क्या है सानिया मिर्ज़ा की ख़्वाहिश?

  • 5 सितंबर 2013
सानिया मिर्ज़ा, टेनिस, सिंगल्स

भारत की टेनिस स्टार सानिया मिर्ज़ा ने पहली बार यूएस ओपन टेनिस में महिलाओं के डबल्स मुक़ाबले के सेमी फ़ाइनल में जगह बनाई है.

सानिया मिर्ज़ा ने वरिष्ठ पत्रकार सलीम रिज़वी को क्वार्टर फ़ाइनल के मुकाबले और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया.

आपका मैच कैसा था? क्वार्टर फ़ाइनल में काफी अच्छी टीमें होती हैं. लेकिन सेमी फ़ाइनल में जगह बनाने का अनुभव कैसा था?

हम विंबलडन चैंपियन से खेल रहे थे. ये एशियन टेनिस के लिए बहुत बड़ी बात थी कि चार एशियन क्वार्टर फ़ाइनल में खेल रही थीं. हम सभी को कड़े मुकाबले का पहले से अंदाज़ा था.

बहुत तेज़ हवा चल रही थी. परिस्थितियाँ हमारे लिए आसान नहीं थीं लेकिन हमें ख़ुशी है कि हमने अपना मैच जीता.

जी ज़ेंग के साथ आपकी पार्टनरशिप कैसी रही?

मैं ज़ेंग को बहत समय से जानती हूं. हमने एक-दूसरे के साथ अच्छे मैच खेले हैं. हमने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ भी खेला है. एशियन गेम्स फ़ाइनल में जब मुझे सिल्वर मिला था, उसे गोल्ड मिला था. तीन सेटों के कड़े मुकाबले में मैं हार गई थी. मैं उसे सालों से जानती हूं. वह एक बहुत अच्छी लड़की है. मैं उसके पति और कोच से भी परिचित हूं. हम एक दूसरे को काफी पसंद करते हैं और अच्छी दोस्त हैं.

इसलिए हमारे लिए टेनिस कोर्ट पर तालमेल करने में आसानी होती है.

यूएस ओपन में पहली बार सेमी फ़ाइनल खेल रही हैं. कैसा महसूस कर रही है?

ज़ाहिर सी बात है, हम टेनिस खिलाड़ियों के लिए ग्रैंड स्लैम में खेलना और बेहतर प्रदर्शन करना एक बड़ा सपना होता है. अब तक मैं क्वार्टर फ़ाइनल से आगे नहीं बढ़ पा रही थी. मैं ख़ुशकिस्मत हूँ और मुझे ख़ुशी है कि मैं अब ऐसा कर पा रही हूँ.

आपके घुटनों में तकलीफ़ रही है और सर्जरी भी हो चुकी है. अभी कोई तकलीफ़ तो नहीं है?

मुझे पिछले कुछ हफ़्तों से घुटने में थोड़ा दर्द हो रहा है. उसका ट्रीटमेंट भी चल रहा है. दर्द तो होता रहता है. ऐसे कभी मुझे तो याद नहीं कि पिछले छह-सात साल में उठी और शरीर में किसी जगह पर कोई दर्द नहीं होता.

टेनिस मे लंबे समय से आप बड़े स्तर पर खेल रही हैं. बॉडी को ट्रेन करने के लिए किस तरह की ट्रेनिंग होती है?

हम दिन में पाँच-छह घंटे ट्रेनिंग में लगाते हैं. उसमें उपचार भी होता है, रिकवरी भी होती है और अभ्यास भी. ये हमारे लिए नौ से पाँच बजे की नौकरी की तरह है. प्रोफेशनल एथलीट के लिए टेनिस दुनिया का सबसे कठिन खेल माना जाता है. ज़ाहिर सी बात है कि आपको शारीरिक फिटनेस पर काफ़ी ध्यान देना पड़ता है.

क्या अब आपने सिंगल्स खेलना छोड़ दिया है?

मुझे सिंगल्स मैच खेले हुए एक साल से ज़्यादा हो गया है. कभी-कभार मेरा दिल होता है कि वापसी करूं. लेकिन कोई चोट लग जाती है जिसके कारण वापसी का इरादा छोड़ना पड़ता है. जैसी अभी घुटने में दर्द हो रहा है. तो मेरे लिए सिंगल्स खेलना मुश्किल है. इसलिए मैनें सिंगल्स खेलना छोड़ दिया है.

डबल्स अब काफी कठिन हो गया है. पहले जैसा नहीं रहा. अब प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है. सिंगल्स के बेहतर खिलाड़ी इसमें भाग लेते हैं. डबल्स मुक़ाबले के लिए किस तरह की तैयारी करनी पड़ती है?

डबल्स मुकाबले के लिए भी उतनी ही मेहनत करनी पड़ती है. लेकिन खेलते समय आप कुछ दूसरी चीज़ें भी करने की कोशिश करते हैं जैसे वॉली पर ज़्यादा काम करते हैं, टीम के साथी के साथ तालमेल पर काफी ध्यान देते हैं. आप रिटर्न अलग तरीके से करते हैं. इस तरह से सिंगल्स के मुकाबले डबल्स की तैयारी अलग तरीके से होती है.

आपकी एकैडमी कैसी चल रही है?

हाँ, एकैडमी अच्छी चल रही है. इसकी शुरुआत हुए तीन महीने हुए हैं. अभी हमारे पास करीब पचास बच्चे हैं. उम्मीद करते हैं कि इससे टेनिस में देश को ज़्यादा खिलाड़ी मिलेंगे.

आप लंबे समय से टेनिस खेल रही हैं. लेकिन महिला टेनिस में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कोई नई खिलाड़ी नहीं दिख रही है?

दुर्भाग्य से अभी कोई महिला खिलाड़ी बड़े स्तर पर सामने नहीं आई है. इसी वज़ह से मैं अपने तरीके से देश और टेनिस को कुछ वापस देना चाहती हूं ताकि एकैडमी से अच्छे खिलाड़ी निकलें और बड़े स्तर पर खेलें.

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