तिरंगे के बाद सोची में कामयाबी का झंडा भी लहराएगा?

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"मेरे विचार से यह भारत के लिए बेहद ख़ुशी का अवसर है. मैं वैसे विंटर ओलंपिक खेलों का अपना मान्यता पत्र हासिल कर चुका हूं, जिस पर भारत लिखा हुआ है."

यह कहना है रूस के सोची शहर में आयोजित किए जा रहे शीतकालीन ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले भारतीय एथलीट शिवा केशवन का, जो ल्यूज़ स्पर्द्धा में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे है. उनके अलावा दो अन्य भारतीय एथलीट हिमांशु ठाकुर और नदीम इक़बाल भी इन खेलों में भाग ले रहे है.

(ओलंपिक में भारत की वापसी)

शिवा केशवन कहते हैं, "इससे पहले मैं स्वतंत्र ओलंपिक भागीदार के तौर पर यहां था. आख़िरकार अब हम अपना तिरंगा यहां लहरा पाएंगे, यह हमारे लिए बड़े गर्व की बात है."

शीतकालीन ओलंपिक खेलों में विशेष समारोह के दौरान कल भारतीय ध्वज फहराया गया. समारोह में इन तीनों भारतीय खिलाड़ियों के अलावा भारतीय ओलंपिक संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष एन. रामचंद्रन और अंतराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के पदाधिकारियों ने भाग लिया.

निलंबन हटा

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अब भारतीय खिलाड़ी 23 फ़रवरी को शीतकालीन खेलों के समापन समारोह में तिरंगा लेकर चल सकेंगे. उल्लेखनीय है कि पिछले दिनो अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने भारतीय ओलंपिक संघ पर लगाया गया निलंबन हटा दिया था.

(नारायण रामचंद्रन बने नए अध्यक्ष)

भारतीय ओलपिंक संघ के पदाधिकारियों पर चुनाव में घांघली और भ्रष्ट्राचार के गंभीर आरोप थे जिसके बाद क़रीब 14 महिने पहले अंतराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने भारतीय ओलंपिक संघ को निलंबित कर दिया था.

सोची शीतकालीन ओलंपिक सात फ़रवरी को शुरू हुए थे जबकि भारतीय ओलंपिक संघ के पदाधिकारियों के नए चुनाव नौ फ़रवरी को हुऐ और उसके दो दिन बाद ही भारत का निलंबन समाप्त हो गया. इसके साथ ही खेल गांव में भारतीय ध्वज तिरंगे के लहराने का रास्ता भी साफ़ हो गया.

भविष्य की योजनाएँ

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जबकि इससे पहले निलंबन के दौरान भारतीय खिलाड़ी दुनिया भर की अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के झंडे के नीचे प्रदर्शन कर रहे थे. शिवा केशवन ने कहा कि भारतीय ओलंपिक संध के निलंबन के कारण पूरी दुनिया के सामने हमें शर्मशार होना पड़ा.

(सोची में भारत की चुनौती)

भारतीय खिलाड़ियों के लिए ऐसी स्थिति का सामना करना असहनीय था. इससे आगे शिवा कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने दिखा दिया कि वह कितनी तेज़ी से कोई निर्णय ले सकते है. वैसे शिवा को इस बात का दर्द है कि भारतीय ओलंपिक संघ के चुनाव थोड़ा देर से हुए.

काश कि चुनाव शीतकालीन ओलंपिक शुरू होने से केवल एक सप्ताह पहले भी हो जाते तो ऐसी स्थिति नही आती. शिवा का कहना है कि चलो जो होना था हुआ लेकिन अब नए सिरे से भविष्य को लेकर योजनाए बनाई जा सकती हैं और एक नया इतिहास लिखा जा सकता है. संघ के नए पदाधिकारी भारतीय खेलों के लिए बहुत कुछ कर सकते है.

एथलीटों का प्रदर्शन

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अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि नए पदाधिकारी क्या कुछ करते हैं लेकिन उनके सामने सबसे बडी चुनौती तो आगामी राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों के लिए भारतीय खिलाड़ियों में जोश भरना है.

(क्या चमकेगी रूस की छवि)

इसके अलावा पिछले 14 महीने से लगभग निष्क्रिय पडे विभिन्न खेल संधो को भी संदेश देना होगा कि वह राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों के लिए खिलाड़ियों के चयन से लेकर उनकी ट्रेनिंग पर पूरा ध्यान दे.

वैसे नवनिर्वाचित अध्यक्ष एन रामचंद्रन पहले ही कह चुके हैं कि उनकी पहली प्राथमिकता एथलीटो के लिए पैसा जुटाना है. एथलीटों का प्रदर्शन बेहतरीन हो क्योंकि हम केवल एथलीटो की वजह से संघ में हैं.

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