न्यूज़ीलैंड दौराः आसान नहीं हेमिल्टन की राह

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Image caption विराट कोहली की शतकीय पारी भी भारत को पहले वनडे में जीत नहीं दिला पाई

भारतीय क्रिकेट टीम के लिए इस साल की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसका आग़ाज़ हार के साथ हुआ. टीम इन दिनों न्यूज़ीलैंड के दौरे पर है जहां नेपियर में खेले गए पहले एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में मेज़बान टीम भारत को 24 रन से हरा चुकी है.

दोनों टीमें अब बुधवार को हेमिल्टन में एक बार फिर आमने-सामने होंगी.

नेपियर में भारतीय गेंदबाज़ों ने आईसीसी की एकदिवसीय रैंकिंग में आठवें नंबर की टीम न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ों के सामने 292 रन लुटाए.

एक समय जब न्यूज़ीलैंड ने अपने 5 विकेट 213 रन पर गंवा दिए थे, वह भी 41.4 ओवर में, तब लगा कि शायद भारत अब मैच में वापसी करेगा और न्यूज़ीलैंड 250 या फिर 260 रन तक बना पाएगी.

हार की वज़ह

ऐसे में भारतीय गेंदबाज़ों की कमज़ोरी एक बार फिर सामने आई और उन्होंने बाकी बचे ओवरों में 79 रन दे दिए. सबसे अनुभवी गेंदबाज़ होने के कारण ईशांत शर्मा के कंधों पर ज़िम्मेदारी थी कि वह भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शामी का मार्गदर्शन करते, लेकिन हुआ उलटा.

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Image caption पहले वनडे में न्यूज़ीलैंड ने भारत को पराजित किया था.

भुवनेश्वर कुमार ने कसी हुई गेंदबाज़ी करते हुए केवल 38 रन देकर एक विकेट लिया तो मोहम्मद शामी ने 55 रन देकर चार विकेट झटके. इशांत शर्मा अपनी दिशा से भटके और सबसे महंगे साबित होते हुए उन्होंने 9 ओवर में 72 रन दिए.

बाद में बल्लेबाज़ी में भी केवल विराट कोहली और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अपना दमख़म दिखाया. अगर विराट कोहली की शतकीय पारी में बने 123 रनों को हटा दिया जाए तो भारतीय टीम की दशा जानने में और भी आसानी हो जाएगी.

शिखर धवन और रोहित शर्मा की सलामी जोड़ी दक्षिण अफ्रीका के बाद न्यूज़ीलैंड में भी नाकाम रही. बड़ी शुरुआत ना मिलने से सारा दबाव विराट कोहली पर आया और उन्होंने अपनी ज़िम्मेदारी को बख़ूबी निभाया, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें सुरेश रैना और अजिंक्य रहाणे से कुछ ख़ास योगदान नही मिला.

सवाल मनोबल का

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रविंद्र जडेजा तो अपना खाता भी नही खोल सके. अब हेमिल्टन में हार के साथ मैदान में उतरने वाली भारतीय टीम कैसे मनोबल के साथ मैदान में उतरेगी?

इस बारे में पूर्व तेज़ गेंदबाज़ अतुल वासन कहते हैं कि दक्षिण अफ्रीका में उछाल वाले विकेट का अनुभव हासिल करने के बावजूद भारतीय गेंदबाज़ों ने न्यूज़ीलैंड में ख़राब प्रदर्शन किया.

वो कहते हैं, ''अब हर बार तो बल्लेबाज़ 300 या इससे अधिक के स्कोर का मैच नही जिता सकते, इसका असर बाकी मैचों पर भी पडेगा.''

ईशांत शर्मा के बारे में अतुल वासन कहते हैं, ''उन्हें इतने अधिक मौक़े दिए गए, इसके बावजूद उनके पास ना तो गति है और ना ही बल्लेबाज़ों को परेशान करने के लिए कोई अन्य हथियार. ऐसे में उन्हें अगले विश्व कप की रणनीति में रखना भी ग़लत होगा, उनकी जगह अब दूसरे गेंदबाज़ को अवसर देना चाहिए.''

वो कहते हैं, ''इसके अलावा रविंद्र जडेजा को भी बताना होगा कि उनकी ज़रूरत बल्लेबाज़ी में भी है, वह एक अच्छे ऑलराउंडर हैं. हेमिल्टन में भारत को स्टुअर्ट बिन्नी को अवसर देना चाहिए क्योंकि यहीं का अनुभव उनके भविष्य में काम आएगा.''

अब देखना है कि नेपियर के बाद हेमिल्टन में भारतीय क्रिकेट टीम कैसा खेल दिखाती है? अगर हेमिल्टन में भी भारत को हार मिली तो फिर उसकी वापसी और भी मुश्किल होगी.

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