'सचिन का मुरीद हूँ, लेकिन पृथ्वी बनना चाहता हूँ'

पृथ्वी शॉ

कुछ दिन पहले ही सचिन तेंदुलकर के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद ये सवाल उठने लगे हैं कि सचिन की विरासत कौन संभालेगा?

क्या सचिन जैसा दूसरा खिलाड़ी आ पाएगा? ये सवाल ऐसे हैं, जिनके जवाब इतने आसान नहीं. क्योंकि सचिन जैसा खिलाड़ी एक दिन में नहीं बनता. वर्षों की साधना और क्रिकेट के मैदान पर प्रतिभा दिखाने के बाद कोई सचिन बनता है.

मगर भारत में घरेलू स्तर पर कई खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. आगे चलकर उन्हें सचिन जैसा मौक़ा और सुविधा मिल पाएगी या नहीं, ये बहस का विषय हो सकता है.

लेकिन सचिन के रिटायरमेंट के कुछ ही दिन बाद हैरिस शील्ड प्रतियोगिता में रिकॉर्डतोड़ 546 रन बनाकर 15 साल के पृथ्वी शॉ ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है.

रिज़वी स्प्रिंगफ़ील्ड के कप्तान पृथ्वी शॉ ने सेंट फ़्रांसिस डी असीसी के ख़िलाफ़ 330 गेंदों पर 546 रन बनाकर अरमान जाफ़र के 498 रनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया.

सचिन के मुरीद

बीबीसी हिंदी के साथ विशेष बातचीत में पृथ्वी ने कहा कि उन्हें इसका अंदाज़ा नहीं था कि वे विश्व रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं.

उन्होंने कहा, "मेरे लिए अच्छा मौक़ा था और विकेट भी काफ़ी अच्छा था. मैं संयम से खेल रहा था. मुझे मेरे कोच ने कहा था कि सिंगल्स पर ध्यान दो और मैंने वैसा ही किया."

हालाँकि अपनी पारी में पृथ्वी ने 85 चौके और पाँच छक्के लगाए. पृथ्वी के आदर्श भी सचिन तेंदुलकर हैं. वे मानते हैं कि सचिन से उन्होंने काफ़ी कुछ सीखा है.

उन्होंने कहा, "मैं भारत के लिए क्रिकेट खेलना चाहता हूँ, लेकिन अभी सोचा नहीं है कुछ. क्योंकि अभी यह मेरी शुरुआत है. मैं अभी काफ़ी छोटा हूँ और मुझे आगे अभी बहुत खेलना है."

पृथ्वी की प्रतिभा पहचानने वाले कुछ लोगों में इंग्लैंड के काउंटी क्रिकेटर रहे जुलियन वुड भी हैं, जिन्होंने पृथ्वी को क्रिकेट खेलने के लिए इंग्लैंड भी बुलाया. बीबीसी के साथ बातचीत में पृथ्वी ने स्वीकार किया कि इंग्लैंड में क्रिकेट खेलने का उनका अनुभव काफ़ी अच्छा रहा था.

उन्होंने कहा, "वो एक अलग दुनिया थी. मेरा वहाँ का अनुभव बहुत अच्छा था. लेकिन भारत में भी उभरते हुए क्रिकेटरों के लिए अच्छी सुविधा है. भारत ने इस मोर्चे पर काफ़ी सुधार किया है."

पृथ्वी सचिन के ज़बरदस्त प्रशंसक हैं. वे कहते हैं कि सचिन की ईमानदारी और नम्रता से वे काफ़ी प्रभावित हैं, लेकिन वे ख़ुद पृथ्वी बनना चाहते हैं.

'पढ़ाई में भी अच्छा करे'

अपनी बल्लेबाज़ी की शैली के बारे में पृथ्वी कहते हैं कि वे टीम की ज़रूरत के हिसाब से खेलते हैं.

पृथ्वी के पिता पंकज शॉ अपने बेटे के प्रदर्शन से गदगद हैं. वे चाहते हैं कि उनका बेटा अच्छा खेलता रहे.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "पृथ्वी ने पाँच साल की उम्र से ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था. हमने शुरू से ही उसे हरसंभव सुविधा प्रदान की."

उन्होंने स्वीकार किया कि हैरिसशील्ड में विश्व रिकॉर्ड बनाने के बाद वे मीडिया की सुर्ख़ियों में आ गए हैं, लेकिन इससे उन पर दबाव नहीं होगा, बल्कि उनके बेटे को अपनी ज़िम्मेदारी का अहसास होगा.

पृथ्वी के पिता रेडीमेड गारमेंट्स के सेल्समैन हैं और अपने बेटे को लेकर उनके काफ़ी अरमान हैं. वे चाहते हैं कि नौवीं क्लास में पढ़ रहा उनका बेटा क्रिकेट के साथ-साथ पढ़ाई में भी अच्छा करे.

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