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत भी इंग्लैंड के ख़िलाफ़ ही साल 1932 में की थी, लेकिन तब केवल एक ही टेस्ट मैच खेला गया था. क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स में तब आज की तरह वह पांच दिन नहीं बल्कि तीन दिन का मैच था.

उस मैच को इंग्लैंड नें 158 रनों से अपने नाम किया था. भारत ने पहली बार पांच टेस्ट मैचों की सिरीज़ साल 1947-48 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ उसी की धरती पर खेली, जिसे ऑस्ट्रेलिया ने 4-0 से अपने नाम किया. उल्लेखनीय है कि तब ऑस्ट्रेलिया में छह दिवसीय टेस्ट मैच खेले जाते थे. उस सिरीज़ में टेस्ट मैचों में एक दिन विश्राम का भी था.

ऐसी मेज़बानी में भारत पीछे

भारत ने अपनी ही ज़मीन पर पांच टेस्ट मैचों की सिरीज़ की मेज़बानी पहली बार साल 1948-49 में की, जिसे वेस्टइंडीज़ ने 1-0 से अपने नाम किया.

इसमे पांचों दिन लगातार मैच हुए. इंग्लैंड ने पांच टेस्ट मैचों की सिरीज़ भारत में पहली बार साल 1951-52 में खेली जो 1-1 से ड्रा रही.

अब इसे संयोग कहें या कुछ और कि दुनिया भर में टेस्ट क्रिकेट में सुनील गॉवस्कर, गुंडप्पा विश्वनाथ, विजय मांजरेकर, कर्नल सीके नायडू, दिलीप वैंगसरकर, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, संजय मांजरेकर जैसे एक से बढ़कर एक धुरंधर बल्लेबाज़ों और बिशन सिंह बेदी, चंद्रशेखर, प्रसन्ना, वेंकटराघवन जैसी मशहूर स्पिन चौकडी और उसके बाद कपिल देव, अनिल कुंबले जैसे गेंदबाज़ों के देश भारत ने साल 1986-87 के बाद से अपनी ही धरती पर कोई भी पांच टेस्ट मैचों की सिरीज़ की मेज़बानी नहीं की है.

उस सिरीज़ को पाकिस्तान ने 1-0 से अपने नाम किया था. जहां तक इंग्लैंड की बात है, तो उसके ख़िलाफ़ भारत ने पांच टेस्ट मैचों की सिरीज़ की मेज़बानी आख़िरी बार 1984-85 में की थी, जिसे इंग्लैंड ने 2-1 से जीता था.

कभी होती थी बड़ी टेस्ट सिरीज़

सुनील गावस्कर और कपिल देव ने टेस्ट क्रिकेट में हमेशा भारत का नाम रोशन किया है.

वैसे ख़ुद भारत ने विदेशी धरती पर पांच टेस्ट मैचों की सिरीज़ आख़िरी बार साल 2002 में वेस्टइंडीज़ में खेली थी और उसे 1-0 से अपने नाम किया था.

एक दिलचस्प बात यह भी है कि भारत ने अपनी ही धरती पर पांच बार छह टेस्ट मैचों की सिरीज़ की मेज़बानी भी की है. क्रिकेट की दुनिया में नज़दीकी पड़ोसी होते हुए भी भारत और श्रीलंका में आज तक कभी भी पांच मैचों की एक भी टेस्ट सिरीज़ नहीं हुई है.

उल्लेखनीय है कि श्रीलंका को जब टेस्ट क्रिकेट खेलने का हक़ मिला, तो उसने पहला अधिकृत टेस्ट मैच भारत के ख़िलाफ़ साल 1981-82 में भारत में ही खेला था.

इंग्लैंड में भारत ने पिछली बार पांच मैचों की सिरीज़ 1959 में खेली थी, जिसे इंग्लैंड ने एकतरफ़ा रूप से 5-0 से अपने नाम किया.

तनातनी बरक़रार

भारत और दक्षिण अफ़्रीक़ा के बीच आगामी दौरे में टेस्ट मैचों की संख्या को लेकर अभी भी तनातनी बनी हुई है.

भारत चाहता है कि वहां दो टेस्ट मैच हों जबकि तय कार्यक्रम के अनुसार तीन टेस्ट मैच होने थे. भारत और दक्षिण अफ़्रीक़ा के बीच भी आज तक कभी पांच मैचों की टेस्ट सिरीज़ नहीं खेली गई.

भारत ने जब पहली बार साल 1992-93 में दक्षिण अफ़्रीक़ा का दौरा किया, तब चार टेस्ट मैच खेले गए थे और दक्षिण अफ़्रीक़ा 1-0 से विजयी रहा था.

हद तो यह कि अब टेस्ट सिरीज़ सिमटकर दो टेस्ट मैचों तक भी जा पहुंची है और ऐसी एकाध नहीं बल्कि ढेरों सिरीज़ हैं जिनमें भारत-ऑस्ट्रेलिया, भारत-दक्षिण अफ़्रीक़ा, भारत-न्यूज़ीलैंड सिरीज़ भी शामिल है.

अब अगर टेस्ट मैचों की गिनती ऐसे ही गिनी-चुनी सिरीज़ में पांच टेस्ट मैचों की रही तो उसकी लोकप्रियता तो अपने आप ही कम हो जाएगी.

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