कॉमनवेल्थ बेटन: फीकी रही दिल्ली, ताज की सैर

साल 2010 की बात है जब दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स हुए थे और क्वींस बेटन का भारत में वाघा बॉर्डर पर स्वागत हुआ था और 30 सितंबर को ये दिल्ली पहुँची थी. उस समय राष्ट्रमंडल खेलों की कवरेज के दौरान बेटन को देखना का मौका मिला था. आज करीब तीन साल बाद क्वींस बेटन एक बार फिर भारत में है.

दरअसल इस बार के राष्ट्रमंडल खेल स्कॉटलैंड के ग्लास्गो शहर में होने है और पिछले मेज़बान देश होने के नाते वहाँ से क्वींस बेटन सबसे पहले भारत लाई गई है.

बकिंघम पैलेस से लॉन्च होने के बाद स्टॉकलैंड से होते हुए क्वींस बैटन भारत पहुँच चुकी है. आगर में ताज महल से होते हुए इसे दिल्ली लाया गया जहाँ कृष्णा पूनिया और अमित कुमार जैसे खिलाड़ी मौजूद थे.

ताज महल में कुछ घंटे बिताने के बाद अगला मुख्य पड़ाव रहा दिल्ली का नेश्लन स्टेडियम और इंडिया गेट जहाँ कॉमनवेल्थ गेम्स के कुछ भारतीय एथलीट विशेष मेहमान के तौर पर मौजूद रहे. इसके बाद 13 अक्तूबर को दोपहर में बेटन को क़ुतुब मिनार भी ले जाया जाएगा.

वैसे तो बेटन रिले का आयोजन काफ़ी भव्य रहता है लेकिन ये बैटन रिले थोड़ी फ़ीकी रहीउम्मीद जताई जा रही थी कि सुशील कुमार समेत कई बड़े खिलाड़ी बेटन रिले में शामिल रहेंगे लेकिन दिल्ली के राष्ट्रीय स्टेडियम में चंद खिलाड़ी ही नज़र आए जिसमें कृष्णा पूनिया और अमित कुमार शामिल थे.

बीबीसी से बातचीत में कृष्णा पूनिया ने कहा, "इस बेटन के बहाने हमारी पुरानी यादें ताज़ा हो गईं जब दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेल हुए थे. अगले खेलों के लिए भी हमारी तैयारी बहुत अच्छी है. हम उम्मीद करेंगे, उम्मीद नहीं बल्कि अपना 100 फ़ीसदी देंगे कि हमारा प्रदर्शन दिल्ली खेलों जैसा अच्छा रहे."

वहीं वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले युवा पहलवान अमित कुमार ने कहा, "मैं बहुत ही उत्साहित हूँ. बहुत ख़ुशी हो रही है ये सोचकर कि हम भी राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेंगे. खेलों की तैयारियाँ ज़ोरों से चल रही हैं. प्रेक्टिस में सुशील कुमार जैसे सीनियर भी हमारी मदद कर रहे हैं."

इतिहास

दरअसल भारत में इस समय त्यौहारों का मौसम है, दुर्गा पूजा, नवरात्र और दशहरा होने के कारण प्रशासन ने बेटन रिले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त पुलिसकर्मी उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई थी.

भारत के बाद 14 अक्तूबर को हवाई जहाज़ के ज़रिए बेटन बांग्लादेश ले जाई जाएगी जहाँ से ये पाकिस्तान और श्रीलंका का सफ़र तय करेगी.

महारानी एलिज़ाबेथ ने क्वींस बेटन को लॉन्च करते वक़्त बेटन में अपना भाषण डाल दिया है और बेटन ख़ास डिज़ाइन से तैयार की गई है ताकि ये संदेश दिखता रहा. ये बेटन सील रहेगी और विभिन्न देशों से होते हुए 1,90,000 किलोमीटर की यात्रा तय करेगी जिसमें करीब 288 दिन का समय लगेगा.

क्वींस बेटन रिले पहली बार 1958 में आयोजित की गई थी जब खेल कार्डिफ़ में हुए थे. लेकिन तब रिले बेटन केवल इंग्लैंड और मेज़बान देश में ही जाती थी.

कैसी होती है बेटन

बताया जा रहा है कि डिज़ाइनरों को हिदायत ये दी गई थी कि बेटन ऐसी हो कि आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को सौंपी जा सके, इसका वज़न दो किलोग्राम से ज़्यादा न हो और हर तरह के मौसम में इसे इस्तेमाल किया जा सके.

जानकारी के मुताबिक इसका हैंडल लकड़ी से बना हुआ है और इसके ऊपर ग्रेनाइट का जेमस्टोन जड़ा हुआ है जिसे निकाला जा सकता है. जिस देश में ये बैटन जाएगी उसे देश को ये नगीना बतौर तोहफ़े में दिया जाएगा.

अगले राष्ट्रमंडल खेल 23 जुलाई 2014 को शुरु होंगे जिसमें 17 खेलों में 11 दिनों तक खिलाड़ी हिस्सा लेंगे.

कुल 54 राष्ट्रमंडल देश हैं लेकिन खेलों में 70 देश हिस्सा लेंगे क्योंकि विदेशों में ब्रिटेन के कई ऐसे इलाक़े हैं जो अपने झंडे तले हिस्सा लेते हैं.

बेटन चार मई 2014 को यूरोप लौटेगी जब ये साइपरस, माल्टा जाएगी.

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