फ़ीफ़ाः क्या 'ग्रुप ऑफ डेथ' से बचा जा सकता है?

फ़ुटबॉल विश्वकप, ब्राज़ील

कुछ देश दूसरे कई देशों से ज्यादा बेताबी से विश्व कप के ड्रा की बाट जोह रहे थे. आइवरी कोस्ट की टीम हमेशा ही खतरनाक 'ग्रुप ऑफ डेथ' में मौजूद होती है.

आइवरी कोस्ट टीम के प्रशंसक, जैसे कि साल 2006 में अर्जेंटीना और नीदरलैंड, साल 2010 में ब्राजील और पुर्तगाल के प्रशंसकों की ही तरह, शायद हर तरह के परिणाम के लिए तैयार हो रहे होंगे.

कई और यूरोपीय देशों के बेचैन होने की घड़ी करीब आ रही है. इस घबराहट के भी कारण हैं, इसके बारे में मैं बाद में बताऊंगा.

पहले सवाल ये कि 'ग्रुप ऑफ डेथ' से कैसे बचा जाए? क्या इससे बचना संभव है? हां, इससे बचा जा सकता है.

सभी टीमों को चार श्रेणी और आठ अलग-अलग ग्रुप में रखा गया है. हालांकि अभी इस बात का फैसला होना बाकी है कि यूरोप की नौ टीमों में से कौन सी एक टीम तीसरी श्रेणी में रखी जाए. प्रत्येक ग्रुप में हर श्रेणी से एक टीम होगी.

सारी वरीयता प्राप्त टीमों को पहली श्रेणी में स्थान मिला है. इससे एक बात तो साफ हो जाती है कि इस श्रेणी की टीमें एक दूसरे से तब तक नहीं खेलेंगी, जब तक कि मुकाबला अपने अंतिम चरण में नहीं पहुंच जाता.

संशोधित वर्ल्ड रैंकिंग

बची दो श्रेणियों में एशिया, उत्तरी अमरीका और मध्य अमरीका (दूसरी श्रेणी) की टीमों, और अफ्रीका और दक्षिणी अमरीका की गैर-वरीयता प्राप्त टीमों (तीसरी श्रेणी) को जगह मिली है.

ये देखना होगा कि वे कौन से घातक ग्रुप हैं जिनके श्रेणी से बाहर निकल जाने की संभावना है?

इसके लिए हमें सबसे पहले टीमों को उनकी ताकत के हिसाब से वरीयता देनी होगी. इसका एक तरीका तो ये होगा कि हम फ़ीफ़ा की वर्ल्ड रैंकिंग का सहारा लें, मगर जैसा कि मैंने पहले लिखा था, अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों को दोस्ताना तरीके से खेलना किसी टीम को, भले वो जीत जाए, फ़ीफ़ा की वर्ल्ड रैंकिंग से नीचे उतार सकता है.

इसलिए हम संशोधित वर्ल्ड रैंकिंग का इस्तेमाल करेंगे.

अगर इस रैंकिंग को इस्तेमाल किया जाए तो, पहली श्रेणी, जिसमें शीर्ष वरीयता प्राप्त टीमें हैं, 6.25 की औसत रैंकिंग के साथ सबसे मजबूत श्रेणी के रूप में उभर रही है.

इसके बाद का स्थान यूरोपीय श्रेणी (चौथी श्रेणी) का आता है. इसकी रैंकिंग 14.25 होती अगर फ्रांस (15वें स्थान पर) तीसरी श्रेणी में पहुंच पाता, जैसा कि फ़ीफ़ा के पिछले हफ्ते में यू-टर्न लेने के पहले तक अपेक्षा की जा रही थी.

इस अवस्था में थोड़ा कम या थोड़ा ज्यादा का फर्क आ सकता है अगर ऐसा होने की बजाय दूसरी यूरोपिय टीमों में से कोई एक वहां पहुंचे.

यही कारण है कि यूरोपीय टीमों को अब थोड़ा बेचैन होना चाहिए. तीसरी और चौथी श्रेणी आसानी से मुश्किल ग्रुप में पहुंच सकती हैं, क्योंकि वे एक की बजाय "दमदार" श्रेणी (पहली और चौथी श्रेणी) की दो टीमों से मुकाबला करेंगी.

विश्व कप श्रेणी (रैंकिंग कोष्ठक में)

जो टीमें तीसरी श्रेणी में पहुंचने वाली हैं उन्हें छोड़कर यूरोप की सभी गैर-वरीयता प्राप्त टीमों को चौथी श्रेणी में रखा गया है. उम्मीद है कि तीसरी श्रेणी में पहुँचने वाली टीम फ्रांस हो सकती है. मगर फ़ीफ़ा ने इस हफ्ते घोषणा की है कि किसी भी यूरोपीय टीम को इसके लिए चुना जा सकता है. यह चुनाव बिना किसी क्रम के (ऐट रैंडम) होगा.

फिलहाल इस बहस के लिए हम मान लेंगे कि फ्रांस तीसरी श्रेणी में होगा.

अब अगर फ़ीफ़ा के नियमों का पालन किया जाए तो सबसे दमदार ग्रुप हैः स्पेन (पहले स्थान पर), अमरीका (11वें), चिली (8वें), और नीदरलैंड (5वें). इस ग्रुप में दुनिया के 11 शीर्ष टीमों में से चार शामिल हैं. आप इसे आखिरी 'ग्रुप ऑफ डेथ' के रूप में देख सकते हैं.

सबसे कमजोर संभावित ग्रुप में बोगोटाः कोलंबिया (14वें), दक्षिणी कोरिया (50वें), अल्जीरिया (39वें) और क्रोशिया (हमारी रैंकिंग में 22वें स्थान के लिए मेक्सिको के साथ) होंगे. इस काल्पनिक समूह में औसत रैंकिंग 31.25 होगा.

दूसरे शब्दों में, दुनिया की औसत रैंकिंग के लिहाज से देखा जाए तो सबसे मजबूत और सबसे कमजोर ग्रुप के बीच के 25 स्थान रिक्त हैं.

वैकल्पिक विश्व कप श्रेणी

हम इन श्रेणियों को अलग तरीके से भी व्यवस्थित कर सकते हैं, ये तरीका बेहद साधारण होगा.

इसे टीमों को उनकी विश्व स्तरीय रैंकिंग (बेशक, दोस्ताने मैच को हटाकर) के अनुसार श्रेणियों में जगह देगें.

इस तरीके का इस्तेमाल करते हुए और फ़ीफ़ा के नियमों के मुताबिक सबसे घातक ग्रुप इस तरह हैः स्पेन (पहले), स्विट्जरलैंड (9वें), आइवरी कोस्ट (19वें) और आस्ट्रेलिया (36वें). औसत रैंकिंग 16.

सबसे कमजोर ग्रुपः चिली (8वें), ग्रीस (17वें), कैमरून (34वें) और दक्षिणी कोरिया (50वें). औसत रैंकिंग 27.25.

औसत विश्व रैंकिंग के अनुसार इस बार सबसे दमदार और सबसे कमजोर ग्रुप के बीच केवल 11 स्थानों का अंतर है.

'ग्रुप ऑफ डेथ' को इस तरह स्टेडियम से निकाल बाहर कर दिया गया है. मगर क्या ये ठीक बात होगी? शायद नहीं.

ऐसा इसलिए कि सभी देश 'ग्रुप ऑफ डेथ' में दिलचस्पी रखते हैं, इसे चाहते हैं, लेकिन तब तक जब तक उनका देश इसमें ना हो.

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