मैं उन्हें डिस्टर्ब नहीं करना चाहता: कांबली

सचिन तेंदुलकर को उनके करियर के आख़िरी 200वें टेस्ट में विदाई देने उनके सारे घनिष्ठ साथी वानखेड़े स्टेडियम पर पहुंचे सिवाए एक के. वह थे एक ज़माने में उनके सबसे क़रीबी रहे विनोद कांबली.

विनोद कांबली इस समय एक न्यूज़ टीवी चैनल के लिए एक्सपर्ट की भूमिका में हैं. वह मुंबई से हज़ारों मील दूर नोएडा में बैठकर अपने बचपन के सखा के आख़िरी मैच का विश्लेषण कर रहे हैं.

बचपन के दोस्त से लंबे समय से उनकी बातचीत नहीं हुई. यहां तक की क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा के बाद भी दोनों के बीच किसी तरह के कोई संवाद का आदान प्रदान नहीं हुआ.

कांबली कहते हैं, ''मैं उन्हें डिस्टर्ब नहीं करना चाहता. हालांकि मैं जानता हूं कि क्रिकेट को विदा कहते हुए उन्हें बहुत दर्द हुआ होगा."

वह कहते हैं, "सचिनने पिछले 30 सालों से केवल क्रिकेट खेली है, उन्होंने तो इसके अलावा कुछ सीखा ही नहीं. संन्यास का फ़ैसला लेना उनके लिए क़त्तई आसान नहीं रहा होगा.''

दस साल की उम्र से साथ

ग़ौरतलब है कि कांबली औरसचिन की दोस्ती उस उम्र से है जब दोनों 10 साल के थे और मुंबई के शारदाश्रम स्कूल में कक्षा सात के छात्र थे. दोनों की पहली मुलाक़ात रमाकांत आचरेकर की क्रिकेट कोचिंग में हुई थी.

वर्ष 1988 में दोनों ने शारदाश्रम विद्यामंदिर स्कूल के लिए हैरिश शील्ड प्रतियोगिता में सेंट ज़ेवियर स्कूल के ख़िलाफ़ साथ खेलते हुए 664 रनों की रिकॉर्ड साझीदारी की थी.

उस मैच में जब दोनों शतक बना चुके थे तब स्कूल कोच उन्हें पारी घोषित करने के लिए लगातार बाहर आने का इशारा कर रहे थे लेकिन दोनों ने उनके इशारों को अनदेखा करते हुए खेलना जारी रखा और एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसने दोनों को देश में प्रसिद्ध कर दिया.

अब रिश्तों में ख़ालीपन

सचिन और कांबली के रिश्तों में तब ख़ालीपन आ गया, जब कांबली ने एक टीवी रियल्टी शो में कहा कि उन्हें लगता है कि सचिन ने करियर में उनकी बहुत ज्यादा मदद नहीं की.

बाद में कांबली ने इसे लेकर काफ़ी सफ़ाई भी दी लेकिन ये माना गया कि उनकी इस टिप्पणी को सचिन ने पसंद नहीं किया.

लेकिन अब कांबली इस बारे में कुछ नहीं बोलते. वह एक क्रिकेटर के रूप में सचिन की तारीफ़ करते नहीं थकते.

'हमेशा से रनों के भूखे'

कांबली का कहना है कि सचिन में बचपन से ही रनों की ज़बरदस्त भूख रही है, जो उन्हें क्रिकेट में इतने आगे ले गई. मैदान में वह हमेशा अलग तरह के क्रिकेटर हो जाते हैं.

कांबली ने सचिन के थोड़े समय बाद ही इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी पारी की शुरुआत की लेकिन वह हमेशा टीम से अंदर-बाहर होते रहे.

वह सचिन की 24 साल लंबे और सफल करियर की वजह उनका संयम मानते हैं. वह कहते हैं कि ये गुण उनमें हमेशा से रहा है, जिसने उन्हें हर परिस्थिति में ढलना सिखाया.

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