इंसाफ़ मिलने में नौ साल लग गएः अंजू जॉर्ज

अंजू बॉबी जॉर्ज, राष्ट्रपति कलाम इमेज कॉपीरइट PIB

"मैं बहुत खुश हूं. हालांकि न्याय मिलने में नौ साल का लम्बा समय लग गया. विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में आज़ाद भारत का ये पहला स्वर्ण पदक है. यह कारनामा मैंने किया इसलिए यह ख़शी और भी अधिक है."

यह कहना है भारत की जानी-मानी लंबी कूद एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज का, जिन्होंने साल 2005 में मोनाको विश्व एथलेटिक्स में दूसरे स्थान पर रहते हुए रजत पदक जीता था.

उस वक़्त स्वर्ण पदक रूस की तात्याना कोतोवा ने जीता था लेकिन बीते मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स महासंघ ने कोतोवा को डोपिंग का दोषी मानते हुए अंजू को स्वर्ण पदक देने का फ़ैसला किया है.

(मिल्खा के अलावा और भी हैं सितारे)

इस ख़बर के साथ ही भारतीय एथलेटिक्स जगत में एक नए इतिहास का उदय भी हो गया. अंजू किसी प्रमुख विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बन गई हैं.

इससे पहले उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा साल 2003 में भी मनवाया था. तब उन्होंने पेरिस में हुई विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था.

उस वक़्त भी ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाली वह पहली भारतीय एथलीट थीं.

अमरीका में प्रशिक्षण

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Image caption अंजू के पति रॉबर्ट बॉबी जॉर्ज उनके कोच भी हैं.

उन दिनों को याद करते हुए अंजू ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा, "तब मैंने अपने पति और कोच रॉबर्ट बॉबी जॉर्ज से ट्रेनिंग के बाद अंतराष्ट्रीय स्तर पर कामयाबी पाना शुरू किया था. वे भारत के सर्वश्रेष्ठ एथलीट कोच में से एक हैं. पेरिस में विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप से पहले मैंने दो महीने तक विश्व रिकॉर्डधारी एथलीट माइक पॉवेल के साथ अमरीका में प्रशिक्षण लिया था. इसका मुझे बहुत लाभ मिला."

(खेल की दुनिया के लंबे इंतजार)

अंजू ने अपने बीते दिनो में मिली कड़ी प्रतिद्वंदिता को याद करते हुए बताया, "तीन रूसी महिला एथलीट सात मीटर से ऊपर की लंबी कूद लगा रही थीं. इनके अलावा कुछ अमरीकी और यूरोपीय महिला एथलीट भी ऐसा कर रही थीं. साल 2004 में एथेंस ओलंपिक में मैं छठे स्थान पर रही. उनमें से बाक़ी तीन एथलीट कुछ सालों बाद डोप टेस्ट में नाकाम हो गईं, इससे मुझे उनकी कामयाबी पर शुरू से ही शक था."

अंजू ने कहा कि उनके समय में भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन नहीं होते थे.

उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं के लिए हम कड़ी मेहनत करते थे. यहाँ तक कि अमरीका में होने वाली ट्रेनिंग का ख़र्चा स्वीकृत कराने के लिए मुझे दिल्ली में दो महीने बिताने पड़े. वो समय बडा तकलीफदेह था लेकिन आख़िरकार मैंने वह उपलब्धि हासिल कर ही ली, जिसके लिए संघर्ष किया."

उड़न सिख मिल्खा

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भारतीय एथलेटिक्स जगत की वर्तमान दशा से अंजू थोड़ा निराश हैं. उन्होंने कहा, "साठ-सत्तर के दशक में हमारे पास उड़न सिख मिल्खा सिंह थे, अस्सी के दशक में पीटी ऊषा थीं और साल 2008 तक मैं थी. उम्मीद है कि आने वाले कुछ वर्षो में अच्छे एथलीट भारत के पास होंगे."

अंजू ने कहा, "हमारे समय में एशियाई खेलों में छह-सात स्वर्ण पदक और कुछ रजत पदक आ जाते थे जबकि अब तो गिने-चुने पदक ही मिल पाते हैं. आशा है कि इस बार एशियाई खेलों में अधिक पदक मिलेंगे."

(खेल की दुनिया के उतार चढ़ाव)

इसके अलावा इन दिनों निलंबित भारतीय ओलंपिक संघ के सवाल पर अंजू कहती हैं, "अगले कुछ महीनों में एथलेटिक्स के दृष्टिकोण से कोई बड़ी चैंपियनशिप नहीं है. छह महीने बाद राष्ट्रमंडल और एशियन गेम्स जैसे बड़े मुक़ाबले हैं. मुझे विश्वास है कि तब तक सब कुछ सही हो जाएगा और हमारे खिलाड़ी अपने राष्ट्रीय झंडे तले खेल सकेंगे."

भविष्य की योजनाओं को लेकर अंजू कहती हैं कि वह और उनके कोच पति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करने वाले अच्छे जंपर्स को तैयार करने की निश्चित रूप से कोशिश करेंगे.

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डेल पोत्रो

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