आदित्य हैं भारत के बैडमिंटन का भविष्य?

  • 9 जनवरी 2014
आदित्य जोशी

सिर्फ़ 17 साल के आदित्य जोशी किसी आम लड़के की तरह ही हैं. उन्हें भूत-प्रेत की कहानियों वाली अंग्रेज़ी फ़िल्में देखना बहुत पसंद है लेकिन मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल ज़िले धार के रहने वाले आदित्य जोशी ने वो कर दिखाया है जो अब तक कोई भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी नहीं कर सका.

आदित्य जोशी ने जूनियर बैडमिंटन विश्व रैंकिंग में पहली रैंक हासिल की है. ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय खिलाड़ी हैं.

आदित्य जोशी को लेकर कई उम्मीदें जताई जा रही हैं. इस बारे में वह क्या सोचते हैं?

आदित्य जोशी कहते हैं, "आगे आने वाले टूर्नामेंट में अच्छा खेलना मेरा लक्ष्य है. ओलंपिक, वर्ल्ड जूनियर जैसे जो बड़े टूर्नामेंट हैं उनमें पदक लाना मेरा लक्ष्य है."

आदित्य जोशी मध्य प्रदेश के एक छोटे से शहर धार के रहने वाले हैं.

लेकिन जो चीज़ हैरान करती है वो है आदित्य की रैंकिंग में ज़बरदस्त सुधार. एक साल पहले आदित्य की जूनियर रैंकिंग 54 थी. नंबर वन तक का सफ़र उन्होंने कैसे इतनी जल्दी तय किया इसके जवाब में वह कहते हैं, "इसके पीछे बहुत लोगों की मेहनत है. मेरे पापा मेरे कोच हैं, प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन एकेडमी में मैंने प्रैक्टिस की है वहां के कोच, मेरी मां इन सभी का मेरी सफलता में हाथ है."

आदित्य ने सिर्फ़ पांच साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था. उनके भाई प्रतुल भी बैडमिंटन के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं.

छोटे शहर से नंबर वन तक

कम उम्र से ही उनके पिता दोनों भाइयों को सुबह साढ़े पांच बजे उठाकर स्टेडियम लेकर जाते थे.

अतुल जोशी कहते हैं, "मुझे लगता था कि आदित्य नंबर वन रैंकिंग हासिल कर सकता है. आदित्य ने बहुत कम उम्र से ही अपने बड़े भाई के साथ टूर्नामेंट जीतने शुरू कर दिए थे."

आदित्य की पृष्ठभूमि उन लोगों के लिए मिसाल है जो कहते हैं कि छोटे शहरों के खिलाड़ियों को मौके नहीं मिलते या वे आगे नहीं बढ़ सकते. आदित्य के ज़िले धार के पिछड़ेपन का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि धार को रेल लाइन दूर-दूर तक नहीं छूती. फिर भी उन्होंने मुश्किलों को सफलता की राह में नहीं आने दिया.

आदित्य कहते हैं, "मुझे ऐसा नहीं लगता कि मैं किसी बड़े शहर में होने पर अलग मुकाम पर होता. अगर आप किसी बड़े शहर में हों और कुछ न करें तब भी आप कहीं नहीं पहुंच सकते."

आदित्य ने धार में भारतीय खेल प्राधिकरण के सेंटर में ट्रेनिंग ली है. ये सेंटर विक्रम वर्मा ने बतौर खेल मंत्री शुरू करवाया था.

आदित्य के पिता कहते हैं, "धार छोटी जगह है लेकिन यहां हमें सुविधाएं मिल जाती हैं. आदित्य और उनके साथी खिलाड़ी यहां से हर वर्ग में राष्ट्रीय चैंपियन बन चुके हैं."

आदित्य हर रोज़ कम से कम छह घंटे प्रैक्टिस करते हैं. लेकिन बी कॉम फर्स्ट ईयर के छात्र आदित्य को पढ़ाई और खेल में संतुलन बिठाना मुश्किल नहीं लगता. वह हर रविवार को वक़्त मिलने पर फ़िल्में देखने का मौका हाथ से नहीं जाने देते और टेनिस और क्रिकेट के मैच भी देखते हैं.

ख़ुद आदित्य को साइना नेहवाल और पीवी सिंधु का खेल बहुत पसंद है.

वर्ल्ड चैम्पियनशिप की चुनौती

पी कश्यप का मानना है कि आदित्य को अभी जूनियर वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीतकर दिखाना होगा.

तो क्या वाकई आदित्य से भारतीय बैडमिंटन के प्रशंसक बहुत उम्मीदें लगा सकते हैं? इस सवाल के जवाब में पूर्व एशियन बैडमिंटन चैम्पियन दिनेश खन्ना कहते हैं, "रैंकिंग से ये अनुमान लगाना कि यही खिलाड़ी भारत में बैडमिंटन का भविष्य है, ठीक नहीं होगा. लेकिन ये कहना ज़्यादा सही होगा कि वह एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं जिनसे हमें भविष्य में उम्मीदें हो सकती हैं."

वरिष्ठ बैडमिंटन खिलाड़ी पारुपल्ली कश्यप कहते हैं, "किसी भी वर्ल्ड रैंकिंग में नंबर वन आना निश्चित तौर पर शानदार है. जूनियर रैंकिंग में नंबर वन आना उनके लिए अच्छी बात है. उन्हें और मेहनत कर के अच्छा प्रदर्शन करना होगा."

वरिष्ठ खेल पत्रकार कृष्णास्वामी कहते हैं कि आदित्य से इतनी उम्मीदें लगाना ठीक नहीं. वह कहते हैं, "इतनी कम उम्र में उन पर ये टैग लगाना थोड़ा ग़लत होगा क्योंकि उन पर दबाव बढ़ता जाएगा क्योंकि जूनियर से जब भी सीनियर वर्ग में कोई खिलाड़ी आता है तो उस पर कई दबाव आते हैं. ये सब देखने के लिए शायद एक-दो साल का वक़्त लगेगा."

हालांकि अभी आदित्य की सीनियर रैंकिंग 460 है लेकिन इसके पीछे वजह ये है कि उन्होंने सीनियर टूर्नामेंट ज़्यादा नहीं खेले हैं. मुमकिन है कि वह ज़्यादा मैच खेलें तो उनकी रैंकिंग में सुधार हो. हालांकि अभी आदित्य का पूरा ध्यान ताइपेई में होने वाली एशियाई चैंपियनशिप और मलेशिया में होने वाली वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप पर है.

शायद आदित्य भी रैंकिंग के साथ आए दबाव को समझते हैं. वह कहते हैं, "अभी मैंने रणनीति तैयार नहीं की है. बस यही है कि इस बार अच्छा प्रदर्शन करना है क्योंकि रैंक वन हो गई है तो इसके साथ काफ़ी ज़िम्मेदारी भी है."

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