सचिन को 'पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर' का तमग़ा

  • 15 मार्च 2014
सचिन तेंदुलकर

हाल ही में क्रिकेट से रिटायर होने वाले भारत के महान क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को मुंबई में सातवें सालाना ईएसपीएन-क्रिकइंफ़ो अवॉर्ड के आयोजन में "पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर" का ख़िताब दिया गया.

पूर्व और वर्तमान क्रिकेटरों, क्रिकेट लेखकों और टिप्पणीकारों की एक उच्चस्तरीय निर्णायक समिति ने ईएसपीएन-क्रिकइंफ़ो की 20वीं वर्षगांठ के मौक़े पर पिछले 20 साल के दौरान सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का चयन किया.

यह पुरस्कार वर्ष 1993 से 2013 तक बीस साल के दौरान इस पीढ़ी के महानतम क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए था और इस पुरस्कार के लिए सचिन तेंदुलकर का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के लेग स्पिनर शेन वॉर्न और दक्षिण अफ्रीका के ऑलराउंडर जैक्स कैलिस से था.

पाकिस्तान के ऑलराउंडर शाहिद अफरीदी को वेस्टइंडीज के खिलाफ 12 रन देकर सात विकेट लेने के शानदार प्रदर्शन के लिए 'वनडे बॉलिंग अवॉर्ड' दिया गया. इस मैच में शाहिद अफरीदी ने शानदार बल्लेबाजी भी की थी. इससे पहले वर्ष 2009 में भी शाहिद अफरीदी को बेहतरीन वनडे बॉलर का पुरस्कार दिया गया था.

बल्लेबाजी से जुड़े दो पुरस्कार हासिल करने में भारतीय खिलाड़ियों ने बाज़ी मारी. पिछले साल मोहाली में शिखर धवन ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 187 रन की शानदार पारी खेली थी जिसके लिए उन्हें टेस्ट बैटिंग अवॉर्ड दिया गया.

रोहित शर्मा को बेंगलूर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे में दोहरा शतक बनाने के लिए पुरस्कार दिया गया. भारत के मोहम्मद शामी को साल के सर्वश्रेष्ठ नवोदित खिलाड़ी का पुरस्कार दिया गया.

ईएसपीएन-क्रिकइंफो अवॉर्ड का यह सातवां साल है.

टेस्ट या ट्वेंटी-20

इस मौक़े पर सचिनतेंदुलकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) को ज़्यादा से ज़्यादा टेस्ट मैच का आयोजन करना चाहिए तभी टेस्ट क्रिकेट का भविष्य उज्ज्वल हो सकेगा.

उन्होंने कहा, "मुझे पूरा यक़ीन है कि टेस्ट क्रिकेट का दारोमदार अच्छे खिलाड़ियों के हाथों में है और खिलाड़ी आश्चर्यजनक ढंग से खेल रहे हैं.

दुनिया भर में ज़्यादातर टेस्ट मैचों में नतीजे आते हैं और बेहद कम मैच ड्रॉ होते हैं."

हालांकि उनका कहना था कि किसी भी खिलाड़ी को टेस्ट मैच खेलने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है क्योंकि टेस्ट मैच के लिए किसी खिलाड़ी का मानसिक और तकनीकी रूप से तैयार रहना ज़रूरी है.

उनका कहना था कि सीमित ओवर वाले क्रिकेट के प्रभाव से ही हाल के दिनों में इस खेल का विकास हुआ है और ट्वेंटी-20 क्रिकेट टेस्ट क्रिकेट का पूरक बन गया है.

उनके मुताबिक़ क्रिकेट से नए खिलाड़ियों को जोड़ने के लिए ट्वेंटी-20 एक बेहतरीन ज़रिया है क्योंकि इसके बाद ही ये खिलाड़ी एकदिवसीय क्रिकेट और टेस्ट क्रिकेट के लिए तैयार हो सकते हैं.

मास्टर बलास्टर तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से पिछले साल 16 नवंबर को सन्यास ले लिया था.

मुंबई के घरेलू मैदान में उन्होंने अपने करियर का 200वां टेस्ट खेलने के साथ क्रिकेट से सन्यास लिया. हाल ही में उन्हें भारत रत्न से भी नवाज़ा गया और वह यह सम्मान पाने वाले पहले खिलाड़ी है.

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