नेत्रहीन की हर वज़ीर और प्यादे पर नज़र

दर्पण ईरानी

'वर्ल्ड इन्डीविज़वल ब्लाइंड चेस चैंपियनशिप' में कांस्य पदक जीतने के बाद अपनी इस कामयाबी पर बेहद खुश हैं दर्पण ईरानी.

बडौदा के रहने वाले दर्पण भले ही नेत्रहीन हों लेकिन उन्होंने अपना भविष्य साफ़ दिख रहा है. भविष्य की ओर देखते हुए दर्पण कहते हैं कि उनका सपना है कि वो शतरंज में बड़े बड़े ख़िताब तो अपने नाम करें ही साथ ही वो ग्रैंडमास्टर के दर्जे तक भी पहुचें.

वो कहते हैं, ''अगर मैं ऐसा कर लेता हूं तो इस मुक़ाम पर पहुंचने वाला मैं पहला नेत्रहीन खिलाड़ी बनूंगा.'' आज भले ही दर्पण की उम्र 19 साल हो, लेकिन छोटी उम्र से ही उन्होंने चेस खेलाना शुरु कर दिया था.

क्यों चुना शतरंज का खेल

Image caption दर्पण ने चेस छोटी उम्र से ही खेलना शुरू कर दिया था.

भारत में शतरंज कोई आम खेल नहीं है. तो क्या दर्पण के पास थी कोई ख़ास वजह इसी खेल को चुनने की.

बीबीसी को इस सवाल का जवाब देते हुए दर्पण कहते हैं, '' शतरंज ही एक ऐसा खेल है जहां एक नेत्रहीन खिलाड़ी एक देख सकने वाले खिलाड़ी के साथ खेल सकता है. इतना ही नहीं वो उसे हरा भी सकता है. ऐसा बराबरी का मुक़ाबला किसी और खेल में संभव ही नहीं है.''

तो दर्पण किस खिलाड़ी के साथ खेलने की सबसे ज्यादा इच्छा रखते हैं?

इस सवाल के जवाब में दर्पण कहते हैं, ''जिस खिलाड़ी के साथ खेलने की तमन्ना मेरे मन में सबसे प्रबल है वो हैं विश्वनाथन आनंद. सौभाग्य से मैं उनके साथ खेल भी चुका हूं.''

अपनी बात को पूरा करते हुए दर्पण कहते हैं, ''मैं विश्वनाथन आनंद से 2010 में मिला और उनके साथ खेलना का मौका भी मुझे मिला. एक खिलाड़ी होने के नाते आप हमेशा चाहते हैं कि आप अच्छे खिलाड़ियों के साथ खेलें. अगर आप न भी जीतें तो भी आपको सीखने को बहुत कुछ मिल जाता है.''

कौन है प्रतिद्वंदी?

विश्वनाथन आनंद तो ठीक हैं लेकिन क्या अपने समकालीन शतरंज खिलाड़ी परिमार्जन नेगी को भी मानते हैं दर्पण एक प्रतिद्वंदी?

दर्पण कहते हैं, ''इस बात में कोई शक नहीं है कि परिमार्जन नेगी भारत के जाने माने शतरंज खिलाड़ियों में से एक हैं. आज की तारीख में मैं उनसे प्रतिस्पर्धा की सोच भी नहीं सकता. वैसे भी परिमार्जन भारत में बहुत कम खेलते हैं.''

कैसे खेलते हैं नेत्रहीन चेस

प्रतिस्पर्धा और हार-जीत तो अपनी जगह है लेकिन एक नेत्रहीन खिलाड़ी कैसे खेलता है चेस. क्या कोई अलग तरीका होता है?

Image caption दर्पण आमिर खान को भी मानते हैं अपनी प्रेरणा.

बीबीसी के इस उत्सुक सवाल के जवाब में दर्पण कहते हैं, ''ब्लाइंड चेस और साइटड चेस में कोई फर्क नहीं होता. नेत्रहीन खिलाड़ी जिस चेस बोर्ड पर खेलते हैं या तो वो लकड़ी का होता है या फिर एक्रेलिक का. उस बोर्ड में छेद होते हैं. जो गोटियां होती हैं जैसे हाथी या फिर घोड़ा उनके नीचे एक किल्ली होती है जो बोर्ड में अटक जाती है. तो एक नेत्रहीन खिलाड़ी जब इन्हें छूता है तो वो गिरती नहीं हैं.''

अपनी बात को पूरा करते हुए दर्पण कहते हैं, ''जहाँ तक बात रंग की है तो जो काले रंग की गोटी होती है वो ऊपर से नोकीली होती है. सफ़ेद गोटी ऊपर से सपाट होती है. बस यही फर्क होता है.''

प्रेरणा

जब दर्पण से बातों का सिलसिला चल ही रहा है तो क्यों न उनसे ये भी पूछ लिया जाए कि वो अपनी प्रेरणा किसे मानते हैं.

दर्पण कहते हैं कि जहां तक इस खेल की बात है तो विश्वनाथन आनंद हैं उनकी प्रेरणा. दर्पण आगे कहते हैं, ''स्टीफन हाकिंग और आमिर खान से भी मैं प्रेरणा लेता हूं. आमिर खान साल में एक फ़िल्म करते हैं और उस फ़िल्म में हर बारीकी का ध्यान रखते हैं. उनके परफेक्शन से मैं प्रेरणा लेता हूं.''

दर्पण शतरंज खेलने के साथ साथ चार्टेड एकाउन्टेंसी की पढ़ाई भी कर रहे हैं.

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