'सचिन ही डैडी का बेटा, मैं तो सिर्फ बेटी रह गई'

मुंबई के शिवाजी पार्क में सैकड़ों युवा क्रिकेटर और उनके कोच दिखाई पड़ रहे हैं. इन सब के बीच सिर्फ़ एक ही महिला है, जो हँसते हुए याद दिलाती हैं कि इस समय उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई टीम की टोपी पहन रखी है!

इनका नाम है कल्पना मुरकर और इन दिनों ये भारतीय महिला क्रिकेट टीम की चयनकर्ता हैं.

वैसे इनकी पहचान इस शिवाजी पार्क में रमाकान्त अचरेकर की बेटी के तौर से है जो नेट्स पर युवा प्रतिभाशाली क्रिकेटरों को दीक्षा देती हैं.

बातचीत की शुरुआत में ही उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "शिष्य होते हुए भी सचिन ही डैडी का बेटा रहा है, मैं सिर्फ़ उनकी बेटी ही रही हूँ".

जाने-माने क्रिकेट कोच रमाकान्त अचरेकर को दुनिया सचिन तेंदुलकर के कोच के तौर पर जानती है.

ये वही अचरेकर हैं जिनके पास सचिन के भाई उन्हें सिर्फ़ 11 वर्ष की आयु में लेकर गए थे.

इसके बाद जो कुछ हुआ वो अब इतिहास में अंकित है.

घर का खाना

कल्पना मुरकर बताती हैं कि पिछले दो दिनों से सचिन की पत्नी अंजलि तेंदुलकर का फ़ोन रोज़ सुबह आता है, ये याद दिलाने के लिए की उनके पूरे परिवार को सचिन के आखिरी मैच में पहुंचना है.

रमाकान्त अचरेकर की तबियत इन दिनों खराब ही रहती है, लेकिन गुरूवार को वो वानखेड़े के प्रेसिडेंट्स बॉक्स में सचिन की माँ के साथ बैठ कर अपने चहेते शिष्य को आख़िरी बार भारत के लिए खेलता देखेंगे.

कल्पना ने कहा, "सचिन हर दूसरे दिन हमारे यहाँ ही खाना खाता था. डैडी उसे एक मैदान से दूसरे मैदान अपने स्कूटर पर बैठा कर ले जाया करते थे. सभी मैच ख़त्म होने के बाद वो घर पर विनोद कांबली के साथ आकर मेरी माँ का बनाया खाना खा कर जाता था".

हालांकि कल्पना के अनुसार जब सचिन के संन्यास की ख़बर मिली तो रमाकांत अचरेकर को लगा कि अभी तो वो दो साल और खेल सकता था.

लेकिन उनके परिवार को इसका आभास पिछले साल ही हो गया था.

इशारा

कल्पना ने कहा, "पिछले साल डैडी की सालगिरह का सारा इंतज़ाम सचिन ने बांद्रा कुरला कॉम्प्लेक्स में खुद करवाया था. वहीं पर बात बात में उसने इशारा किया था कि अब क्रिकेट को अलविदा कहने का समय निकट आ रहा है".

कल्पना मुरकर को लगता है कि आज तक जितने भी क्रिकेट खिलाड़ी मुंबई के शिवाजी पार्क में आए हैं, उनमे से सचिन सबसे अलग था.

मैंने तपाक से पूछ डाला कि सचिन के बेटे अर्जुन तेंदुलकर में कितनी प्रतिभा देखती हैं वो?

जवाब मिला, "अर्जुन एक बेहतरीन स्पोर्टसमैन है. सिर्फ तेरह वर्ष की आयु में जितनी लगन से वो क्रिकेट खेलते हैं शायद कम ही खेल सकेंगे".

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