मां बनने के बाद दिलाए मेडल

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साल 2012, जगह- लंदन, आयोजन- ओलंपिक

महिला बॉक्सिंग के क्वॉर्टर फाइनल मुक़ाबले में 29 साल की एमसी मेरी कॉम अपनी विरोधी पर दनादन मुक्के बरसा रही थीं. और देखने वाले हैरान थे कि उस वक्त दो बच्चों की मां मेरी कॉम के अंदर इतनी ऊर्जा कैसे ?

खेल के मैदान में भारतीय महिलाओं ने पिछले एक दशक में जितनी तरक्की की है, वो क़ाबिले तारीफ़ है.

सिर्फ़ युवावस्था में हीं नहीं, भारतीय महिलाएं मां बनने के बाद भी भारत की झोली में मेडल डाल रही हैं.

एमसी मेरी कॉम इसका बड़ा उदाहरण हैं. पांच बार की विश्व चैम्पियन मेरीकॉम ने अपने आखिरी दो विश्व चैम्पियनशिप मेडल मां बनने के बाद जीते.

यही नहीं, मेरी कॉम को अपना पहला ओलंपिक मेडल भी मां बनने के बाद मिला.

मेरी कॉम अपने तीसरे बेटे को भी जन्म दे चुकी हैं और 2016 में होने वाले रियो ओलंपिक खेलों में भारत को एक और मेडल दिलाने की तैयारी कर रही हैं.

इसी साल जुलाई में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और फिर सितंबर में होने वाले एशियाई खेलों के लिए भी मेरी कॉम कमर कस चुकी हैं.

बीबीसी ने खास बातचीत की भारत की कुछ ऐसी ही मां बन चुकी एथलीट्स से.

बच्चों से मिलती है प्रेरणा

डिस्कस थ्रोअर कृष्णा पूनिया आज खेलों की दुनिया का जाना माना नाम हैं.

दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों के बाद कृष्णा ख़ास तौर से उन महिला एथलीटों के लिए रोल मॉडल बन चुकी हैं, जिन्होंने मां बनने के बाद भी खेल की दुनिया में कुछ करना चाहती हैं.

महिलाओं की तरफ़ से कॉमनवेल्थ खेलों के ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में भारत को पहला गोल्ड कृष्णा ने ही दिलाया था.

कृष्णा अपनी सफलता का श्रेय अपने बेटे को देती हैं.

उनका कहना है, "दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों से पहले जब भी अपने बेटे से मेरी बात होती थी, वो कहता था कि मैं अपना खेल छोड़ दूं और घर आ जाऊं क्योंकि बच्चे चाहते हैं कि वो अपनी मां के पास रहें. लेकिन जब उसने दिल्ली में मेरा खेल देखा, मुझे मेडल जीतते हुए देखा और पूरे देश को इसका जश्न मनाते हुए देखा तो उसने मुझे और अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित किया."

"जब मैं लंदन ओलंपिक्स में भाग ले रही थी तो मेरे बेटे ने सबसे ज़्यादा मेरा उत्साह बढ़ाया. जब आप अपने खेल में अच्छा करते हैं तो आपके बच्चे भी आपको सपोर्ट करने लगते हैं."

कम नहीं है चुनौतियां

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लंबी कूद में भारत को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मेडल दिलाने वाली अंजु बॉबी जॉर्ज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है.

रोमन कैथोलिक अंजु ने मां बनने से ज़्यादा अपने खेल को तरज़ीह दी. रोमन कैथलिक समुदाय में किसी भी तरह के गर्भपात को एक गुनाह के रूप में देखा जाता है.

अंजु के लिए देश को मेडल दिलाना ज़्यादा ज़रूरी था जिसके लिए उन्होंने अपने कोच पति रॉबर्ट बॉबी जॉर्ज से शादी के दस साल बाद अपने पहले बच्चे को जन्म दिया.

उन्होंने बताया, "शादी के दस साल बाद मुझे पहला बच्चा हुआ, क्योंकि उस वक्त हमारी प्राथमिकता एथलेटिक्स थी. हम जानते थे कि ये हम दोनों के लिए काफी चुनौती भरा होने वाला है. पहले बच्चे के बाद मैंने 2012 लंदन ओलंपिक के लिए वापसी की कोशिश की लेकिन चोट की वजह से मैं क्वॉलिफाई नहीं कर पाई."

बच्चों के लिए इंतज़ार, मेडल के लिए नहीं

2000 सिडनी ओलंपिक में भारत को कांस्य पदक दिलाने वाली वेटलिफ्टर कर्णम मल्लेश्वरी के लिए भी चुनौतियां कम नहीं रहीं.

1997 में शादी के साथ ही उन्होंने ये तय कर लिया था कि वो बच्चे के लिए इंतज़ार कर सकती हैं लेकिन मेडल के लिए नहीं.

मल्लेश्वरी बताती हैं कि वेटलिफ्टिंग जैसे खेल मां बन चुकी महिलाओं के लिए और भी चुनौतीपूर्ण हैं.

वो कहती हैं, "वेटलिफ्टिंग जैसे खेलों में लड़कियों के लिए और भी मुश्किलें हैं क्योंकि इसे पुरुषों का खेल माना जाता है. ख़ासतौर से शादी और बच्चा होने के बाद महिलाओं को खेल में वापसी करने में काफी समय भी लगता है और मेहनत भी."

"बच्चा हो जाने के बाद शरीर में काफ़ी बदलाव आते हैं उसे रिडेवेलेप करने में काफ़ी वक्त लगता है. ये नहीं कहा जा सकता कि शादी या बच्चा हो जाने के बाद महिला एथलीटों का करियर खत्म हो जाता है. सिडनी ओलंपिक्स में मेडल जीतने के बाद मेरा बेटा हुआ, जिसके बाद मैंने अगले ओलंपिक्स में भाग लिया. कॉमनवेल्थ में मैंने ना सिर्फ रिकॉर्ड्स बनाए, बल्कि मेडल भी जीता."

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