भारत बनाम दक्षिण अफ्रीकाः डरबन में ही सिरीज़ का फ़ैसला हो जाएगा?

  • 8 दिसंबर 2013
शिखर धवन

भारत और दक्षिण अफ़्रीका के बीच दूसरा एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैच रविवार को डरबन में खेला जाएगा. इससे पहले गुरूवार को जोहानिसबर्ग में खेले गए पहले मैच में दक्षिण अफ़्रीका ने भारत को 141 रनों से करारी मात दी थी.

भारतीय क्रिकेट टीम का रिकॉर्ड विदेशों में ख़ासकर दक्षिण अफ़्रीका में बेहद ख़राब रहा है. भारत अभी तक दक्षिण अफ़्रीका से उसी की ज़मीन पर 26 बार एकदिवसीय क्रिकेट में आमने-सामने हुआ है और 20 मैचों में उसे हार का सामना करना पड़ा है. भारत को अभी तक केवल पाँच मैचों में ही जीत नसीब हुई है.

(क्रिकेट में बदलाव के मसीहा)

डरबन में तो भारतीय टीम के नाम दक्षिण अफ़्रीका में उसके ख़िलाफ सबसे कम स्कोर बनाने का भी रिकॉर्ड हैं. साल 2006-07 में पाँच मैचों की सिरीज़ के दूसरे एकदिवसीय मैच में भारतीय टीम जीत के लिए 249 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए महज़ 91 रनों पर सिमट गई थी और उसे 157 रनों से करारी मात का सामना करना पड़ा था.

डरबन का विकेट तब भारतीय बल्लेबाज़ो के लिए कितना खौफ़नाक था यह जानने के लिए इतना ही काफ़ी है कि पूरी भारतीय टीम सिर्फ 29.1 ओवर में ऑलआउट होकर पैवेलियन पहुंच चुकी थी. इससे पहले साल 1992-93 में भी डरबन भारत के लिए कम डरावना साबित नही हुआ था.

उस वक्त सात मैचों की सिरीज़ के छठे मैच में भारत का पुलिंदा 177 रनों पर बंध गया था जबकि जीत के लिए उसे 217 रनों की ज़रूरत थी. साल 2010-11 के अपने पिछले दौरे में भी भारत कुछ विशेष नही कर सका और 35.4 ओवर में 154 रन ही बना पाया था और दक्षिण अफ़्रीका ने उसे 135 रनों से हार का स्वाद चखाया था.

ख़राब फॉर्म

इस टीम में मुरली विजय, विराट कोहली, रोहित शर्मा, युवराज सिंह, सुरेश रैना, ज़हीर खान और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी थे जो दक्षिण अफ़्रीका का दौरा कर रही मौजूदा टीम में भी शामिल हैं.

क्रिकेट के जानकारों के मुताबिक होना तो यह चाहिए था कि जिस टीम के इतने खिलाड़ी दक्षिण अफ़्रीका में खेल चुके हों और इसके अलावा शिखर धवन भी पिछले दिनो 'भारत-ए' के लिए खेलते हुए दक्षिण अफ़्रीका का दौरा कर चुके हैं, तो वह मैदान पर कम से कम ऐसा खेल तो दिखाए जिससे उन पर भरोसा पैदा हो.

('विराट' हुए कोहली)

ऐसा माना जात है कि भारत के लिए दक्षिण अफ्रीकी दौरा कभी भी शानदार नही रहा लेकिन जोहानिसबर्ग में पहले तो गेंदबाज़ो ने निराश किया तो बाद में बल्लेबाज़ भी पीछे नही रहे. रोहित शर्मा का तो यह हाल था कि उनके बल्ले से गेंद का संपर्क तक नही हो पा रहा था.

सुरेश रैना की बल्लेबाज़ी में ख़राब फॉर्म का सिलसिला जारी है तो युवराज सिंह तो केवल दो गेंद खेलकर चलते बने. कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के बल्ले से 65 रन ज़रूर निकले लेकिन जैसे निकले शायद उससे ख़ुद धोनी भी खुश ना हो. पूरी भारतीय टीम खेल के तीनो विभाग के किसी क्लब स्तर से अधिक नही लग रही थी.

मंडेला को श्रद्धांजलि

हार के बाद धोनी ने हार का ठीकरा गेंदबाज़ो के सिर फोड़ा लेकिन जिस बल्लेबाज़ी के दम पर उन्होंने टॉस जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण करने का फैसला किया उससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या टीम के सबसे तेज़ गेंदबाज़ उमेश यादव टीम से जुड़कर ही रह जाएंगे और क्या अजिंक्य रहाणे हर विदेशी दौर पर टीम के साथ केवल घूमने जाएंगे?

(जब कादिर की गेंद...)

जितने रन सुरेश रैना बना रहे है उतने रन तो शायद रहाणे बना ही लेंगे. डरबन में जब भारतीय टीम मैदान में उतरेगी तो वहां माहौल बिलकुल अलग होगा. दक्षिण अफ़्रीका ही नही पूरी दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक नेल्सन मंडेला के निधन के बाद यह सिरीज़ उन्हे समर्पित करने की घोषणा कर दी गई है.

उनके निधन से दुख के अथाह सागर में डूबा अफ़्रीका अपने शानदार खेल की बदौलत नेल्सन मंडेला को श्रृद्धांजलि देना चाहेगा वो वही भारत के लिए डरबन की पुरानी यादों को भूलकर मैदान में अपना सब कुछ झोंकना होगा ताकि डरबन में ही तीन मैचों की सिरीज़ का निर्णायक फैसला ना हो जाए.

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