लोग कहते थे, 'ये लड़का क्रिकेट क्या खेलेगा?'

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आईपीएल-7 में वीरेंदर सहवाग से कहीं ज़्यादा पैसा पाने वाले मेरठ के कर्ण शर्मा एक ज़माने में इतने मोटे थे कि लोगों को लगता था कि ये लड़का क्रिकेट नहीं खेल पाएगा.

वही करण आईपीएल के मौजूदा सत्र में सबसे ज्यादा पैसा पाने वाले अनकैप्ड क्रिकेटर बनकर उभरे हैं.

हैदराबाद सनराइज़र्स ने उन्हें 3.75 करोड़ में ख़रीदा. टीवी के सामने बैठकर नीलामी प्रक्रिया को देख रहे कर्ण को भरोसा ही नहीं हुआ कि उनकी इतनी क़ीमत लग सकती है.

वह कहते हैं, ''इतने ज़्यादा धन के बारे में नहीं सोचा था. हां, ये ज़रूर लग रहा था कि पिछले आईपीएल में अच्छा प्रदर्शन किया है तो कोई न कोई लेगा ज़रूर और क़ीमत भी ठीक मिल जाएगी. लेकिन इतनी ज़्यादा रक़म की तो क़त्तई उम्मीद नहीं थी.''

आईपीएल के पिछले सीज़न में करण के प्रदर्शन ने सबका ध्यान खींचा था. सुनील गावस्कर से लेकर हर्षा भोगले तक ने उन्हें लंबी दौड़ का घोड़ा कहा था.

बाएं हाथ के स्पिनर ने पिछले सीज़न के 13 मैचों में 6.60 की औसत से 11 विकेट लिये थे. फिर इस रणजी ट्रॉफ़ी सत्र में वह बेहतरीन गेंदबाज़ के तौर पर उभरे.

यूपी ने किया था अनदेखा

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लेकिन एक समय ऐसा भी था जब वह निराशा में क्रिकेट छोड़ने के बारे में सोच रहे थे. तीन-चार साल तक उनका चयन किसी टीम में नहीं हुआ. वर्ष 2000 में वह अंडर-14 यूपी टीम से खेले. फिर उन्हें भुला दिया गया.

ऐसे समय में बास्केटबॉल की पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुकी उनकी मां पूनम शर्मा और पिता विनोद शर्मा ने मनोबल बढ़ाया.

कर्ण ने यूपी से खेलने का इरादा छोड़कर रेलवे की ओर रुख़ किया, जिसने उन्हें भरपूर मौक़े दिए. फ़िलहाल वह रेलवे की रणजी टीम में हैं.

वह कहते हैं, ''मैंने मेहनत करनी कभी नहीं छोड़ी, हमेशा लगा रहा. मुझको मालूम था कि एक दिन तो सफलता मिलेगी ही.''

कर्ण शर्मा के कोच अतहर अली उन्हें ऐसे ट्रेनी के तौर पर याद करते हैं, जो मेहनत करने से कभी पीछे नहीं हटा.

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कर्ण के पिता छह सात की उम्र में उन्हें अतहर अली के पास लेकर आए थे. अतहर कहते हैं, ''कर्ण की सबसे ख़ास बात है पूरे जुनून के साथ ख़ुद को झोंक देना और कभी पीछे नहीं हटना.''

वेतन 17,000 रुपए

26 साल के करण मेरठ के मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक़ रखते हैं. रेलवे में उनकी पोस्टिंग डीज़ल लोकोमोटिव वर्क्स वाराणसी में है. जहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तौर पर उन्हें वेतन के रूप में बमुश्किल 17,000 रुपए मिलते हैं.

कर्ण कहते हैं आईपीएलयुवा खिलाड़ियों को पहचान और पैसा दोनों देता है. बक़ौल उनके, ''मैं कई सालों से रेलवे की ओर से रणजी ट्रॉफ़ी में खेल रहा हूं लेकिन पहचान मिली आईपीएल में खेलना शुरू करने के बाद.''

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कर्ण ने अपना करियर बाएं हाथ के लेग स्पिनर के तौर पर शुरू किया, बाद में ख़ुद दाएं हाथ के बल्लेबाज़ के रूप में भी ख़ुद को विकसित किया. अब तो उन्हें ऑलराउंडर के साथ अच्छे फ़ील्डर के रूप में भी जाना जाता है.

कर्ण को टी-20 वर्ल्ड कप के संभावित खिलाड़ियों में भी चुना गया था लेकिन बाद में वह अंतिम टीम में जगह नहीं बना पाए. वह निराश नहीं हैं, कहते हैं, ''इंतज़ार कर रहा हूं, इंडियन टीम में आने के लिए तैयार हूं, बस मौक़े का इंतज़ार है.''

युवराज हैं फ़ेवरिट

कर्ण के सबसे फ़ेवरिट क्रिकेटर युवराज सिंह हैं तो गेंदबाज़ के रूप में वह ऑस्ट्रेलिया के महान गेंदबाज़ शेन वार्न के मुरीद हैं. उनके पास जब ख़ाली समय होता है, तब वह वार्न की गेंदबाज़ी के वीडियो देखते हैं.

जब उनसे ये पूछा गया कि आईपीएल सीज़न 7 में मिलने वाली पौने चार करोड़ की रक़म का क्या करेंगे? उनका सीधा जवाब होता है, ''अभी कोई प्लान नहीं है, फ़िलहाल सारा ध्यान खेल पर है जिसके लिए ये धन मिला है, लिहाज़ा एक ही इरादा है कि ख़ुद को साबित करके दिखाना है.''

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