दर्द तो है लेकिन ख़ुश हैं सचिन

सचिन तेंदुलकर
Image caption सचिन के लिए क्रिकेट से दूर रहना आसान नहीं होगा

एक व्यक्ति और खिलाड़ी के तौर पर सचिन तेंदुलकर में कोई फ़र्क नहीं है. निजी ज़िंदगी और खेल के मैदान दोनों ही जगह सचिन प्रतिबद्धता के पक्के हैं. दोनों जगह उनमें ईमानदारी और एकाग्रता है. जो भी काम करते हैं, बहुत सूझबूझ और लगन के साथ करते हैं.

भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों में मैदान के भीतर वक्त की पाबंदी है लेकिन मैदान से बाहर वक्त की यही पाबंदी उन पर लागू नहीं होती. लेकिन सचिन तेंदुलकर दोनों मोर्चों पर पाबंद हैं. सचिन के साथ ये मेरा निजी अनुभव है.

मैंने ख़ुद देखा है कि जब बच्चें उन्हें घेर लेते हैं और उनका ऑटोग्राफ मांगते हैं तो वे इत्मीनान से उन्हें ऑटोग्राफ देते हैँ और उनसे बात भी करते जाते हैं.

इसमें 15-20 मिनट भी लग जाएं, तब भी उनके चेहरे पर शिकन तक नहीं आती. इस स्तर के खिलाड़ी के लिए यूं सामान्य तरीके से ज़िंदगी बिताना मुश्किल होता है, लेकिन सचिन इसी तरह जीते हैं.

आप पर दिन-रात मीडिया की नज़र बनी रही तो सामान्य ज़िंदगी जीना मुश्किल हो जाता है.

सचिन-अर्जुन की मुश्किल

सचिन के बेटे अर्जुन जब खेलते हैं, तब भी मीडिया इसी तरह नज़र गड़ा देता है. मुझे लगता है कि इस मामले में सचिन और उनके बेटे अर्जुन दोनों के साथ ग़लत हो जाता है. सचिन ये सब बीते 20-25 साल से झेल रहे हैं, मुझे नहीं लगता कि ये सब झेलना इतना आसान होता है.

Image caption सचिन के बेटे अर्जुन तेंदुलकर पर भी मीडिया की नज़र बराबर बनी रहती है

कोई भी खिलाड़ी जब अपने करियर की चरम सीमा पर पहुंचता है तो लगता है कि अब उसे खेल को अलविदा कह देना चाहिए. मगर जो चीज़ आपके साथ 25 साल तक जुड़ी रही, उसे अलविदा कहना बड़ा मुश्किल हो जाता है.

साल 2011 के विश्व कप के बाद सचिन के दिमाग में क्रिकेट को अलविदा कहने की बात आई ज़रूर होगी लेकिन टैस्ट क्रिकेट से उनका लगाव हमेशा रहा. तभी उन्होंने पहले एकदिवसीय क्रिकेट को अलविदा कहा और टेस्ट क्रिकेट खेलते रहे.

फॉर्म थोड़ा गड़बड़ाया, थोड़ा दबाव तो रहा ही होगा. जब टेस्ट क्रिकेट में 198 मैच खेल लिए तो उनके दिमाग में कही ना कहीं ये बात रही होगी कि अब 200 मैच पूरे हो जाएं. कह सकते हैं कि इतने मैच खेलना भी उनका एक ड्रीम रहा होगा.

जो हुआ अच्छा हुआ. सचिन ख़ुश हैं, बोर्ड ख़ुश है, लोग भी ख़ुश हैं. मुझे लगता है कि उनके संन्यास लेने पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

(बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव से बातचीत पर आधारित)

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