आईपीएल: 'गावस्कर कब हितों के टकराव से ऊपर हैं'?

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निष्पक्ष जांच के लिए एन श्रीनिवासन को हटने की सलाह दी जा रही थी. असल में ये सलाह नहीं बल्कि एक संकेत था कि वे खुद ही पद छोड़ दें वरना उचित कार्रवाई की जाएगी.

क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने श्रीनिवासन को कल सुबह साढ़े दस बजे का समय दिया है. अगर कल भी उन्होंने पद नहीं छोड़ा तो आदेश जारी हो सकता है.

अगला आईपीएल जल्द ही शुरू होने वाला है. देश की शीर्ष अदालत ने सुझाव दिया है कि चेन्नई और राजस्थान की टीमें आईपीएल न खेलें.

बीसीसीआई और आईपीएल पर इसका दूरगामी असर हो सकता है.

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बीसीसीआई बोर्ड इस संकट को अपने स्तर पर सुलझा नहीं पाया. उसे खुद बैठक बुला कर दो दिन पहले ही श्रीनिवासन को हटा देना चाहिए था.

ये काम बोर्ड ने कल नहीं किया तो उसे आज बोर्ड की जनरल बॉडी मीटिंग बुलाकर इस बारे में फ़ैसला ले लेना चाहिए था. बीसीसीआई को ये समझ नहीं आ रहा है कि सुप्रीम कोर्ट का सुझाव आदेश होता है.

मगर ये बोर्ड के बस की बात नहीं है. संभवतः कल सुप्रीम कोर्ट एक कमिटी बनाए और सीबीआई जांच या बोर्ड मॉनिटरिंग का सुझाव दे.

हितों का टकराव

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भ्रष्टाचार को रोकने के लिए ज़रूरी है कि बोर्ड के संविधान में बदलाव लाया जाए और स्पोर्ट्स ड्रॉफ्ट लॉ बिल की तरह ही अनुशासन बनाए रखने के लिए कोई बिल लाया जाए.

आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में महेंद्र सिंह धोनी पर याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाए गए हैं. याचिकाकर्ता के वकील हरीश साल्वे ने महेंद्र सिंह धोनी पर कई सवाल खड़े किए.

बोर्ड को पहले ही समझना चाहिए था कि हितों का टकराव ऊपर से आ रहा है और बोर्ड के अध्यक्ष ही टीम के मालिक हैं. इसके बावजूद धोनी को उन्होंने अपनी टीम में ले लिया. खुद कप्तान बन गए.

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खिलाड़ी के रूप में महेंद्र सिंह धोनी चाहे कितने ही अच्छे क्यों न हों, हितों का टकराव नहीं होना चाहिए.

बोर्ड के भीतर के टकराव से भारतीय क्रिकेट की छवि ख़राब हो रही है. टकराव के बीच भारतीय क्रिकेट के कप्तान का नाम आने से हमें दुनिया भर में जगह जगह शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने तो यहां तक कह दिया है कि बोर्ड में कोई ऐसा आदमी नहीं रहेगा जो इंडिया सीमेंट्स का कर्मचारी हो. धोनी ख़ुद इंडिया सीमेंट्स के कर्मचारी हैं.

महान खिलाड़ी

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बड़े ही शर्म की बात है कि धोनी पर ये आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने समिति के ग़लतबयानी करते हुए कहा कि मयप्पन का चेन्नई सुपरकिंग्स में किसी तरह का दखल नहीं. उन्होंने ऐसा इसलिए कहा कि दोनों के हित टकरा रहे थे.

सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि सुनील गावस्कर बोर्ड का काम संभाले. सुनील गावस्कर को बोर्ड के थोड़ा नजदीक माना जाता है.

सुप्रीम कोर्ट की नज़र में सुनील गावस्कर महान खिलाड़ी हैं इसलिए उन्होंने उनका नाम लिया. लेकिन हो सकता है कि सभी को शायद यह स्पष्ट न हो कि जिन 'हितों के टकराव' की बात हो रही है उसमें सुनील गावस्कर भी शामिल हैं.

सुनील गावस्कर बोर्ड के कर्मचारी हैं. वे तब आईपीएल के गवर्निंग काउंसिल मेंबर थे जब आईपीएल की कारगुजारी विवादों के घेरे में आई.

मैं एक खिलाड़ी के रूप में, क्रिकेट कमेंटेटर के रूप में उन पर कोई सवाल नहीं उठा रहा हूं लेकिन यदि क्रिकेट की सफाई करनी है तो जिनके भी हितों के टकराव पर सवालिया निशान है उन्हें शायद सुधार प्रक्रिया से बाहर रखना ही बेहतर होगा.

कार्रवाई की उम्मीद नहीं

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Image caption सुप्रीम कोर्ट ने सलाह दी है कि सुनील गावस्कर बोर्ड का काम देखें.

मुझे नहीं लगता कि बीसीसीआई की ओर से आगे किसी भी तरह की कार्रवाई होगी. बीसीसीआई को तो लकवा मार गया है. वहां कोई बात करने को तैयार नहीं हैं.

बीसीसीआई के गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हमारे नरेंद्र मोदी जी हिंदुस्तान को बता रहे हैं कि भ्रष्टाचार कैसे दूर करना चाहिए.

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गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की अपनी क्रिकेट बॉडी में जो हो रहा है, उसे तो वे ठीक नहीं कर पा रहे.

इसी तरह राजीव शुक्ला और अरुण जेटली भी बोर्ड से जुड़े हुए हैं. ये लोग हमें बता रहे हैं कि ये साफ़-सुथरी सरकार देंगे. अगर उनका दावा सच्चा है तो एक छोटी सी क्रिकेट बॉडी को तो एक मिनट में ठीक कर देना चाहिए.

(बीबीसी संवाददाता विनीत खरे से बातचीत पर आधारित)

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