जब क़ादिर की गेंद सचिन के बल्ले से टकराई

सचिन तेंडुलकर

ये महज इत्तेफाक की बात है कि सचिन तेंदुलकर ने कराची के नेशनल स्टेडियम में जब पहला टैस्ट मैच खेला, उस मैच को मैंने कवर किया. बड़ा ही ज़बर्दस्त माहौल था क्योंकि भारत की उस टीम में एक से बढ़कर एक खिलाड़ी थे.

कपिल, सिद्धू, संजय मांजरेकर जैसे खिलाड़ियों में सचिन को एक नौजवान खिलाड़ी के तौर पर शामिल किया गया था.

तब सचिन को किसी ने इतनी खास तवज्जो नहीं दी थी. सबको बस इतना पता था कि सचिन भारत की घरेलू श्रृंखला में खेलकर आए हैं. तब सुनील गावस्कर ये कह चुके थे आने वाले समय में सचिन क्रिकेट की दुनिया पर राज करेंगे. सचिन जब आए थे, तब पाकिस्तान की टीम में इमरान ख़ान, वसीम अकरम, वकार यूनुस और अब्दुल क़ादिर जैसे गजब के गेंदबाज़ थे.

बाद में सचिन ने एक साक्षात्कार में भी कहा था कि उन्होंने पाकिस्तान दौरे में इन चार गेंदबाजों को झेला था.

बाद में उन्होंने क़ादिर की गेंद पर छक्के भी जड़े. सचिन टैस्ट क्रिकेट में पहली बार वकार यूनुस के हाथों आउट हुए थे. बाद में वकार यूनुस ने भी माना कि एक पारी में सचिन ने जो दो चौके जड़े थे, वो बड़े ही 'क्लासिक' थे जो उन्हें आज भी याद हैं.

बाद की पारियों से भी सचिन ने जता दिया था वो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में राज करेंगे.

'अपनी शर्तों पर खेला क्रिकेट'

Image caption सचिन ने भारतीय टीम में ऐसे समय प्रवेश किया जब टीम में कपिल देव जैसे सितारे मौजूद थे

दूसरा इत्तेफाक ये रहा कि सचिन ने एकदिवसीय मैचों में अपना पहला शतक ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलम्बो में जड़ा था.

मैं उस मैच का भी गवाह हूं. हालांकि वहां उन्होंने शतक बनाने में थोड़ा ज्यादा वक्त लगाया था, लेकिन शतक के बाद वो रुके नहीं थे और फिर उन्होंने दुनिया के हर गेंदबाज को छकाया.

सचिन ने क्रिकेट को अपनी शर्तों पर खेला है.

कराची में जिस मैच में सचिन ने क़ादिर की गेंद पर छक्के जड़े थे. ये अलग बात है कि वो आधिकारिक मैच होने की बजाए एक्ज़ीबिशन मैच में तब्दील हो गया था. मैदान पर दोनों के बीच क्या कहा-सुनी हुई, पता नहीं, लेकिन क़ादिर ने ज़रूर ये सोचा होगा कि वो सचिन को आसानी से आउट कर देंगे.

लेकिन वो शायद भूल गए थे कि अगर उनके पास गेंद थी तो सचिन के पास भी बल्ला था.

लेकिन तब पाकिस्तान के मीडिया ने सचिन को उतनी तरजीह नहीं दी थी क्योंकि तब भारतीय टीम में और भी सितारे जगमगाते थे.

उस वक़्त पाकिस्तान के कुछ अखबारों ने ये घोषणा कर दी थी कि सचिन इसी तरह मेहनत करते रहे तो उनका मुस्तकबिल बड़ा ही रौशन होगा.

ये भी बड़ी हैरानी की बात रही कि जिस उम्र में बच्चे स्कूल का बैग लेकर चलते हैं, उस उम्र में सचिन क्रिकेट का किट लेकर चलते थे और इसके बाद उन्होंने फिर कभी पलटकर नहीं देखा.

(बीबीसी संवाददाता पंकज प्रियदर्शी से बातचीत पर आधारित)

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