आईपीएल: करोड़ों के खिलाड़ी और 'कौड़ी की जवाबदेही'

  • 14 फरवरी 2014
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आईपीएल की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस मुद्गल के नेतृत्व में तीन लोगों का एक पैनल बनाया था उसकी रिपोर्ट में कई परेशानी वाली चीज़ें लिखी हुई हैं. यह भारतीय खेल के लिए बहुत ही परेशान करने वाला पहलू है.

एक ऐसे समाज में जहाँ पहले से ही बहुत सामाजिक असमानता है, आप करोड़ों की बोलियां लगा रहे हैं. आप किसी को 14 करोड़ रुपए में किसी को दस करोड़ रुपए में ख़रीद-बेच रहे हैं.

वो भी तब जब लोग देख रहे हैं कि इस पर गोरखधंधे और सट्टेबाज़ी के आरोप लगे हैं. आरोप ही नहीं लगे हैं, टीम के मालिक पाए गए हैं सट्टेबाज़ी करते हुए.

मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट में तो गुरुनाथ मेयप्पन को दोषी पाया गया है. कमेटी ने पुलिस के रिकॉर्ड और दूसरे कई दस्तावेज़ों को देखा है और उन पर लगे आरोपों को सही पाया है.

रिपोर्ट में साफ़ तौर पर कहा है कि मेयप्पन टीम का चेहरा थे जबकि बीसीसीआई के प्रमुख और उनके ससुर एम श्रीनिवासन ने पहले कहा था कि मेयप्पन क्रिकेट के शौकीन के तौर पर टीम से जुड़े थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि मेयप्पन सट्टेबाज़ी में भी शामिल थे.

कमेटी की संस्तुति

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कमेटी के पास सज़ा देने का अधिकार नहीं है इसलिए उसने सिफ़ारिश की है कि आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल के नियमों के तहत तो चेन्नई सुपर किंग्स की टीम को बंद कर देना चाहिए.

इस कमेटी ने राजस्थान की टीम के मालिकों शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा के ख़िलाफ़ जाँच की बात कही है.

इस पैनल के एक सदस्य निलय दत्ता हैं. दत्ता क्रिकेट बोर्ड से संबंधित हैं. उन्होंने एक अलग रिपोर्ट दी है.

निलय दत्ता ने किसी खिलाड़ी का नाम लिए बिना कहा कि उनकी जिनसे बात हुई उनमें पांच-छह खिलाड़ियों के नाम आए हैं.

पैनल ने शामिल सभी ने कहा है कि इस पूरे मामले की विधिवत जाँच होनी चाहिए.

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रॉयल चैलेंजर्स बंगलौर के मालिक विजय माल्या ने अपनी एयरलाइंस को दिवालिया घोषित किया और बंद कर दिया.

उसके कर्मचारी अभी भी तऩख्वाह के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. एक तरफ माल्या कह रहे हैं कि आपको कर्मचारियों की तऩख्वाह देने के लिए पैसा नहीं दूसरी तरफ आप 14 करोड़ रुपए में खिलाड़ी ख़रीद रहे हैं.

पब्लिक की पसंद

मेरी निजी राय है कि आईपीएल क्रिकेट के डीएनए से खिलवाड़ कर रहा है. क्रिकेट की बुनियादी स्किल्स को नष्ट कर रहा है. हो सकता है कि किसी को लगे कि यह सही है.

अगर यह पब्लिक को पसंद है तो इसे चलना देना चाहिए. लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि इसमें जो काला धन है, जो मैच फिक्सिंग हो रही है उसे जारी रहने दिया जाए. इन चीज़ों पर कार्रवाई होनी चाहिए.

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अगर ये एक प्राइवेट इंटरप्राइज़ बन गया है, इसमें बड़े बड़े कारोबारी पैसा लगा रहे हैं तो इसमें कोई रेगुलेशन होना चाहिए.

जो लोग आईपीएल को पसंद करते हैं वो भी इस बात से खुश नहीं होंगे कि इसमें फिक्सिंग हो रही है, इसमें काला पैसा लग रहा है. आईपीएल के प्रशंसक भी साफ़ सुथरा खेल देखना चाहेंगे.

हितों का टकराव

भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी समस्या है 'हितों का टकराव'. बोर्ड के प्रेसीडेंट श्रीनिवासन एक टीम के मालिक हैं. ऐसे में वो चाहेंगे अपनी टीम को बचाना. जब तक 'हितों के ऐसे टकराव' हैं तब तक कोई सही क़दम उठाना संभव नहीं लगता.

जब इतने अधिक पैसों वाला टूर्नामेंट हो रहा है तो इसके लिए एक स्वतंत्र रेगुलेटर होना चाहिए. ऐसा रेगुलेटर जिसका न बोर्ड से मतलब हो, न ही टीम मालिकों से और न खिलाड़ियों से.

रेगुलेटर का एक कोड आफ़ एथिक्स होना चाहिए. खेल से जुड़ी सभी शिकायतें उसके पास जानी चाहिए. जो एथिक्स को तोड़ रहा हो उसे बहुत सख्त सज़ा होनी चाहिए.

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आरोप तो टेस्ट क्रिकेट में भी लगते हैं लेकिन वहाँ इसकी जाँच के लिए एंटी करप्शन यूनिट है.

मैकेनिज्म की ज़रूरत

आईपीएल में एक ऐसा मैकेनिज्म होना चाहिए जहाँ ऐसे खिलाड़ियों को सज़ा मिले ताकि देखने वालों को लगे कि जिसने ग़लत किया है उसे सज़ा भी मिली है.

आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल है तो उसमें इतने 'हितों के इतने टकराव' हैं कि वो चाहते ही नहीं कि कोई कार्रवाई की जाए.

पहले क्रिकेट में इतना पैसा नहीं था. पहले किसी को आइडिया नहीं था कि एक दिन इतना पैसा आ सकता है.

आईपीएल के खेल में प्राइवेट बिज़नेस का पैसा लगा है, इसमें ग्लैमर जुड़ा है. इसमें खिलाड़ी देश के लिए नहीं खेल रहा होता एक प्राइवेट क्लब के लिए खेल रहा है.

इसमें खिलाड़ी दो महीने में ऐसे लोगों से संपर्क में आता है जिसमें से कई वो लोग उसका ग़लत फायदा उठाना चाहते हैं.

क्रिकेट की छवि

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ऐसे माहौल में एक रेगुलेशन की बहुत ज़्यादा ज़रूरत है. एक वॉचडॉग की तरह रेगुलेशन हो क्योंकि इसमें गड़बड़ होने की बहुत ज़्यादा संभावना है.

आईपीएल में बहुत यंग खिलाड़ी शामिल होते हैं. वो देखते हैं कि कुछ खिलाड़ी तो करोड़ों रुपए कमा रहे हैं और कुछ को बहुत कम पैसा मिल रहा है.

आईपीएल का लाइफ स्पैम बहुत कम हैं. आईपीएल में 60-70 प्रतिशत खिलाड़ी ऐसे हैं जो एक सीज़न या दो सीज़न खेलेंगे. अगर वो इतना पैसा और ग्लैमर देखेंगे तो यह मानवीय स्वभाव के अनुकूल ही है कि वो इसकी तरफ ज़रूर आकर्षित होंगे.

मैं आईपीएल बंद करने के पक्ष में नहीं हूँ. अगर लोगों को पसंद है तो यह हो सकता है. लेकिन इसे चलाना है तो ऐसा चलाया जाए कि यह क्रिकेट की छवि को ख़राब न करे.

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