क्या ब्राज़ील में फ़ुटबॉल मैच फ़िक्स हो सकते हैं?

फ़ीफ़ा मुख्य सुरक्षा अधिकारी राल्फ़ माचके इमेज कॉपीरइट Getty

ब्राज़ील में फ़ुटबॉल के विश्व कप को शुरू हो चुका है. ऐसे में यह दावा सामने आना कि स्कॉटलैंड और नाइजीरिया के बीच हुए वार्म-अप मैच को फ़िक्स करने की कोशिश की गई थी, कान खड़े कर देता है.

क्रिकेट पर तो आए दिन फ़िक्सिंग का साया पड़ता रहा है और इससे खेल और खिलाड़ियों की काफ़ी किरकिरी भी हुई है. लेकिन फ़ुटबॉल के लिए यह ख़बर आम नहीं है और विश्व कप जैसे महा आयोजन में फ़िक्सिंग होना खेल प्रेमियों के पूरे विश्वास को हिला सकता है.

हालांकि दुनियाभर के फ़ुटबॉल प्रेमी और विशेषज्ञों का मानना है कि ब्राज़ील में होने वाले फ़ुटबॉल विश्व कप से सटोरिए दूर ही रहेंगे लेकिन 'फ़ीफ़ा' के सुरक्षा प्रमुख राल्फ़ माचके की राय ऐसी नहीं है.

कौन कर सकता है 'फिक्सिंग'?

फ़ीफ़ा के सुरक्षा प्रमुख ने बताया कि वह और खेल में भ्रष्टाचार रोकने के लिए उनकी पूरी टीम ब्राज़ील में होने वाले विश्व कप पर नज़र रखे हुए है. राल्फ़ के अनुसार सट्टेबाज़ी को रोकने के लिए वह कुछ ख़ास बिंदुओं पर ध्यान दे रहे हैं.

1. ऐसी टीमों को चिन्हित किया गया हैस जिनसे सटोरिए संपर्क कर सकते हैं या पहले संपर्क किया है.

2. ग्रुप स्टेज के आखिरी मैच जिनमें ऐसी टीमें खेलेंगी जो प्रतियोगिता से बाहर हो चुकी हैं, सटोरिए उन मैचों को अपना निशाना बना सकते हैं.

3. मुख्य प्रतियोगिता से पहले होने वाले वार्म अप मुक़ाबलों में भी सटोरिये सक्रिय हो सकते हैं.

4. कई खिलाड़ियों व मैदान में मौजूद रहने वाले रेफ़रियों से सट्टेबाज़ों के संपर्क करने की ख़बरे आई हैं और फ़ीफ़ा का सुरक्षा दल उन पर नज़र रखे हुए है.

हालांकि राल्फ़ ने ऐसे किसी भी खिलाड़ी, टीम या रेफ़री का नाम बताने से इनकार कर दिया जिनसे सट्टेबाज़ों के संपर्क करने की ख़बर मिली है लेकिन उन्होंने यह साफ़ किया कि उनकी लिस्ट में इंग्लैंड की टीम हाई रिस्क पर नहीं है.

कैसे होती है फ़िक्सिंग

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क्रिकेट में तो कोई खिलाड़ी कितने रन बनाएगा या किस बॉल पर बांउड्री लगेगी या विकेट गिरेगा इस पर 'स्पॉट फ़िक्सिंग' होती है या फिर पूरे मैच के नतीजे पर फ़िक्सिंग होती है लेकिन फ़ुटबॉल में सट्टेबाज़ी कुछ अलग तरह से की जाती है.

पहला तरीका 'एशियन हैंडिकैप' कहलाता है जिसमें किसी टीम की वर्तमान फ़ॉर्म के अनुसार टीम पर दांव लगाए जाते हैं. टीम अपनी फ़ॉर्म के अनुसार प्रदर्शन करती है तो सट्टेबाज़ को फ़ायदा मिलता है.

दूसरा तरीका 'ओवर-अंडर' कहलाता है जिसमें सिर्फ़ गोल के अंतर पर शर्त लगाई जाती है.

राल्फ़ ने बताया, "ओवर-अंडर के लिए सटोरियों को पूरी टीम को खरीदना पड़ता है, ऐसे में ये उतना ख़तरनाक नहीं है. लेकिन एशियन हैंडिकैप में रेफ़री को ख़रीदा जा सकता है और इसे पता करना भी मुश्किल है."

हालांकि फ़ीफ़ा की सुरक्षा समिति सभी टीमों और खिलाड़ियों से मुलाक़ात कर रही है लेकिन जितना बड़ा आयोजन होता है ख़तरा भी उतना बड़ा हो जाता है क्योंकि खिलाड़ी भी ज्यादा हो जाते हैं.

वैसे सुरक्षा एंजेसियों के अनुसार इस साल विश्व कप पर 85 अरब का दांव लग सकता है.

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