पुरानी शराब की तरह हैं सचिन तेंदुलकर

सचिन तेंडुलकर

भारतीय टीम आगे जब भी क्रिकेट मैच खेलने मैदान पर उतरेगी तो सचिन तेंदुलकर टीम का हिस्सा नहीं होंगे. लगभग 24 साल हो गए हैं और हमें सचिन को मैदान पर देखने की आदत पड़ चुकी है. वो जब भी मैदान में उतरे, हमने हर बार उनसे उम्मीद लगाई और वे भी हर बार हमारी उम्मीदों पर खरे उतरे. उन्होंने क्रिकेट के ज़रिए जितना मनोरंजन खेल-प्रेमियों का किया है, उतना शायद ही किसी और देश के खिलाड़ी ने किया होगा.

सचिन की कमी हमेशा महसूस की जाएगी. सचिन के जाने के बाद टीम में उनकी कमी हमेशा रहेगी. भारतीय टीम में और भी खिलाड़ी हैं जो क्रिकेट प्रेमियों का मनोरंजन करते रहेंगे लेकिन सचिन की भरपाई कोई खिलाड़ी नहीं कर पाएगा.

परिपक्व खिलाड़ी

एक खिलाड़ी के तौर पर सचिन की सबसे बड़ी ख़ासियत ये है कि वो पंद्रह साल की उम्र में ही क्रिकेट के हिसाब से काफी परिपक्व हो गए थे. ये बात रणजी ट्रॉफी में उनके पहले सीज़न की है. मैच खेलने दिल्ली की टीम मुंबई गई जहां दोनों पारियों में उन्होंने अर्धशतक जड़े थे. मैं गेंदबाज़ी और सचिन बल्लेबाजी कर रहे थे. सचिन ने जब बल्लेबाजी की तो ऐसा लगा मानो ये खिलाड़ी पिछले पंद्रह सालों से प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेल रहा है.

ये परिपक्वता धीरे-धीरे और बढ़ती चली गई. शराब के लिए कहते हैं कि जितनी पुरानी हो, उतनी ही अच्छी होती है, कुछ वैसी ही बात सचिन के साथ रही. उनकी परिपक्वता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि वो अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में 24 साल तक लगातार दबावों के बीच खेलते रहे.

गजब का जुनून

Image caption सचिन के बल्ले का लोहा हर किसी ने माना

क्रिकेट के प्रति उनके जुनून का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि सचिन से यदि कहा जाए कि मैच के बाद आप यहीं मैदान में सो जाइए और सुबह फिर यहीं खेलना है तो वो इसके लिए भी राजी हो जाएं. अपने इसी जुनून की वजह से वो इतने साल तक क्रिकेट खेलते रहे. 24 साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और उसके पहले भी पांच-छह साल क्रिकेट वो खेल चुके थे. यानी कुल 30 साल तक एक जैसे जुनून के साथ क्रिकेट खेलते रहना कोई आसान बात नहीं है.

सचिन आज भी उतने ही विनम्र है जितने 15 साल पहले थे. इतनी उपलब्धियों के बावजूद किसी इंसान के पांव धरती पर ही रहें, इससे बड़ी भला और क्या खासियत हो सकती है.

कमेंट्री के दौरान हमने देखा कि लोग सचिन के साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए लालायित रहते हैं. सचिन लोगों से कहते थे कि मुझे छूना मत, मैं बस की तरफ धीरे धीरे चलूंगा, बस मेरे बिना जाएगी नहीं और जितनी चाहे, तस्वीरें खींच लेना. सचिन ने यहां भी अपने चाहने वालों को निराश नहीं किया.

गेंदबाज़ बनने की सलाह

साल 1989 के पाकिस्तान दौरे पर सचिन ने पहले टैस्ट मैच में शायद कुछ खास रन नहीं बनाए थे. सचिन नेट में लेग-स्पिन गेंदबाजी कर रहे थे और गेंद को अच्छा टर्न दे रहे थे. मैंने सचिन से कहा कि बल्लेबाज के तौर पर यदि आप अच्छा नहीं कर पाते हैं तो एक अच्छे लेग-स्पिनर भी बन सकते हैं.

आज मुझे अपनी इस बात पर हंसी आती है कि मैं उस सचिन को ये सलाह दे रहा था जिसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सौ शतक लगाने थे.

युवा खिलाड़ियों में विराट कोहली ने सचिन तेंदुलकर से बहुत कुछ सीखा है. विराट कोहली अंडर-19 से इंटरनेशनल क्रिकेट में आने पर कुछ भटक गए थे. लेकिन उन्होंने सचिन के साथ रहकर बहुत कुछ सीखा जो आपको चोटी का खिलाड़ी बनाने में मददगार साबित होता है.

वहीं सुरेश रैना सचिन के साथ खेलकर भी नहीं सीख पाए. युवराज भी टैस्ट मैच में खेलने के गुर नहीं सीख पाए. सचिन नेट प्रैक्टिस भी ऐसे करते थे जैसे मैच खेल रहे हों. युवा खिलाड़ियों को सचिन से ये सब बातें सीखना चाहिए.

(बीबीसी संवाददाता शकील अख़्तर से बातचीत पर आधारित)

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